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पोस्टमॅार्टम रिपोर्ट ने दिल्ली केस के क्या राज खोले?

20 साल की अंजली पर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी. उसके पिता 9 साल पहले गुज़र गए थे.

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सांकेतिक फोटो (साभार: आजतक)

देश की राजधानी दिल्ली. और दिल्ली की मुस्तैद पुलिस. इसी पुलिस के तहत एक विभाग आता है - दिल्ली ट्रैफिक पुलिस. 1 जनवरी के रोज़ दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एक ट्वीट करके नए साल के मौके पर अपनी सजगता की जानकारी दी. पुलिस ने लिखा कि यातायात नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए 31 दिसंबर 2022 को एक विशेष अभियान चलाया गया था. जिसका मकसद था -
>मोटरसाइकिल स्टंट्स
>ओवर स्पीड वाहन
>आड़ी-तिरझी, गैरज़िम्मेदार और खतरनाक तरीके से ड्राइविंग पर लगाम लगाना. इसके लिए स्थानीय पुलिस, माने दिल्ली पुलिस और पुलिस कंट्रोल रूम से मदद ली गई थी. एक दर्जन से ज़्यादा इलाकों में कुल 1 हज़ार 329 वाहन चालकों पर पुलिस कार्रवाई हुई. इनमें -
> शराब पीकर गाड़ी चलाने के 318 मामले
> खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने के 175 मामले
> रॉन्ग साइड गाड़ी चलाने के 55 मामले
> टू व्हीलर पर 3 लोग बैठाने के 47 मामले
> नाबालिग़ों के गाड़ी चलाने के 70 मामले
> बिना हेलमेट टू व्हीलर चलाने के 664 मामले सामने आए. पुलिस ने 53 गाड़ियां ज़ब्त भी कर लीं.

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ज़ाहिर है, पुलिस ने मेहनत तो की ही थी. लेकिन इस मेहनत के बयान में पुलिस ने एक ऐसी बात भी जोड़ दी, जो हज़म नहीं हो रही. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने दावा किया - ''no death in fatal accident accident reported on the new year eve of 2023. माने नए साल के मौके पर वाहन दुर्घटना के चलते किसी की मौत रिपोर्ट नहीं हुई. लेकिन अब हम जानते हैं कि मौत रिपोर्ट भले न हुई हो, लेकिन हुई तो थी. 31 दिसंबर-1 जनवरी की दरम्यानी रात कंझावाला रोड पर 20 साल की अंजली की स्कूटी को एक कार ने टक्कर मार दी. टक्कर के बाद कार अंजली को कई किलोमीटर तक दिल्ली की सड़कों पर घसीटती रही. इस भयानक हादसे ने अंजली की जान ले ली. लेकिन न ट्रैफिक पुलिस, न सादी पुलिस की कोई जांच चौकी या विशेष अभियान इस गाड़ी को रोक पाया. प्रत्यक्षदर्शियों और परिवार जनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस तो कई बार खबर करने के बाद भी देर से पहुंची. इसीलिए आज दी लल्लनटॉप पूरी तरह इस घटना को ही समर्पित रहेगा. बीते दो दिनों में जितनी नई जानकारी सामने आई है, हम वो आपसे बांटेंगे, साथ ही उठाएंगे कुछ ज़रूरी सवाल, जिनके जवाब न मिले, तो
न जाने कितनी अंजलियों को हम खो देंगे.

2 जनवरी के दी लल्लनटॉप शो में हमने कंझावाला कांड में मृतका का नाम नहीं बताया था. क्योंकि परिवार ने रेप की आशंका जताई थी. और आप जानते ही हैं कि भारत का कानून यौन हिंसा के मामलों में पीड़ित/पीड़िता की पहचान ज़ाहिर करने की इजाज़त नहीं देता. अब ये स्पष्ट है कि इस मामले में यौन अपराध की पुष्टि नहीं हुई. इसीलिए हम आज दी लल्लनटॉप शो में अंजली को उसके नाम से बुला रहे हैं.

20 साल की अंजली पर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी. उसके पिता 9 साल पहले गुज़र गए थे. और मां को किडनी की बीमारी है. उन्हें डायलिसिस की ज़रूरत पड़ती रहती है. मां के साथ-साथ अंजली पर उसके चार भाई-बहनों की भी ज़िम्मेदारी थी. सो उसने हाई-स्कूल के बाद ही एक सलून में काम करना शुरू कर दिया. जब वक्त मिलता, शादियों और पार्टियों में स्पोर्ट स्टाफ का काम भी कर लेती. हमारे साथी उदय और विजय ने इस स्टोरी को फील्ड से कवर किया है. ये दोनों संतप्त परिवार से मिले. 

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अंजली को बहुत कम उम्र में बहुत बड़ी मुश्किलों से जूझना पड़ रहा था. लेकिन उसे खुश होना और खुश करना आता था. इंडियन एक्सप्रेस के लिए जिज्ञासा सिन्हा ने अंजली का एक प्रोफाइल लिखा है. ये सुंदर भी है. और त्रासद भी. जिज्ञासा बताती हैं कि अंजली वैसी ही थी, जैसा 20 साल की कोई भी लड़की होती है. उसे पंजाबी गानों का शौक था. वो मेकअप करती और इंस्टाग्राम पर डांस की रील्स पोस्ट करती थी. पैसे जोड़-जोड़कर उसने बैंगनी रंग की एक स्कूटी खरीदी, जो उसे काम पर लाती ले-जाती थी, उसके सपनों को भी उड़ान देती थी. कोरोना काल में सलून का काम मंद पड़ गया. तो अंजली का अगला लक्ष्य ये था कि वो पैसे जोड़कर ब्यूटीशियन का कोर्स करेगी और फिर आत्मनिर्भर हो जाएगी.

काम के चलते अंजली अक्सर देर से आया करती थी. 31 दिसंबर की शाम 6 से सात के बीच अंजली ने अपनी मां से कहा कि वो काम पर जा रही है. वो जल्दी लौट आएगी और साथ में खाना भी ले आएगी. रात साढ़े नौ बजे अंजली ने फिर घर पर कॉल किया. और कहा कि उसे लौटने में सुबह के तीन या चार बज जाएंगे. इसीलिए मां खान मंगवाकर खा लें. इसके बाद परिवार को 1 जनवरी की सुबह घटना की जानकारी मिली. 

दिल्ली पुलिस को अलग से कोसने की ज़रूरत नहीं. ये सर्व-विदित है कि देश का कोई भी पुलिस विभाग हो, अगर आपके पास ''जैक'' न हो, तो आपका अनुभव कुछ ऐसा ही रहता है. खैर, दिल्ली पुलिस ने मामले में पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इनके नाम हैं -
दीपक खन्ना
अमित खन्ना
मनोज मित्तल
कृष्ण
मिथुन

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इनपर गैर इरादन हत्या का मामला कायम किया गया है और ये पांचों 3 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं. दिल्ली पुलिस ने आज दावा किया, कि हादसे के रोज़ अंजली स्कूटी पर अकेली नहीं थी. उसके साथ एक और लड़की थी. एक्सिडेंट में इस लड़की को हल्की चोटें आईं और वो डर के मारे दुर्घटना स्थल से चली गई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि अंजली के साथ मौजूद लड़की घबरा गई थी और उसने घटना की जानकारी पुलिस को नहीं दी. आज ये लड़की प्रेस के सामने आई. 

अंजली के परिवार का कहना था कि अंजली का फोन रात 10 बजे के बाद स्विच ऑफ हो गया था. लेकिन पुलिस सूत्रों का ये भी मानना है कि अंजली का फोन 10 बजे से मध्यरात्रि तक एक्टिव था. और संभवतः दुर्घटना के दौरान नष्ट हो गया. ये भी मालूम चला है कि 31 दिसंबर की शाम साढ़े 7 बजे से लेकर रात के डेढ़ बजे तक अंजली और उसकी दोस्त विवान पैलेस नाम के एक होटल में थीं. 

अंजली रात साढ़े 12 के करीब होटल में थी. इसका मतलब, घटना उसके होटल से जाने के बाद की है. सुल्तानपुरी के करीब एक्सिडेंट हुआ और इसके एक घंटे बाद तक वो कार के नीचे घिसटती रही. तब तक कार कंझावाला पहुंच गई थी. इसी बीच अंजली के प्राण चले गए. आज पुलिस को पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है. रिपोर्ट के मुताबिक अंजली के शरीर पर ब्लंट फोर्स इंपैक्ट के निशान हैं. माने नुकीली चीज़ से प्रहार नहीं हुआ. कोई ठोस और भारी चीज़ थी. संभव है कि ये गाड़ी के एक्सिडेंट और फिर उसके नीचे खिंचे चले जाने से हुआ हो. रिपोर्ट के मुताबिक किसी यौन अपराध का संकेत करती चोटें भी नहीं मिली हैं.

अब आते हैं सवालों पर. दी लल्लनटॉप की टीम किशन विहार में उस जगह भी गई, जहां पुलिस के मुताबिक अंजली की स्कूटी बरामद हुई. हमने वहां आम लोगों से बात की. इसी बातचीत से पहला सवाल निकलकर सामने आता है.
1. पुलिस के मुताबिक अंजली की स्कूटी से आरोपियों की कार किशन विहार में टकराई और अंजली का शव मिला कंझावाला इलाके के करीब. आम लोगों का कहना है कि ये रास्ता बहुत खराब है. इसमें कई गड्ढे हैं. ऐसे में शव इतनी दूर तक कैसे घिसटता गया? सुनिए सड़क को लेकर आम लोगों ने क्या कहा? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस रास्ते पर स्ट्रीट लाइट्स लगी तो हैं, लेकिन वो नियमित रूप से जलती नहीं. ये सामान्य सी बात है कि स्ट्रीट लाइट के होने से सड़कें सुरक्षित बनती हैं और अपराधी हतोत्साहित होते हैं. तब क्या कारण है कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर पा रही.

2. दूसरा सवाल - अलग अलग प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुलिस को कम से कम 5 बार कॉल किया गया. तब उसने मौके पर पहुंचने में इतना वक्त क्यों लिया? किशन विहार के लोगों ने दी लल्लनटॉप को बताया कि सिर्फ उस दिन ही पुलिस लेट नहीं आई थी. प्रायः इस इलाके में पुलिस लेट ही आती है. जबकि 1 किलोमीटर के अंदर सुल्तानपुरी थाना है.

3. तीसरा सवाल - तकरीबन एक घंटे तक अंजली कार के नीचे फंसी रही. इस दौरान कार 10 किलोमीटर से भी ज़्यादा दूरी तक चली. ऐसे में क्या ये कार दिल्ली पुलिस के किसी भी चेक-पॉइंट से नहीं गुज़री? अगर ऐसा हुआ, तो क्या पुलिस ने गाड़ी पर ध्यान नहीं दिया? ध्यान दीजिए, 31 दिसंबर की रात दिल्ली पुलिस ने अतिरिक्त इंतज़ाम का दावा ही नहीं किया था, अगले दिन आंकड़े तक पेश कर दिए थे.

4. चौथा सवाल - आरोपियों पर तो कार्रवाई होगी. जांच चल ही रही है. लेकिन क्या कोई जांच ऐसी होगी, जिसमें ये पता किया जाएगा कि दिल्ली पुलिस इस घटना को रोकने में कहां नाकाम हुई? क्या पुलिस के अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी? ज़रूरी नहीं कि पुलिस को दोष सिद्ध ही हो. पुलिस निर्दोष भी साबित हो सकती है और ऐसे में आने वाले वक्त में ऐसी घटनाओं के लिए स्टैंडिंग ऑपरेटिंग प्रोसीजर बनाया जा सकता है. लेकिन क्या ऐसा होगा? चलते चलते आपको इस मामले के राजनैतिक पक्ष के बारे में भी जानकारी देते चलें.

आम आदमी पार्टी इस मुद्दे के सहारे बीजेपी को घेरने में जुटी है. 02 जनवरी को AAP ने दिल्ली में LG हाउस के बाहर प्रदर्शन किया था और दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया था कि घटना में एक बीजेपी नेता के आरोपी होने की वजह से उस पर कार्रवाई नहीं हो रही. ये बात तो कल की थी लेकिन आज आम आदमी पार्टी के नेताओं का दल सुबह-सुबह दिल्ली के पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा के पास पहुंच गया. आप के नेताओं की तरफ से कमिश्नर को एक पत्र सौंपा दिया है जिसमें कुछ मांग की गई थीं. 

सुबह का वक्त बीता और दिन ढलते-ढलते सीएम अरविंद केजरीवाल का एक ट्वीट आया जिसमें उन्होंने लिखा था कि उन्होंने पीड़िता की मां से बात की है और वो परिवार को दस लाख का मुआवजा देंगे. केजरीवाल ने ट्वीट में ये भी बताया कि दिल्ली सरकार अंजली को न्याय दिलाने के लिए बड़ा से बड़ा वकील खड़ा कर देगी. भाजपा की ओर से इस मामले में ज़्यादा कुछ नहीं कहा जा रहा है. गौतम गंभीर ने ज़रूर घटना पर दुख जताते हुए न्याय की मांग की. और ये कहा, कि राजनीति नहीं होनी चाहिए. 

हमने आपको तथ्य बता दिए. नेताओं के बयान सुना दिए. और अपने सवाल भी. अब आपको फैसला करना है कि आप इन सवालों के जवाबों को कितनी शिद्दत से खोजते हैं. क्योंकि अंजली भले इस दुनिया में न हो, लेकिन हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम इस दुनिया को बाकी अंजलियों के लिए सुरक्षित बनाएं.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: 1 घंटे भर तक अंजलि कार के नीचे फंसी रही, दिल्ली पुलिस को दिखी क्यों नहीं?

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