हमारी इस नज़ाकत को क़यामत से न कम समझो हमें ऐ चाहने वालों, न मिट्टी का सनम समझो...1981 की एक फ़िल्म है. ज्योति. फ़िल्म याद हो न हो, उस फ़िल्म का एक गाना ज़रूर याद होगा - 'कलियों का चमन जब खिलता है'. लता मंगेशकर की आवाज़ और बप्पी लहरी की म्यूज़िक पर अरुणा ईरानी नाचते हुए ये गाना गा रही होती थीं. https://www.youtube.com/watch?v=ZsaJn-nGdSo वैसे गाना अपनी असली ऊंचाई पर तब पहुंचा जब मार्केट में इसका रीमिक्स आया. इक्कीसवीं शताब्दी बस शुरू होने को ही थी. और टीवी पर ये गाना आने लगा. उस टाइम इतने रेडियो स्टेशन वगैरह नहीं होते थे. सीडी-वीडी पे ये गाना बहुत चमका था. डेक, जिसे डेग कहा जाता था, पर इस गाने ने धूम काटी हुई थी. जिसके पास इसका वीडियो होता था, शाबाशी का असली दावेदार वो ही होता था. दरअसल इसमें फ़ीचर हुई मॉडल बिना कोई भी कपड़ा पहिने अपने स्तनों को फूलों से ढके हुए प्रकट होती थी. और यही इस गाने की यूएसपी मानी जाती थी. बाकी म्यूज़िक का क्या है, बनता ही रहता है. https://www.youtube.com/watch?v=LKzTpM_KQsQ खैर, अब हुआ ये है कि ब्रिटेन में एक बस ड्राइवर ने बस में सवारी भरी, बस चलायी, और बस चलाते-चलाते ये गाना गाने लगा. बैठी हुई सवारियां जब तक कुछ समझ पातीं, उनके बीच बैठे कुछ लोग भी उसी में शामिल हो गए. बाद में क्लियर हुआ कि ये इनकी सबकी मिलीभगत है. सबने पहिले से ही प्लानिंग की हुई थी. चलती हुई बस में हुई फिर जुगलबंदी. ड्राइवर पूरी ताकत से लड़की की आवाज़ में गाने की भरपूर कोशिश कर रहा था. लेकिन हिंदी के बोल ने आने की वजह से आवाज़ ऐसी निकल रही थी जैसे पूंछ पर पैर पड़ने से कोई कुत्ता मिमिया उठा हो. खैर, वीडियो देखो: https://www.youtube.com/watch?v=TqkBl3EbGf4
भरी बस में अंग्रेज ड्राइवर गाने लगा 'कलियों का चमन...'
ब्रिटेन का एक बस ड्राइवर. बस चलाई. चलती बस में गाने लगा. बैठे हुए लोग सन्न रह गए.
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फोटो - thelallantop
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