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पाकिस्तान में दो हिंदू नाबालिग बच्चियों के साथ जो हुआ, उससे घिनौना कुछ नहीं

इमरान खान को जवाब देते नहीं बन रहा है.

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लड़कियों के पिता ने ज़मीन पर बैठकर सिर पीटना शुरू कर दिया.
होली की शाम थी. पाकिस्तान के सिंध प्रांत के देहरकी कस्बे से 2 लड़कियां गायब हो जाती हैं. नाम रीना और रवीना. उम्र क्रमशः 13 और 15 साल. कोई नहीं जानता था कि लड़कियां कहां गईं. अपनी मर्जी से गईं या किसी ने किडनैप किया. फिर पता चलता है कि उन्हें किडनैप कर लिया गया है. उनके भाई और पिता की एक वीडियो आती है जिसमें वो कह रहे हैं कि लड़कियों को सिर्फ अगवा नहीं किया गया बल्कि इस्लाम कबूलने पर मजबूर भी किया गया. आरोप है कि दो उम्रदराज आदमियों से उनका निकाह करा दिया गया. कुछ दिन बाद लड़कियों का एक वीडियो भी सामने आया जिसमें वो कह रही हैं कि उन्होंने किसी के दबाव में इस्लाम क़ुबूल नहीं किया है. ये उनका अपना फैसला था. ये मामला सबसे पहले जिब्रान नासिर नाम के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने उठाया. उन्होंने ट्विटर पर इन लड़कियों का विडियो शेयर किया. जिसमें में इस्लाम क़ुबूल करने पर सफाई दे रही हैं. एक और वीडियो में वो दो लोगों के साथ नज़र आ रही हैं. ये लोग वही हैं जिनके साथ इन लड़कियों का निकाह कराया गया था. उनमें से एक के मुताबिक ये लड़कियां इस्लाम से प्रभावित थीं. जब तक लोगों को ये पता चला तो वो भड़क गए. नारेबाज़ी की. विरोध किया. तब जाकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की. किडनैप की गई लड़कियों के भाई ने FIR दर्ज कराई जिसमें उसने कहा है कि जिन लोगों ने उनकी बहन को अगवा किया है उनका उनके पिता से विवाद हो गया था. जिसका बदला लेने के लिए आरोपियों ने ऐसा किया. FIR में ज़बरदस्ती निकाह कराने के लिए केस दर्ज कराया गया. दोनों लड़कियां नाबालिग हैं इसलिए सिंध चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र का हर नागरिक बच्चे की परिभाषा में आता है और उसकी शादी नहीं कराई जा सकती. वहीं दूसरी तरफ पुलिस से उस वायरल वीडियो का हवाला देकर मामले को रफादफा करने की कोशिश की जिसमें लड़कियां खुद कि मर्जी से इस्लाम कबूल करने की बात कह रही हैं. लड़कियों के पिता की भी एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें वो ज़मीन पर बैठकर खुद को बेतहाशा पीट रहे हैं. कह रहे हैं, मुझे गोली मार दो. मैं यहां से नहीं जाऊंगा. मामला कितना गंभीर है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर इंडियन हाई कमिशनर से रिपोर्ट मांग ली है. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों यानी हिंदुओं के साथ ज्यादतियां होती हैं. ये बात किसी से छिपी नहीं है, वक़्त बेवक्त ऐसी खबरें आती रहती हैं जब मुस्लिम बाहुल इलाकों में अल्पसंख्यकों को परेशान किया गया हो. कई बार ये घटनाएं इतनी छोटी होती हैं कि उनपर किसी का ध्यान नहीं जाता. लेकिन इस बार मामला पाकिस्तान के वजीर-ए-आज़म तक जा पहुंचा है. भारत के बिगड़े हुए ताल्लुकात का तकाज़ा है तो उन्होंने में जवाब देने में देरी नहीं लगाई. मामले की गंभीरता समझते हुए जांच के आदेश दे दिया है. पाकिस्तान में हिंदुओं का धर्म परिवर्तन ऐसी समस्या है जिसके खिलाफ काफी लोग पहले भी आवाज़ उठा चुके हैं. पाकिस्तान के पीएम भी अपनी इलेक्शन रैलियों में सबको साथ लेकर चलने की बात कह चुके हैं. खासकर अल्पसंख्यकों को. अब देखना है कि इस मामले को वो अंजाम तक पहुंचाते हैं या नहीं. बस रिपोर्ट्स का इंतजार है. ये पहली बार नहीं है: पाकिस्तान में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. वहां के लोगों ने इसके खिलाफ आवाज़ भी उठाई है. कमाल सिद्धिकी भी उन्हीं लोगों में से एक हैं, पाकिस्तान के एक अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में उन्होंने एक लेख लिखा है. इसका टाइटल है - व्हाट अ शेम. इसमें वो पाकिस्तान में चल रहे इस धर्म परिवर्तन मुहीम का पर्दाफाश करते हैं. पहले वो किडनैपिंग वाले गोरखधंधे के बारे में बताते हुए कहते हैं कि ये खतरनाक है. फिर बताते हैं कि ये होता कैसे है. कमाल लिखते हैं.
किसी लड़की के किडनैप होने के बाद जो भी होता है वो सब ड्रामा है. परिवार वाले मदद के लिए इधर उधर भागते हैं. वहीं सरकारी मशीनरी अगवा करने वालों का साथ देती है. काफी भागदौड़ के बाद FIR दर्ज कर ली जाती है लेकिन तब तक दरगाह भारचुंदी के पीर 'कन्वर्शन सर्टिफिकेट' जारी करके उनकी शादी करा देते हैं. जब तक पुलिस उनका 'पता' लगाती है तब तक सारी कानूनी कार्रवाई पूरी कर ली जाती है.
इस मामले में भी कुछ कुछ ऐसा ही हुआ. अब जिन्हें ये लग रहा है कि इस मामले में लड़कियों ने धर्म अपनी मर्जी से बदला है वो शायद गलत भी हो सकते हैं क्योंकि कमाल सिद्दिकी ने इस साजिश का पर्दाफाश पहले ही कर दिया है. वो लिखते हैं-
किडनैप करने वालों के दबाव में या समाज में अपनी बदनामी के चलते वापस ना जा पाने वाली लड़कियां ऐसे बयान दे देती हैं कि वो अपनी मर्जी से भागी हैं. ऐसे में कोर्ट कुछ नहीं कर पाटा और उसे किडनैपर्स को छोड़ना पड़ता है.
पाकिस्तान के लिए ये शर्मसार कर देने वाली घटना है. अगर इस बार कोई कदम नहीं उठाया गया तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाक पीएम की छवि निश्चित तौर पर ख़राब होगी.
वीडियो देखें:पाकिस्तान में नहीं दिखाया जाएगा IPL 2019

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