अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर मित्र बराक के पास केवल 100 दिन बचे हैं. उसके बाद हिलरी क्लिंटन या डॉनल्ड ट्रंप में से कोई उनकी जगह लेगा. हालांकि अमेरिका का अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा, ये नवंबर में ही तय हो जाएगा, लेकिन पूरी ताकत उसके हाथ में जनवरी में ही आएगी. इसी बीच अमेरिका के एक टॉप थिंक-टैंक ने कहा है कि जो भी अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बने, वो 100 दिनों के अंदर नरेंद्र मोदी से जरूर मिल ले, वरना...
जो भी अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बने, वो 100 दिन में मोदी से मिल ले, वरना...
ये सर्जिकल स्ट्राइक से भी गंभीर मामला है दोस्त.

अमां ठहरो यार. ये कोई सर्जिकल स्ट्राइक वाला मामला नहीं है, लेकिन है बड़ा गंभीर. अमेरिका का एक बहोब्बड़ा थिंक टैंक है. नाम है 'सेंटर ऑफ स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज'. शॉर्ट में कहते हैं CSIS. इसका काम इंटरनेशनल चीजों पर नजर रखते हुए अमेरिकी सरकार को ये सुझाव देना है कि क्या करना फायदेमंद होगा और क्या नहीं. उसी ने कहा है कि जो भी अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बने वो भारत के साथ समिट लेवल की मीटिंग कर ले.

इसके पीछे कारण ये है कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच कुछ फाउंडेशनल अग्रीमेंट होने हैं. CSIS का सुझाव है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने के लिए 100 दिनों के अंदर ये अग्रीमेंट कर लिए जाएं. ऐसा नहीं हुआ तो बात आगे बढ़ाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. ये अग्रीमेंट कंप्यूटिंग और कम्युनिकेशन टेक्नॉलजी से जुड़े हैं, जिनसे भारत को अपनी सुरक्षा क्षमताएं बढ़ाने में मदद मिलेगी.
CSIS ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'चौतरफा सुरक्षा वार्ता के लिए अगले एडमिनिस्ट्रेशन को अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट और विदेश मंत्रालय के साथ लेकर ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत के साथ काम करना चाहिए. ये वार्ता प्रशांत और हिंद महासागर के इलाके में साझा हितों पर केंद्रित होनी चाहिए.'
CSIS कह रहा है कि अगर नए अमेरिकी राष्ट्रपति 100 दिनों के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलते हैं तो इससे दोनों के संबंधों को लेकर एक मजबूत संदेश जाएगा. रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि तालिबान के साथ होने वाली समूह-वार्ता में अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत को भी एक ऑब्जर्वर या स्टेकहोल्डर की हैसियत से शामिल करना चाहिए.
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