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"कोचिंग सेंटर्स डेथ चैंबर्स बन गए हैं"- UPSC अभ्यर्थियों की मौत पर SC ने जो सुनाया है, अधिकारी पानी मांगते फिरेंगे!

Old Rajinder Nagar UPSC Aspirants Death: Supreme Court ने कहा कि अगर कोचिंग सेंटर्स बुनियादी सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो इन्हें ऑनलाइन कर देना चाहिए. कोर्ट ने भी कहा कि ये सेंटर्स बच्चों की जिंदगियों के साथ खेल रहे हैं.

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Supreme Court ने कहा कि कोचिंग सेंटर्स UPSC अभ्यर्थियों की जिंदगियों से खेल रहे हैं. (फोटो: सोशल मीडिया)

दिल्ली में 3 UPSC अभ्यर्थियों (UPSC Aspirants Death Delhi) की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और केंद्र सरकारों को नोटिस दिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कोचिंग सेंटर्स (IAS Coaching Centres) को डेथ चैंबर्स कहा, जो बच्चों की जिंदगियों के साथ खेल रहे हैं. कोर्ट ने इन कोचिंग सेंटर्स को रेगुलेट ना कर पाने के लिए प्रशासन को फटकार भी लगाई.

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दरअसल, पिछले महीने दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में स्थित RAU's IAS Study Circle कोचिंग के बेसमेंट में डूबने की वजह से तीन UPSC अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी. इस बेसमेंट में बारिश का पानी भर गया था. बाद में हुई जांच में पता चला कि इस बेसमेंट में फायर सेफ्टी रूल से लेकर दूसरे बुनियादी नियमों का उल्लंघन हो रहा था.

Supreme Court ने खूब सुनाया

इधर, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या कोचिंग सेंटर्स के लिए किसी तरह के नियम बनाए गए हैं, जो अभ्यर्थियों से आसमान छूती फीस लेते हैं और फिर भी उन्हें सुरक्षित माहौल नहीं दे पाते. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भूयान की बेंच ने कहा,

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"ये जगहें डेथ चैंबर्स बन गई हैं. अगर ये कोचिंग सेंटर्स एक गरिमापूर्ण जीवन और  सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन नहीं करते हैं तो इन्हें ऑनलाइन मोड में चलाया जाना चाहिए. ये कोचिंग सेंटर्स बच्चों की जिंदगियों के साथ खेल रहे हैं."

कोर्ट ने कहा कि अगर सुरक्षा मानकों की बात करें तो कोचिंग सेंटर्स में ढंग का वेंटिलेशन होना चाहिए और साथ ही साथ सुरक्षित एंट्रेस और एग्जिट होने चाहिए.

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UPSC अभ्यर्थियों की मौत ने दिल्ली के इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर एक व्यापक बहस छेड़ दी है. हादसे के दिन नालियां बारिश के पानी को बहाकर नहीं ले जा पाईं और पानी कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में भर गया. इससे पहले, पिछले सप्ताह दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार लगाई थी. कोर्ट की तरफ से कहा गया था,

"इन बच्चों को जीवित होना चाहिए था. कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारी तो तय की ही जानी चाहिए."

कोर्ट ने MCD और इस तरह की परिस्थितियों में शहर के इन्फ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग को लेकर इसकी योग्यता पर सवाल उठाए थे. कोर्ट ने कहा था,

"इनके पास इस तरह के संकटों से निपटने की योग्यता ही नहीं है. शायद ये समझते ही नहीं हैं कि सिविक प्लानिंग किस तरह से काम करती है. शहर का ड्रेनेज सिस्टम ठीक से काम करे, ये जिम्मेदारी MCD के अधिकारियों की है. ये एक आपराधिक लापरवाही है."

इस पूरे मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही साथ कई कोचिंग सेंटर्स को सील भी किया गया है. इन कोचिंग सेंटर्स पर आरोप है कि ये सुरक्षा मानकों के सर्टिफिकेट लिए बिना कामकाज कर रहे हैं. 

वीडियो: पानी का 'चालान न काटने' के लिए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और MCD को धन्यवाद दिया!

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