ब्रेक्सिट में तीन दिनों से जाम लगा था. 12 लोग इसके चलते लुढ़क गए. इनमें एक 12 महीने का बेबी भी था. अब आप खोपड़ी खुजा रहे होंगे. ट्रैफिक जाम और वो भी ब्रेक्सिट में. ऐसा कैसे हो सकता है? बिल्कुल हो सकता है. क्योंकि मैं इस BREXIT की बात नहीं कर रही. इंडोनेशिया के जावा टापू में एक टोल गेट है जो ब्रेब्स शहर को दो हिस्सों में काटता है. इसको कहते हैं ब्रेब्स एक्जीट. लेकिन वहां के लोगों ने अब उसको बना डाला है ब्रेक्सिट. हुआ ये कि लोग ईद की छुट्टी पर थे. सेलिब्रेट करने के लिए शहर आ रहे थे. जैसे राजीव चौक मेट्रो पर शाम सात बजे भीड़ लगती है न वैसे ही वहां अक्सर छुट्टियों में जाम लग जाता है. लेकिन इस बार तो हद ही हो गई. सड़क पर 21 किलोमीटर लंबा जाम लग गया. सड़क पर बस गाड़ियां ही गाड़ियां और गाड़ियों के अंदर इंसान.

भाई साब, 3 दिनों तक लोग वइसे ही रोड पर लटके रहे. सू-सू-पॉटी, खाना-दाना सब गाड़ी के अंदर ही. हम 2 मिनट का ट्रैफिक झेल नहीं सकते. लाल बत्ती के हरा होने से पहले ही गाड़ी जिब्रा क्रासिंग से आगे खड़ी कर लेते हैं. सोचो वहां लोग पूरे 72 घंटे कैसे रहे होंगे! कुछ सफोकेशन की वजह से बीमार पड़ गए. तो कोई गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया. ऐसे में 12 लोग भगवान को प्यारे हो लिए. एक ही दिन नहीं. सड़क के किनारे गुमटी लगाए हुए लोग कहते हैं कि सारे लोग अलग-अलग दिन मरे हैं. ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन का कहना है कि जावा टापू पर एक बॉटलनेक है. जिसे भी लोगों ने जाम कर रखा है. अब हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं है. और हम भी कुछ नहीं कर सकते. बॉटलनेक का मतलब एक छोटा सा पैसेज जिससे धीरे-धीरे कर के ही निकला जा सकता है.
उन्होंने ये भी कहा कि हर साल छुट्टियों में ऐसा सीन बन ही जाता है. छुट्टी के टाइम इंडोनेशिया में 400 बाइकर्स की मौत हो चुकी है.
क्या है इस जाम का राज?
जावा टापू इंडोनेशिया में है. इसकी जनसंख्या लगभग डेढ़ करोड़ है. ज्यादा संख्या मुस्लिमों की है. आप कह सकते हैं कि इस टापू ने इंडोनेशिया की आधी से भी ज्यादा आबादी को अपने यहां कूल्हे टिकाने की जगह दे रखी है. पता है, जावा इस धरती का सबसे ज्यादा आबादी वाला टापू है. लगभग सवा लाख स्कवायर किलोमीटर में फैला है. हिसाब-किताब बिठाओ तो पापुलेशन डेंसिटी के मामले में जावा बिहार जैसा है. इतिहास के पन्नों में इंडोनेशिया के बारे में जो कुछ भी पढ़ने को मिलता है उसमें से ज्यादा घटनाएं जावा में हुई हैं. एक समय में जावा हिंदू-बुद्धिस्ट साम्राज्य का सेंटर रहा है. इसके बाद यहां मुस्लिम बादशाहों का भी बोल-बाला रहा. 1930 के दशक में इंडोनेशिया अपनी आजादी के लिए भिड़ा हुआ था. इसकी सारी प्लानिंग के लिए जावा उनका सेंटर था.

मलेशिया और सिंगापुर. इन्हीं दोनों ने इंडोनेशिया में ऐसी-तैसी कर रखी है. वहां लगने वाले जाम का कारण भी यही दोनों हैं. हॉलीडे स्पॉट होने के चलते लोग छुट्टियों में मुंह उठा के उधर को ही कटते हैं. हमलोगों के लिए तो बहुत दूर है. पर जो लोग इसके बॉर्डर के पास रहते हैं उनके लिए तो जाना-आना रोज की बात है. पिछले दिनों जो जाम लगा उसकी बड़ी वजह थी सेक्योरिटी चेकिंग. दरअसल वुडलैंड्स और जोहोर बाहरू दो चेकपॉइंट्स हैं. एक तो मलेशिया-सिंगापुर जाने के लिए और दूसरा उधर के लोगों को इधर आने के लिए. मौका था ईद का तो सेक्योरिटी और बढ़ा दी गई थी. एक-एक लोगों की बढ़िया से तलाशी ले रहे थे पुलिस वाले. अब सवा लाख लोगों की तलाशी कोई घंटे भर का तो काम है नहीं. टाइम तो लगता है. और फिर गाड़ियों की भी तो चेकिंग होती है. किसी की बाइक तो किसी की कार. इसी में जाम लग गया. आम दिनों में दो-तीन घंटे लग जाते हैं चेकिंग में.