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आर्मी ने बचाई हिजबुल सरगना के बेटे की जान

पंपोर अटैक में आर्मी ने जिन 100 लोगों को बचाया, उनमें हिजबुल मुजाहिदीन के आका सलाहुदीन का बेटा भी शामिल था.

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फोटो - thelallantop
आर्मी के लिए मन में थोड़ी रिसपेक्ट और बढ़ा दीजिए. जम्मू कश्मीर के पंपोर में हुए आतंकी हमले में आर्मी ने काबिल-ए-तारीफ काम किया है. आतंकी हमले के वक्त आर्मी ने वहां फंसे करीब 100 लोगों को बचाया था. इन 100 लोगों में एक बंदा ऐसा भी था, जिसका इंडिया के दुश्मन आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के आका सैयद सलाहुद्दीन से खून का रिश्ता है.
उस रोज आर्मी ने सैयद सलाहुदीन के 31 साल के बेटे सैयद मुईद को भी बचाया था. ये सच उन लोगों के गाल पर स्नेह से भरा तमाचा है, जो ये कहते हैं इंडियन आर्मी घाटी में कश्मीरियों के साथ दुश्मनों जैसा सलूक करती है.
20 फरवरी को पंपोर के EDI कॉम्प्लेक्स में हुए आतंकी हमले में हमारे पांच जवान शहीद हुए थे. तीन आतंकी भी आर्मी ने मार गिराए थे. आतंकियों ने EDI कॉम्प्लेक्स पर जब अटैक किया तो वहां सैयद मुईद भी था. अब जिन लोगों का गुस्सा आ रहा है, वो जान लें. मुईद का आतंक से कोई लेना देना नहीं है. बंदा पेशे से आईटी ग्रेजुएट है. EDI में मैनेजर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी है. मुईद के साथ उसके डिपार्टमेंट के कई और लोग भी वहां फंसे हुए थे. सैयद सलाहुदीन के टोटल 3 बेटे हैं. पुलिस के मुताबिक, मुईद का किसी आतंकी संगठन से कोई कनेक्शन नहीं है. आतंकी हमले के बाद मुईद ने NDTV से कहा, 'मैं भी बाकी लोगों की तरह इस स्टेट का आजाद सिटीजन हूं, इम्पलॉई हूं. पंपोर हमले के बाद मेरा नाम मेरे अब्बा के साथ क्यों जोड़ा जा रहा है?' पंपोर अटैक को पुलिस बीते 6 साल में घाटी में हुआ बड़ा आतंकी हमला मानती है. शुरुआती जांच में ये पता चला है कि पंपोर अटैक की साजिश हाफिज सईद वाले लश्कर-ए-तैयबा ने रची थी. याद रहे सेना और आतंकियों के बीच ये ऑपरेशन करीब 48 घंटे से ज्यादा चला था. HAFIZ SAEED-SYED SALAHAUDIIN बता दें सैयद सलाहुदीन के तीन बेटे हैं. तीनों का अब्बा के आतंकी कारखाने से कोई लेना देना नहीं है. मुईद के दो भाइयों में एक डॉक्टर और दूसरा मेडिकल असिस्टेंट है. लेकिन बाप ठहरा आतंकी नंबर-एक. 70 साल का सैयद सलाहुदीन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रहता है. इंडिया पर आतंकी हमले करता रहता है. हिजबुल मुजाहिदीन के अलावा यूनाइटेड जिहाद काउंसिल भी चलाता है. एक एक्स स्पाई चीफ हुए एएस दौलत. उनने एक किताब लिखी थी. उसमें उन्होंने दावा किया कि एक बार सलाहुदीन ने श्रीनगर के इंटेलिजेंस ब्यूरो के दफ्तर फोन कर बेटे का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कराने के लिए कहा था. हालांकि हिजबुल मुजाहिदीन ने इस बात को खारिज कर दिया था.

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