UP पुलिस मतलब जान का खतरा? ये केस पढ़ लिए तो सवाल की वजह जान जाएंगे
कासगंज: पुलिस लॉकअप में अल्ताफ़ की मौत कोई पहला मामला नहीं.
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मृतक अल्ताफ (बाएं) और एसपी रोहन प्रमोद बोत्रे (दाएं)
यूपी का कासगंज. यहां के सदर कोतवाली के पुलिस लॉकअप में एक 22 वर्षीय युवक अल्ताफ़ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. अल्ताफ़ के परिजनों ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़, अल्ताफ ने टॉयलेट के अंदर लगे नल में अपने जैकेट के हुड में लगी डोरी को फंसाकर गला घोंट लिया. लोग पूछ रहे हैं कि दो फीट ऊंची टंकी से कोई इस तरह आत्महत्या कैसे कर सकता है. पुलिस लॉकअप में आरोपी की मौत का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी हिरासत में मौत पर सवाल उठे हैं. इन्हीं मामलों पर एक नजर डालते हैं.
1) 19 अक्टूबर आगरा
आगरा ज़िले के जगदीशपुर थाने में 16 अक्टूबर को मालखाने से 25 लाख की चोरी हुई थी. इस सिलसिले में अरुण नाम के सफ़ाई कर्मचारी को गिरफ़्तार किया गया. मंगलवार 19 अक्टूबर की रात अरुण की मौत हो गई. परिजनों ने आरोप लगाया कि मौत पुलिस की पिटाई से हुई. आगरा पुलिस ने धारा 302 के तहत पुलिसकर्मियों पर मुक़दमा दर्ज़ किया. आरोपी पुलिसवालों को सस्पेंड किया गया. बवाल बढ़ा तो योगी सरकार ने परिवार को 10 लाख मुआवजा और एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया.पूरे मामले की जांच एक गजटेड ऑफिसर को सौंपी गई है.
2) 24 जुलाई, संत कबीर नगर
इस दिन ज़िले के बखिरा थाना की पुलिस ने 55 साल के एक शख्स को हिरासत में लिया था. बहराइची नाम था उनका. जिस दिन उन्हें हिरासत में लिया गया, उसी दिन उनकी मौत की खबर आई. बहराइची की गलती इतनी थी कि उनका बेटा अशोक गांव की एक लड़की को कथित रूप से अपने साथ ले गया था. दी इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पुलिस ने बहराइची को उसके बेटे पर दबाव बनाने के लिए गिरफ़्तार किया था. बाद में उनकी हत्या की खबर आई. परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया. बताया गया कि मारपीट से जब उनकी तबीयत ख़राब हुई तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई. परिजनों का दावा है कि मौत की पुष्टि होते ही आरोपी पुलिसवाले भाग खड़े हुए. मामले की जानकारी मिलते ही ज़िले के SP ने थाने के SHO को सस्पेंड कर दिया था.
3) 3 जून, सुल्तानपुर
राजेश कोरी नाम के आदमी के ख़िलाफ़ नाबालिग लड़की के अपहरण का आरोप लगता है. आरोपी को कुदवार थाने की पुलिस हिरासत में लेती है. हिरासत में लेने के वक़्त नाबालिग लड़की भी आरोपी के साथ होती है. पुलिस उसे घर भेज देती है. लेकिन कुछ समय बाद राजेश को गंभीर चोटों के साथ इलाक़े में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाता है. वहां उसे मृत घोषित कर दिया जाता है. राजेश की मौत के बाद कुदवार थाने के एसएचओ समेत 4 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला होता है.
4) 21 मई, उन्नाव
नाम फैसल हुसैन. काम- सब्जी बेचता था. उम्र, महज़ 18 साल. ज़िले के बांगरमऊ पुलिस थाने ने उसे हिरासत में लिया था. वजह थी कोरोना संकट से जुड़े नियमों का उल्लंघन. लेकिन हिरासत में लेने के बाद फैसल की मौत हो जाती है. दी इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सिर में चोट बताया गया था. वहीं, पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग फैसल को घसीटते हुए नज़र आए थे. पुलिस ने शुरू में दावा किया था कि फैसल की मौत दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई थी. फ़ैसल के परिजनों और स्थानीय लोगों ने विरोध किया, तब 3 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुक़दमा दर्ज किया गया. हालांकि जांच के बाद हत्या के आरोप को ग़ैर इरादतन हत्या में बदल दिया गया.
5) 25 मार्च, अंबेडकर नगर
आजमगढ़ के 37 साल के जियाउद्दीन को यूपी पुलिस की SWAT टीम ने 24-25 मार्च को हिरासत में लिया था. वे तब अपने परिजनों से मिलने जा रहे थे. पुलिस हिरासत में रहते हुए उनकी मौत हो गई. मृतक के परिजनों ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया. कहा कि जियाउद्दीन की मौत पुलिस की प्रताड़ना की वजह से हुई है. हालांकि, पुलिस का दावा था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया. इस पर जब बहुत विरोध हुआ, तो जियाउद्दीन को गिरफ्तार करने वाली SWAT टीम के प्रभारी देवेंद्र पाल सिंह और अन्य 7 लोगों के ख़िलाफ़ अंबेडकर नगर के अकबरपुर थाने में केस दर्ज किया गया. बाद में अंबेडकर नगर के एसपी आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि मामले की जांच सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट कर रहे हैं और ये जांच ख़त्म होने वाली है.
6) 11 फ़रवरी, जौनपुर
इस साल का पहला और इस रिपोर्ट का आख़िरी मामला है पूर्वी यूपी के जौनपुर ज़िले का. घटना 11 फरवरी की है. उस दिन एक 24 साल के युवक की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. उस समय की खबरों के मुताबिक़ जौनपुर के बक्सा स्टेशन से पुलिस ने कृष्णा यादव को लूटपाट के मामले में हिरासत में लिया था. सिर्फ़ पूछताछ के लिए. थाने में कृष्णा यादव ने पेटदर्द की शिकायत की. पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई. वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. इसके बाद कृष्णा के भाई ने मामले की शिकायत दर्ज़ की. उन्होंने 9 पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप लगाया था. उसके कुछ समय बाद मामले की सुनवाई करते हुए जौनपुर की एक अदालत ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. सितंबर महीने की शुरुआत में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. कोर्ट ने कहा था कि पुलिस फ़ोर्स के कुछ वरिष्ठ अफ़सर आरोपी पुलिसवालों को बचाने की कोशिश कर रहे थे. उसने ये तक कह दिया था कि इन अधिकारियों का आरोपी पुलिसकर्मियों के साथ सबूत मिटाने में हाथ था. वहीं, CBI ने अपनी जांच में दावा किया था कि मारे गए कृष्णा यादव को फंसाया गया था.
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