तालिबान वाले भारत में एक कोर्स करने वाले हैं. रजिस्टर कर लिया है. कोर्स आज, 14 मार्च से शुरू हो रहा है.
तालिबान के लोग इंडिया में कोर्स कर रहे हैं, पूरी कहानी जानकर आप चक्कर में पड़ेंगे!
तालिबान की बात हो रही है, तालिबान की!

भारत तालिबान को मान्यता नहीं देता. हालांकि, बहुत सारे देशों की तरह ही जून 2022 में भारत ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी में अपनी एम्बेसी दोबारा शुरू करवा दी थी.
तालिबान के क़ब्ज़े से पहले, लगभग दो दशकों तक भारत ने अफ़ग़ानों के लिए कई ट्रेनिंग प्रोजेक्ट्स चलाए हैं. लेकिन क़ब्ज़े के बाद सारा कार्यक्रम रुक गया. बीते साल एम्बेसी दोबारा शुरू करने के बाद से ही तालिबान ने कई बार दिल्ली से विनती की है कि विकास कार्यों को फिर से शुरू किया जाए.
तालिबान के कोर्स में दाख़िले लेने से उन छात्रों को आपत्ति है, जिनका वीज़ा तालिबान के क़ब्ज़े के बाद कैंसिल कर दिया गया था. दरअसल, 2021 की गर्मियों में जो अफ़ग़ानी छात्र अपने घर गए थे, भारत सरकार ने तालिबान क़ब्ज़े के बाद उन 3,000 छात्रों का वीज़ा कैंसिल कर दिया था. इस वजह से वो बीच कोर्स में ही लटक गए.
मैसूर विश्वविद्यालय से Ph. D कर रहे ओनिब दादागर ने कहा,
"तालिबान के लोगों के लिए पाठ्यक्रमों के बारे में सुनकर मैं स्तब्ध हूं. भारत ने अफ़ग़ान छात्रों को छोड़ दिया है. इसमें कई महिला छात्र भी शामिल हैं. वो हमें ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी नहीं करने दे रहे हैं. हममें से बहुत से लोगों को विश्वविद्यालयों से रद्द करने की चिट्ठी मिली हैं. हम में से कुछ भारत में रहने वाले परिवारों से अलग हो गए हैं."
ऑनलाइन कोर्स है. चार दिन चलेगा. रिकॉर्डेड लेक्चर्स होंगे. चौथे दिन, बतौर गेस्ट विदेश मंत्रालय से अफ़सर आएंगे. इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, ये कोर्स विदेश मंत्रालय चला रहा है. IIM कोझिकोड़ के ज़रिए. कोर्स का शीर्षक है: 'इमर्सिंग विद इंडियन थॉट्स. कोर्स है किस बारे में? ITEC वेबसाइट पर लिखा है -
"भारत की ख़ासियत विविधता में एकता में निहित है. इसी वजह से बाहरी लोगों को ये एक जटिल जगह लगती है. ये कार्यक्रम इस जटिलता के अंदर की व्यवस्था और भारत के बिज़नेस माहौल की गहरी समझ देने में मदद करेगा.
जो भी लोग कोर्स में हिस्सा लेंगे, उन्हें भारत के आर्थिक माहौल, नियामक तंत्र, नेतृत्व दृष्टिकोण, सामाजिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सांस्कृतिक विरासत, क़ानूनी परिदृश्य, उपभोक्ता मानसिकता और बिज़नेस के जोख़िमों के बारे में जानेंगे."
कोर्स सभी देशों के लिए खुला है. अफ़ग़ानिस्तान के अलावा, थाईलैंड और मलेशिया के प्रतिनिधियों के भी पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले हैं.
वीडियो: अफ़ग़ानिस्तान में खिंचाई इस फोटो में ऐसा क्या है, जो UN वालों को 'सॉरी' बोलना पड़ा?













