'खतरों के खिलाड़ी' जैसे टीवी शो देख-देखकर ताली पीटने वालों के लिए एक जब्बार चीज लाए हैं अपन. अमां कहां से चिंटू-मिंटू टाइप्स चीजें देखा करते हो. असली खतरों के खिलाड़ियों से मिलना है तो टीवी पर नहीं, गांवों-गलियों में जाना पड़ता है. अब देखो गुजरात की इस बच्ची को. हाथ में सांप लेकर गरबा कर रही है. चेहरे के एक्सप्रेशन देख लो तो लगता है कि सांप नानी ने गिफ्ट में दिया था.
इस बच्ची को देखो, 'खतरों के खिलाड़ी' भूल जाओगे
बच्ची के चेहरे के एक्सप्रेशन देख लो तो लगता है कि सांप नानी ने गिफ्ट में दिया था.

ये तस्वीर है गुजरात के राजकोट की. वहां खोडियार नगर नाम की एक जगह है, जहां मुरलीधर नाम का एक ग्रुप है बच्चों का. यही बच्चे इस खास गरबे का आयोजन करते हैं, जिसमें जिंदा सांपों के साथ डांस मल्लब गरबा किया जाता है.
यहां छोटी-छोटी बच्चियां मां खोडल के गेटअप में मंच पर आती हैं और हाथ में सांप लेकर दो-तीन घंटे तक गरबा करती रहती हैं. बच्चियों की ऐसी हिम्मत देखकर गरबा देखने वाले हजारों लोग 'ऊहहह' करने लगते हैं. हालांकि ये सांप बिना जहर के होते हैं.
वैसे आपको ये पता है कि ये गरबा आया कहां से? गरबे की शुरुआत गुजरात से हुई थी. ये वहीं का लोकनृत्य है. और ये जो नाम है, ये 'गर्भ' यानी कोख और 'दीप' यानी मिट्टी के दीये से मिलकर बना है. अपने यहां ऐसे ही होता है न. सैकड़ों सालों तक शब्दों को इतना घिस दिया जाता है कि फिर नया शब्द बन जाता है. तो पहले क्या होता था कि एक छेद वाले घड़े में दीप लेकर देवी के पास जाया जाता था. इसे 'घट दीपगर्भ' कहते थे. बाद में यही गरबा बन गया.
वैसे नाम के साथ-साथ गरबा डांस भी बहुत बदल गया है. हालांकि, अब भी इसमें लोकनृत्य वाली फीलिंग बची हुई है. गुजरात में अब इसी तरह के घड़ों को रखकर उनके आस-पास डांस किया जाता है. वैसे अब तो फैशन में भी आ गया है. तो अब ये सिर्फ नवरात्रों तक ही नहीं, बल्कि शादी और दूसरे उत्सवों पर भी किया जाता है.










