
आलोक नाथ और विंता नंदा
दरअसल, अजय देवगन की फिल्म आ रही है- 'दे दे प्यार दे'. 17 मई को रिलीज होनी प्रस्तावित है. जैसे ही इसका ट्रेलर आउट हुआ. लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए क्योंकि ट्रेलर में अजय के साथ आलोक नाथ भी अभिनय करते नजर आए. लोगों को आपत्ति हुई कि मीटू में बहुत गंभीर आरोप लगने के बाद आलोक नाथ को अजय ने कैसे अपनी फिल्म में ले लिया? अब इस मामले में खुद तनुश्री दत्ता भी बोली हैं. बुधवार, 17 अप्रैल को उन्होंने एक ओपन लेटर जारी किया.
इसमें तनुश्री ने अजय देवगन के ही उस पुराने ट्वीट को साक्ष्य की तरह पेश किया जिसमें पिछले साल अक्टूबर में मीटू मूवमेंट के दौरान अजय ने कहा था कि वे ऐसे किसी आदमी के साथ नहीं खड़े होंगे जिसने किसी महिला के साथ कुछ गलत किया है. ये रहा वो ट्वीट -
"जो कुछ हो रहा है मैं उससे परेशान हूं. मेरी कंपनी और मैं मानते हैं कि महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए. अगर किसी ने एक भी महिला के साथ गलत किया है तो मैं और एडीएफ (अजय देवगन फिल्म्स) उसके साथ नहीं खड़े होंगे."
अपने ओपन लेटर में तनुश्री लिखती हैं ः
"फिल्म इंडस्ट्री झूठे, दिखावा करने वालों और पाखंडियों से भरी हुई है. अजय देवगन ने #metoo मूवमेंट में दौरान ट्वीट करके ये कसम खाई थी कि वो metoo में जिस किसी का भी नाम आएगा उसके साथ काम नहीं करेंगे. मगर अब वो रेप और उत्पीड़न के आरोपी के साथ आराम से काम रहे हैं. उसका बॉलीवुड में कमबैक करवा रहे हैं. क्या ये एक बार फिर ये प्रूव नहीं करता कि बड़े बॉलीवुड हीरोज़ असल में ज़ीरोज़ हैं?तनुश्री दत्ता ने आगे लिखा,
क्या फिल्म से एडिट करके आलोक नाथ को बाहर निकालना, उनका पार्ट किसी और को कास्ट कर रीशूट करवाना इतना मुश्किल था? क्योंकि ट्रेलर और पोस्टर्स के आने से पहले तो किसी को पता भी नहीं था कि फिल्म में आलोक नाथ हैं. अगर अजय देवगन और फिल्ममेकर्स चाहते तो उन्हें रिप्लेस कर उनके पोर्शन को रीशूट करवा सकते थे ( जो बॉलीवुड के कैरेक्टर एक्टर के लिए 10-15 दिन का काम होता ) और विंता नंदा और उनके जैसी महिलाओं जिनका आलोक नाथ ने उत्पीड़न किया, उन्हें सम्मान दे सकते थे. लेकिन नहीं, उन्हें तो रेप के आरोपी को अपनी फिल्म में रखना था. इन्होंने सिर्फ विंता ही नहीं हम सबको बॉलीवुड के रेपिस्ट, मोलेस्टर और हैरस करने वालों के साथ एकजुटता दिखानी थी.
भारत में हमेशा से कानून का इस्तेमाल सेक्शुअल क्राइम की पीड़ित महिलाओं के खिलाफ ही किया जाता है. यही वजह है कि अपराधी हमेशा जमानत पर रिहा हो जाते हैं. बेचारी महिलाओं को ही हमेशा साबित करना पड़ता है कि उनके साथ ज्यादती हुई. यही वजह है कि ऐसे मामलों में अदालत से न्याय मिलना अभी भी एक मुश्किल सपना सा लगता है. बहुत कम केसों में न्याय हुआ भी तो भी कई-कई सालों बाद. लेकिन अब हमें पता चल चुका है कि बॉलीवुड से जुड़े हुए बड़े-बड़े लोग भी ऐसे घटिया लोगों का सपोर्ट करते हैं. इतना ही नहीं जब आप उन पर सवाल उठाते हैं तो वो ऊल-जलूल जवाब देते हैं. खराबी सवालों में नहीं है न ही इस मुद्दे में है खराबी आपकी अपनी सोच में है. आप पर लानत है!
तनुश्री 14 साल पहले बॉलीवुड में आई थी. फिल्म 'आशिक बनाया आपने' (2005)उनकी डेब्यू फिल्म थी.
मैं उम्मीद और प्रार्थना करती हूं कि एक दिन बॉलीवुड ऐसे लोगों से आज़ाद होगा जिन्हें लाखों लोगों का प्यार मिलता है लेकिन फिर भी वो सामाजिक रूप से इतने गैर-जिम्मेदार हैं. हमें असल हीरो और हीरोइन की ज़रूरत है. असल पुरुषों और महिलाओं की ज़रूरत है जो दबे-कुचले लोगों के सम्मान के लिए खड़े हो सकें. दया, सद्भाव और साहस से दुनिया में एग्ज़ाम्पल सेट कर सकें. अपनी पावर और पोज़िशन से लोगों की हेल्प करें ना कि #metoo जैसे मूवमेंट को हल्का करें. बहरहाल, तब तक हमारे पास इन फेक हीरो -हीरोइनों के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं है."मामले को बढ़ते देख अजय देवगन ने अपना पक्ष विस्तार से रखा है. गुरुवार शाम उन्होंने ये जवाब दिया-
ये फिल्म (दे दे प्यार दे) अक्टूबर 2018 में रिलीज़ होनी थी. फिल्म की शूटिंग सितंबर 2018 में खत्म हो गई थी. आलोकनाथ ने पिछले साल अगस्त में मनाली में शूटिंग की थी. 10 एक्टर्स के साथ, अलग-अलग सेट्स और आउटडोर लोकेशन पर करीब 40 दिन में शूटिंग पूरी हुई थी. जब आलोकनाथ पर आरोप लगा था तब तक फिल्म के ऐक्टर्स अपनी दूसरी फिल्मों के लिए काम करना शुरू कर चुके थे. ऐसे में आलोकनाथ को रिप्लेस करके दोबारा शूट करना लगभग नामुमकिन था. इससे प्रड्यूसर्स को पैसे का बहुत नुकसान भी होता. मैं अकेला एक्टर्स के कॉम्बिनेशन को 40 दिन के शूट के लिए वापस नहीं ला सकता था. वैसे भी ये मेरा अकेले का फैसला नहीं हो सकता था. इसमें पूरे यूनिट का इन्वॉल्व होना ज़रूरी था.अजय देवगन का ये जवाब जानकर कुछ बातें दिमाग में आती हैं-
मैं बार बार दोहराउंगा कि MeToo मूवमेंट को लेकर बहुत सेंसेटिव हूं. लेकिन जब हालात मेरे हाथ से बाहर हैं, तो मुझे समझ नहीं आ रहा कि मुझ अकेले को असंवेदनशील क्यों कहा जा रहा है. जबकी ऐसा नहीं है.
उनकी सफाई को पचा पाना मुश्किल है.
पहली बात ये कि वो जितने बड़े सुपरस्टार हैं, उसमें डायरेक्टर या प्रोड्यूसर चीजें उनके हिसाब से तय करते हैं. सब जानते हैं कि उनकी लीग के सुपरस्टार्स फिल्म में दूसरे कलाकारों की कास्टिंग, रिलीज और एडिट हर चीज में दखल देते हैं. ऐसे में अजय 'दे दे प्यार दे' जैसी छोटे स्केल की फिल्म में बेबस होने की बात करते हैं तो वो पचती नहीं.
दूसरी बात, जब वो अक्टूबर 2018 में ट्वीट कर रहे थे कि कभी किसी यौन उत्पीड़क आदमी के साथ काम नहीं करूंगा, तब तक तो वो आलोक के साथ काम कर चुके थे. उन्होंने तब क्यों नहीं बताया सबको कि जिस आलोकनाथ पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हैं उनके साथ मैंने भी एक फिल्म की है और मैं फिल्म में उनकी मौजूदगी को सपोर्ट नहीं करूंगा. लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. बल्कि उनकी पीआर टीम ने ट्वीट ऐसे फ्रेम किया कि उनकी इमेज को कोई ठेस न पहुंचे. उन्होंने जो बोला वो कुछ था और जो किया वो कुछ और था.
तीसरा, ये लॉजिक काम नहीं करता कि शूटिंग पूरी होने के बाद एक्टर चेंज नहीं कर सकते. कर सकते हैं. इसका उदाहरण भी है. 2017 में रिलीज हुई एक प्रमुख हॉलीवुड फिल्म 'ऑल द मनी इन द वर्ल्ड' में ऐसा किया गया था. इसमें नामी एक्टर केविन स्पेसी (हाउस ऑफ कार्ड्स) ने एक प्रमुख रोल किया था. वे अपने हिस्से का शूट पूरा कर चुके थे. फिल्म का ट्रेलर तक आ चुका था. लेकिन तभी स्पेसी पर सेक्शुअल असॉल्ट का आरोप लग गया. इसके बाद इस फिल्म के मेकर्स ने बोला कि केविन को बतौर कलाकार लिए ये फिल्म रिलीज़ नहीं कर सकते. उन्होंने केविन की जगह क्रिस्टोफर प्लमर को कास्ट किया और केविन वाले सब सीन फिर से शूट किए. उसके बाद फिल्म को रिलीज़ किया गया. इस पूरे प्रोसेस में मेकर्स के करीब 70 करोड़ रुपए (10 मिलियन डॉलर्स) का अतिरिक्त खर्चा आया था.

'ऑल द मनी इन द वर्ल्ड' से केविन स्पेसी और क्रिस्टोफर पल्मर के लुक्स. ऊपर वाली तस्वीर में - केविन हैं और नीचे पल्मर.
मॉरल ऑफ़ द स्टोरी ये, कि अजय की कोई दलील इस मामले में संतोषजनक नहीं है. आगे क्या होता है देखते हैं.
Video: फिल्म स्टार्स और हर समझदार माता पिता इस बात पर अजय देवगन की तारीफ करेंगे















