
सिक्कों का प्रोडक्शन कम कर दिया गया है.
पहले जानें, क्या है फैसला
फैसला असल में सिक्कों के प्रोडक्शन को कम करने का है ना कि सिक्के बंद करने का. जो सिक्के लोगों के पास हैं, वो चलते रहेंगे और नए सिक्के भी बनते रहेंगे मगर धीमी रफ्तार से.
क्यों लिया गया फैसला
इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि नोटबंदी के बाद काफी संख्या में सिक्के बनाए गए थे. जो कि अभी तक आरबीआई के स्टोर में भारी मात्रा में हैं. आरबीआई मिंट से सिक्के नहीं उठा रहा है. यही कारण है कि सिक्कों का प्रोडक्शन रोका गया है.

आरबीआई सिक्के नहीं ले रहा है.
आम आदमी के लिए क्या
इस कदम से आम लोगों को परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. मार्केट में सिक्कों की कोई कमी नहीं होने वाली है. क्योंकि आरबीआई के पास हचक्क के सिक्के भरे पड़े हैं. 24 नवंबर, 2016 को ही उसके पास 1, 2, 5 और 10 रुपये के 676 करोड़ रुपये मूल्य के सिक्के थे.
सरकार ने क्या किया
सिक्काबंदी की खबर के बाद फाइनेंस मिनिस्ट्री ने मिंट के अधिकारियों के साथ एक बैठक की. इसमें यही तय हुआ कि सिक्कों का प्रोडक्शन होता रहेगा. बस इसकी रफ्तार घटा दी जाएगी. माने अब तक देश की चार मिंट्स में रोजाना दो शिफ्ट में 5-6 मिलियन सिक्के बनते थे. मगर अब एक शिफ्ट में काम करने का फैसला हुआ है. माने एक दिन में 2 मिलियन सिक्के ही बनाए जाएंगे. ये स्थिति तब तक रहेगी, जब तक आरबीआई इन मिंट्स में इकट्ठी हुई सिक्कों की खेप उठा नहीं लेता. सरकार आरबीआई से भी इन सिक्कों को लेने के लिए कहने वाली है.

मितरों... याद है ना.
अब तो मामला समझ में आ ही गया होगा. कोई सिक्काबंदी नहीं हुई है. और होती तो मोदीजी ना आते टीवी पर. 8 नवंबर, 2016 तो याद ही होगा ना. बोल देते मित्रों... आज से सिक्के बंद. इतना सस्पेंस थोड़ी ना रखते. खैर टीवी देखते रहिए, हो तो कुछ भी सकता है. मगर फिलहाल कोई बंदी नहीं हुई है. आराम से सिक्के लेते-देते रहिए. और जो लोग सोशल मीडिया के धुरंधरों के चक्कर में परेशान हैं, उनको भी सच्चाई बता दीजिए.
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