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ईरान में जंग से रूस की मौज हो गई, ट्रंप ने दी बड़ी छूट, अब पूरी दुनिया से पैसा कमाएगा

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव को लेकर तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. अमेरिका ने रूस को लेकर यह कदम ग्लोबल मार्केट में बढ़ती तेल कीमतों को स्थिर करने के मकसद से उठाया है.

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अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल की अस्थायी बिक्री की अनुमति दी है. (फाइल फोटो: ITG)

ईरान के साथ जंग के बीच अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है. ट्रंप प्रशासन ने समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे प्रतिबंध को कुछ समय के लिए हटा लिया है. यह छूट सिर्फ 30 दिनों के लिए ही मिलेगी. अमेरिका ने यह कदम ग्लोबल मार्केट में बढ़ती तेल कीमतों को स्थिर करने के मकसद से उठाया है.

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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है. होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव को लेकर तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है. सप्लाई बाधित होने की वजह से कई देशों में तेल की कीमत बढ़ गई है. 

अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने गुरुवार, 12 मार्च को बताया कि उसने एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है. यह लाइसेंस रूस के उस कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की डिलीवरी और बिक्री की इजाजत देता है, जो 12 मार्च तक जहाजों पर पहले ही लोड हो चुके थे. यह लाइसेंस 11 अप्रैल को वॉशिंगटन के समय के मुताबिक आधी रात तक मान्य रहेगा.

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अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसकी जानकारी दी. इस छूट से रूस में बने लगभग 125 मिलियन बैरल तेल तक पहुंच आसान हो सकती है. यह तेल अभी दुनिया भर में लगभग 30 जगहों पर फंसा हुआ है. 

यह कदम 5 मार्च को जारी की गई एक अलग 30 दिन की छूट के बाद उठाया गया है. उस छूट के तहत भारत को समुद्र में फंसे रूस के तेल के जहाजों से तेल खरीदने की इजाजत दी गई थी, जिससे भारत को कुछ समय के लिए राहत मिली थी.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में संकेत दिया था कि प्रशासन बाजार से तेल की सप्लाई में अचानक आई कमी की भरपाई के लिए कुछ पाबंदियों में ढील देने पर विचार कर रहा है. ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, 

"तो, हमने कुछ देशों पर पाबंदियां लगाई हुई हैं. हम उन पाबंदियों को तब तक हटा देंगे, जब तक कि होर्मुज स्ट्रेट फिर से चालू नहीं हो जाता."

जैसे-जैसे अमेरिका और इजरायल के हमले ईरान पर तेज होते जा रहे हैं, तेल की कीमतें फिर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 73-75 डॉलर प्रति बैरल थी.

वीडियो: ईरान ने अमेरिका के तेल टैंकर को निशाना बनाया

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