अब तो सब्सिडी का पैसा सीधे खाते में जाने का जमाना है, फिर भी... स्वपन को पहले कभी बैंक खाते का न होना खला नहीं. क्योंकि उन्हें कभी इसकी जरूरत ही नहीं पड़ी. रोजाना 100 रुपये भी नहीं कमा पाते हैं वो. आठ लोगों का परिवार है. मां-बाप, पत्नी, चार बच्चे और एक खुद स्वपन. इतने रुपयों में परिवार पेटभर खाना तो खा नहीं पाता. बचत करके बैंक में पैसा रखना तो दूर की कौड़ी है. जब पैसा ही न हो और न पैसा आने की उम्मीद हो, तो कोई खाता क्यों खोले. वैसे अब कई सरकारी योजनाएं हैं, जहां सब्सिडी का पैसा सीधे बैंक खाते में आता है. जैसे गैस की सब्सिडी. गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों को मिलने वाली सरकारी मदद. स्वपन भी BPL कैटगरी में आते हैं. फिर भी न उनका आधार कार्ड बना है और न ही बैंक खाता खुला है. सरकारी योजनाओं का फायदा उनतक नहीं पहुंच रहा है.

सुदीप रॉय बर्मन. ये त्रिपुरा के हेल्थ ऐंड साइंस ऐंड टेक्नॉलजी मंत्री हैं. इन्होंने स्वपन और सोमति को अपने घर नाश्ते पर बुलाया. उन्होंने स्वपन का जिक्र त्रिपुरा विधानसभा में उठाया. मुख्यमंत्री बिप्लव देव से गुजारिश की कि वो स्वपन और सोमति को इनाम दें (फोटो: ANI)
स्वपन कौन हैं? क्या खास काम किया उन्होंने? तारीख थी, 15 जून. 2018. जगह, त्रिपुरा. यहां धनछेरा नाम की जगह है. बारिश की वजह से रेलवे पटरी के नीचे की मिट्टी बह गई. ये जगह मुनगियाकामी और अंबासा रेलवे स्टेशनों के बीच आती है. उस दिन मूसलाधार बारिश हो रही थी. शाम होने को चली थी. 45 साल के स्वपन देववर्मा रेलवे पटरी से होकर गुजर रहे थे. साथ में थी उनकी नौ साल की बेटी सोमति. बाप और बेटी, साथ मिलकर आस-पास के पेड़ों पर अपने काम की चीजें खोज रहे थे. कि कहीं बांस की कोंपल दिख जाए. पेड़ की छाल या जड़ मिल जाए. या फिर मछलियां मिल जाएं. ताकि उन्हें बाजार में बेचकर कुछ पैसा कमाया जा सके. इन दोनों ने पटरियां देखीं. स्वपन को पता था. कि अगर कोई ट्रेन वहां से होकर गुजरी, तो हादसा हो जाएगा.
पूरे दिन की मेहनत के बाद बमुश्किल 100 रुपये कमाने वाले उस इंसान के लिए एक-एक मिनट कीमती था. बावजूद इसके वो वहीं पटरी के पास रुके रहे. उन्हें उम्मीद थी कि पटरी का मुआयना करने वाला कोई रेलवे कर्मचारी वहां आ पहुंचेगा. मगर ऐसा नहीं हुआ. इससे पहले कि वो कुछ कर पाते, दूर से आती एक ट्रेन की सीटी सुनाई दी. धर्मनगर-अगरतला पैसेंजर ट्रेन उधर की ही तरफ दौड़ी चली आ रही थी. बाप और बेटी ने फैसला किया. स्वपन के कंधे पर एक तौलिया था. वो तौलिया हवा में ऊपर हिलाते हुए वो ट्रेन की तरफ दौड़े. साथ में सोमति भी थी. ट्रेन के ड्राइवर ने उन्हें दौड़ते देखा. उसे खतरे का अंदेशा हुआ. उसने ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी. और इस तरह स्वपन और सोमति ने ट्रेन में बैठे करीब 2,000 लोगों की जान बचाई.

स्वपन त्रिपुरी समुदाय से आते हैं और मुंगियाकमी के पास में रहते हैं. स्वपन ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी हुई कि उन्होंने अच्छा काम किया. कि उन्होंने एक दुर्घटना को टालने में मदद की (फोटो: The Lallantop)
स्वपन और सोमति कि खूब वाहवाही हो रही है पहले सरकारी बात. राज्य सरकार ने स्वपन और सोमति, दोनों का एहसान माना है. उनकी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया. शुक्रिया के तौर पर राज्य सरकार ने इन दोनों का नाम वीरता पुरस्कार के लिए भेजा है. नेता उन्हें मिलने बुला रहे हैं. उनके घर मिलने आ रहे हैं. त्रिपुरा के स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीक मंत्री सुदीप रॉय बर्मन ने स्वपन और सोमति को अपने घर नाश्ते पर बुलाया. त्रिपुरा विधानसभा में क्या सत्ता पक्ष और क्या विपक्ष, दोनों ओर के लोगों ने स्वपन और सुमति की तारीफ की. स्वपन और सुमति को विधानसभा बुलाया गया. यहां उन्हें वीआईपी गैलरी में बिठाकर असेंबली की कार्रवाई दिखाई गई. त्रिपुरा में कई संस्थाएं भी इनके सम्मान में आगे आई हैं. उन्हें सम्मानित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. स्वपन और सोमति की सुपरहीरो वाली इमेज बन गई है. कई लोग उनके घर पर उनसे मिलने आ रहे हैं. और इन सबके बीच स्वपन को बैंक खाता खुलवाने की चिंता है.
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