ट्विटर मज़ेदार जगह है. यहां हर कोई है. जो नहीं है आने की सोच रहा है. जो सोच भी नहीं रहा है, अस्तित्व में ही नहीं है. हां, वो रणबीर कपूर हो तो बात अलग है. ;) खैर, अब तो पुलिस-प्रशासन भी कुछ बढ़िया काम करता है तो ट्विटर पर डाल देता है. 'नेकी कर दरिया में डाल' वाली कहावत की जगह 'नेकी कर ट्विटर पर डाल' ने ले ली है. एक ट्विटर यूज़र ने उत्तर प्रदेश पुलिस के आधिकारिक हैंडल पर ट्वीट करते हुए मुरादाबाद टैक्सी स्टैंड की वजह से लोगों को हो रही दिक्कत के बारे में बताया. टैक्सी स्टैंड पर मौजूद टैक्सी चालक लड़ाई झगड़ा कर रहे थे और शराब पी रहे थे. पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई की. मुरादाबाद पुलिस ने उस टैक्सी स्टैंड पर से 10 लोगों को गिरफ्तार किया.

इस पूरे मामले का एक छोटा सा वीडियो बनाकर उत्तर प्रदेश पुलिस ने ट्वीट किया. असल में वो थोड़ा फुटेज खाना चाह रहे थे. और इसमें कोई बुराई भी नहीं है. अभी कुछ दिन पहले ही एक बच्चे को नुमाइश दिखाने के लिए भी यही लोग उसे ले गए थे. खैर, मुद्दे की बात ये है कि मुरादाबाद वाले ट्वीट पर अभय गुप्ता नाम के एक ट्विटर यूज़र ने पुलिस से कहा कि एक शख्स अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए अपने ख़िलाफ़ 22 साल पुराने केस को बंद करवाने की कोशिश कर रहा है. पुलिस ने तुरंत ही इसपर भी जवाब दिया और कहा कि अपनी समस्या के बारे में संक्षेप में बताएं.

अब अभय ने तुरुप का इक्का निकाला और उतर प्रदेश पुलिस को ट्रोल कर दिया. उसने कहा कि ऐसा करने वाले शख्स का नाम योगी आदित्यनाथ है और वो उत्तर प्रदेश का चीफ़ मिनिस्टर है. इसके साथ ही उसने उस खबर का लिंक भी शेयर किया जिसमें बताया गया था योगी आदित्यनाथ पर चल रहा 22 साल पुराना मुकदमा हटा दिया जाएगा.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अभी तक इस ट्वीट का कोई जवाब नहीं दिया है. हां, इसके स्क्रीनशॉट ज़रूर चल रहे हैं. ट्विटर एक ऐसी जगह है जहां 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी' वाला मामला सबसे ज़्यादा चलता है. उत्तर प्रदेश पुलिस फिलहाल इसका ताज़ा शिकार हुई है.
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