1. इस बला का नाम मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) है. समझ ही गए होंगे कि ये मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलेगी. 508 किमी के इस रूट में से 351 किमी हिस्सा गुजरात और 157 किमी हिस्सा महाराष्ट्र से गुजरेगा.

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2. सबसे मेन चीज है इसकी स्पीड. जोकि 350 kmph होगी. फिलहाल देश में सबसे तेज ट्रेन है गतिमान एक्सप्रेस, उसकी औकात 160 kmph ही है. सो बुलेट ट्रेन का भौकाल इसलिए भी टाइट रहेगा.
3. मुंबई से अहमदाबाद पहुंचने में फिलहाल 7-8 घंटे लगते हैं. बुलेट ट्रेन 12 स्टेशनों पर रुकने के बाद भी 508 किमी का ये सफर 3 घंटे में निपटा देगी. और अगर इसे सिर्फ 4 स्टेशनों मुंबई, अहमदाबाद, सूरत और वड़ोदरा पर रोका जाए तो सफर दो घंटे में खतम समझो.
4. इस रूट पर 12 स्टेशन मुंबई, ठाणे, विरार, भोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भड़ूच, वड़ोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती हो सकते हैं. मुंबई को स्पेशल ट्रीटमेंट मिलेगा यानी स्टेशन अंडरग्राउंड होगा. सब पैसे का खेल है.
5. ये बात मजेदार है. बुलेट ट्रेन का मुंबई में 7 किमी का हिस्सा समुद्र के अंदर होगा. 25 किमी का रूट सुरंग से गुजरेगा. मतलब पूरा एडवेंचर मिलेगा. 92% यानी 468 किमी लंबा ट्रैक एलिवेटेड रहेगा. मजदूरों का बहुत तेल निकलने वाला है. काहे से इसके लिए 173 बड़े और 201 छोटे ब्रिज बनाने होंगे.

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6. प्रॉजेक्ट की शुरुआत 10 कोच वाली 35 बुलेट ट्रेनों से होगी. एक बुलेट ट्रेन में 750 लोग बैठ सकेंगे. इन ट्रेनों में हर दिन 36,000 पैसेंजर्स सफर करेंगे. लगे हाथ किराया भी जान लो. 2700 से 3000 रुपये के बीच हो सकता है.
7. बुलेट ट्रेनें रोजाना 70 फेरे लगाएंगी. साफ-सफाई का भी इंतजाम किया गया है. हर 20 घंटे की रनिंग के बाद ट्रेन की सफाई की जाएगी. वो भी 4 घंटे तक. पर सफाई की असली टेस्टिंग तो बेटा तब होगी जब ई ट्रेन में कौनो कनपुरिया बैठी. ऐसी जगह पुड़िया फसाएगा कि ढूंढते रह जाओगे.
8. सोच रहे होंगे कि इतना झामा है तो पैसा कितना लगेगा. सही सोच रहे हैं. पेल के खर्चा हो रहा है बुलेट ट्रेन के लिए. माने करीब 1.20 लाख करोड़ रुपये. फट गई ना. आंखें. ज्यादा गणित में जाएं तो हर किमी पर ट्रेन, ट्रैक और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कीमत 236 करोड़ रुपए आएगी.

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9. अब पक्का यही कहोगे. दोस्त हो तो जापान जैसा. जित्ता खर्चा हो रहा है उसका 88% जापान दे रहा है, वो भी महज 0.1% के इंट्रेस्ट रेट पर. इसे चुकाना भी हमें 50 साल में होगा. बैंक वालों की तरह नहीं कि रोज क्रेन लेकर खड़े हैं खुपड़ी पर.
10. एक बड़ा फायदा इस प्रॉजेक्ट का ये है कि तमाम नल्लों को नौकरी मिल जाएगी. इसमें 16,000 अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावना है. जब ट्रेन चलने लगेगी तो रख-रखाव और ऑपरेशन के लिए लगभग 4000 कर्मचारियों की जरूरत होगी. वहीं 20,000 लोगों को कंस्ट्रक्शन के वक्त काम मिल जाएगा.

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11. अब ऐसा नहीं है कि अहमदाबाद से मुंबई जाने वाले ही हमेशा मौज लेंगे. औरों को भी सरकार चानिस देगी. अगले चरणों पर भी प्लानिंग शुरू हो गई है. माने अहमदाबाद-मुंबई के बाद दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-नागपुर, मुंबई-चेन्नई और मुंबई-नागपुर रूटों पर काम होगा. नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन इन सभी पर काम कर रहा है.
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