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'सदन चलाना सतीश महाना से सीखो', यूपी विधानसभा अध्यक्ष की क्यों जमकर तारीफ हो रही?

सतीश महाना के विधानसभा चलाने की तारीफ सत्ता से लेकर विपक्ष और आम लोग भी कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोगों ने यहां तक लिख दिया कि सदन चलाना सतीश महाना से सीखने की जरूरत है.

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यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना. (X-@UPVidhansabha)

यूपी विधानसभा में पिछले हफ्ते तक बजट सत्र चल रहा था. इस सत्र में जितनी चर्चा बजट और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नहीं हुई, उससे ज्यादा विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की हुई. वजह है, उनके सदन चलाने का तरीका. हर सदन में विपक्ष सरकार को घेरने के लिए हंगामा करता है. अध्यक्ष डांट डपट कर बैठाते हैं. पर महाना इसलिए खबरों में हैं क्योंकि उन्होंने विपक्ष को तो शांत कराया ही, सरकार के मंत्रियों को भी खूब हड़काया है.

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महाना के विधानसभा चलाने की तारीफ सत्ता से लेकर विपक्ष और आम लोग भी कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोगों ने यहां तक लिख दिया कि सदन चलाना सतीश महाना से सीखने की जरूरत है. महाना को ये तारीफ ऐसे समय में मिल रही है, जब लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया है.

'मुझे काम क्यों गिनवा रहे हो...'

यूपी सरकार में मंत्री हैं दिनेश प्रताप सिंह. उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार तथा कृषि निर्यात विभाग के स्वतंत्र प्रभार मंत्री हैं. विधानसभा में बोल रहे थे. इसी दौरान उन्होंने अध्यक्ष सतीश महाना को संबोधित करते हुए कहा,

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मैंने आपको स्वयं फोन करके आपके क्षेत्र में काम मांगे हैं और फिर काम करवाए भी हैं.

सत्ता पक्ष के विधायक मेज थपथपाने लगे. पर इतना सुनकर महाना भड़क गए. उन्होंने कहा,

अगर आपको काम करवाना ही नहीं है तो आप हो क्यों वहां? काम करवाया तो अच्छी बात है, मुझे क्यों गिनवा क्यों रहे हो? बाकी लोगों को गिनवाओ.

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अध्यक्ष महाना की बात सुनकर दिनेश सिंह थोड़ा ठिठके. उन्होंने महाना से कहा पूरी बात मेरी आ जाने दीजिए. लेकिन महाना ने एक बार फिर डपट दिया. उन्होंने कहा,

अरे इसका क्या मतलब है. आप मेरे को गिनवा रहे हो. काम करने के लिए ही तो बैठे हो वहां.

'...माइक बंद कराऊं'

दिनेश प्रताप सिंह इकलौते मंत्री नहीं हैं जिन्हें अध्यक्ष की डांट पड़ी. एक मंत्री को तो महाना ने यहां तक कह दिया कि माइक बंद करा देंगे. प्रश्नकाल के दौरान सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप सदन में जवाब रहे थे. कश्यप के पास पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का स्वतंत्र प्रभार है. कश्यप जवाब दे चुके थे, विपक्ष पर कुछ टिप्पणी कर रहे थे. सदन के अध्यक्ष सतीश महाना ने धन्यवाद भी बोल दिया और कश्यप को बैठने के लिए भी बोल दिया. महाना ने कहा,

धन्यवाद...धन्यवाद. अगला प्रश्न. थैंक यू मंत्री जी.

लेकिन कश्यप मान नहीं रहे थे. वो बात खत्म करते-करते विपक्ष को घेरना चाह रहे थे. अंत में सतीश महाना ने फटकार लगा ही दी. उन्होंने कहा,

मंत्री अच्छा नहीं लगेगा कि मैं आपका माइक बंद कराऊं. बैठ जाइए.

हालांकि, कश्यप ने तब भी अपनी बात पूरी की. उन्होंने कहा कि सरकार सब काम करती है, फिर भी विपक्ष आरोप लगाता है तो आपको सोचना पड़ेगा.

माइक फेंक कर चल दिए अध्यक्ष!

प्रश्नकाल चल रहा था. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सपा के कमाल अख्तर को प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित किया. पीछे से विपक्ष के विधायक हंगामा कर ही रहे थे. महाना ने थोड़ा डांट कर शांत कराने की कोशिश की.

इतने में सत्ता पक्ष वाले हंगामा करने लगे. महाना ने तुरंत मोर्चा संभाला. उन्होंने कहा,

ये आपका काम नहीं ये काम है. बैठो. (बीजेपी विधायक) केतकी बैठो, ये मेरा काम है.

महाना लगातार शांत करा रहे थे, लेकिन ट्रेजरी बेंच वाले सुनने को तैयार नहीं हो रहे थे. अब विधानसभा अध्यक्ष को गुस्सा आ चुका था. उन्होंने लगभग चीखते हुए कहा,

अब आप हाउस चलाओगे क्या? आपको हाउस चलाना है क्या? आप सब लोगों को हाउस चलाना है क्या?

महाना का ये बोलना था कि पूरे सदन में सन्नाटा छा गया. लेकिन उनका गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ था. उन्होंने माइक उतारकर फेंका. और 10 मिनट के लिए हाउस स्थगित कर दिया.

हालांकि, ऐसा नहीं है कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सिर्फ सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों को ही डांट रहे थे. विपक्ष के लोगों की भी उन्होंने खूब सुनाया है.

'कविता मत सुनाओ, प्रश्न पूछो!'

समाजवादी पार्टी के विधायक आशू मलिक सवाल पूछने के लिए खड़े हुए. वह महंगाई और कालाबाजारी पर सरकार को घेर रहे थे. इस बीच कविता सुनाने लगे.

देश प्रदेश में सता रही है सभी को यह बीमारी
कुछ महंगाई लूट रही है, कुछ कालाबाजारी..

आशू मलिक ने ये दो लाइनें पढ़ीं. तीसरी पर पहुंचे थे, तब तक सतीश महाना ने धीरे से बोल ही दिया- ‘अरे प्रश्न पूछो...’. हालांकि, मलिक ने या तो सुना नहीं या अनसुना कर दिया. उन्होंने कविता जारी रखी. एक लाइन बाद फिर महाना ने कहा कि 'प्रश्न पूछो'. मलिक तब भी नहीं माने. कविता बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी.

इतने में सतीश महाना का सब्र टूट ही गया. उन्होंने सीधे बोल दिया- 'कविता मत सुनाओ, प्रश्न पूछो.'

आशू मलिक को ये बात अच्छी नहीं लगी. उन्होंने चेयर से कहा- ‘माननीय, अभी तो एक ही मिनट हुआ है.’ ये सुनकर तो महाना का पारा थोड़ा और चढ़ गया. उन्होंने कहा,

'अरे एक मिनट का मतलब. जो मर्जी होगा, नहीं बोल लोगे. प्रश्न पूछो.'

यह सुनकर आशू मलिक थोड़ा हकबका तो गए, लेकिन वो भी कविता पूरी किए बिना माने नहीं.

एक और मजेदार वाकया हुआ. बजट सत्र का नौवां दिन था. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही चर्चा में हिस्सा ले रहे थे. मंत्री बोल ही रहे थे कि बीच में विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. कई विपक्षी विधायक एक साथ बोलने लगे. थोड़ी देर तक तो अध्यक्ष महाना चुप रहे. फिर उन्होंने भरोसे में लेकर विनती करते हुए शाही को बैठने के लिए कहा. शाही पहले हिचके, फिर बैठ गए. उनके बैठते ही महाना विपक्ष की तरफ घूमे और एक-एक करके कई विधायकों का नाम लिया और उनसे खड़े होकर बोलने को कहा.

पहले तो किसी को समझ नहीं आया. फिर महाना ने कहा कि और भी लोग खड़े होना चाहें, एक साथ बोलें. उन्होंने कहा,

'सब लोग साथ में बोलें, मैं सबको सुन रहा हूं. मैं किसी को मना नहीं कर रहा.'

विपक्ष के विधायकों को समझ आ चुका था कि महाना ने बिना शोर मचाए, कड़ा प्रहार किया है. इस बाद सारे विधायक बैठ गए और महाना ने सूर्य प्रताप शाही को भाषण देने के लिए कह दिया.

यह क्लिप भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई. लोगों ने लिखा कि सदन चलाना महाना से सीखने की जरूरत है.

वीडियो: नेता जी घेरे में: 2019 के चुनाव में अमित शाह ने सतीश महाना से कागज़ पर क्या लिखवा लिया था?

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