10 फरवरी को किडनैप की गई थी दीप्ति.
स्नैपडील एंप्लॉई दीप्ति सरना की किडनैपिंग का केस क्या था? एकतरफा प्यार की सनक और दिल जीतने का फर्जी हथकंडा, जो आखिर में क्राइम के तौर पर सामने आया. कहानी डिटेल में इस तरह है. लड़के का नाम है 'लिल्लू'. असली नाम देवेंदर. उम्र 29 साल. लेकिन जब 15 साल का था तभी ट्रेन में लड़की से बद्तमीजी कर दी. फिर क्राइम उसके लिए रोज की बात हो गई. 'डर' फिल्म में उसने शाहरुख खान का विलेन अवतार देखा तो उसका फैन हो गया. पता नहीं कहां से हिटलर का नाम सुना और जेल में रहने के दौरान उसकी ऑटोबायोग्राफी का हिंदी ट्रांसलेशन पढ़ डाला. मंगोल शासक चंगेज़ खान का भी फैन हो गया और उसकी भी ऑटोबायोग्राफी पढ़ डाली. थाने में उसके नाम के आगे 32 केस दर्ज हैं. जिनमें से तीन मर्डर की वारदात में शामिल होने के हैं. हरियाणा में वह 3 लाख रुपये का इनामी क्रिमिनल था.
तो ऐसे लिल्लू को प्यार हो गया. शादीशुदा होने के बाद भी. जनवरी 2015 में वो लड़की पहली बार उसे राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर दिखी. वह खुराफाती तो था ही. लड़की के पीछे लग गया और उसके बारे में जरूरी जानकारियां जुटा लीं. नाम था, दीप्ति सरना. गाजियाबाद के कविनगर में रहती थी.
पूरे एक साल तक वह उसके पीछे लगा रहा. एकतरफा प्यार ने उसे सनकी बना दिया. उसका दावा है कि एक साल में उसने 150-200 बार दीप्ति का पीछा किया होगा. उसने पता लगा लिया कि वह कहां-कहां जाती है और उसके दोस्त कौन-कौन हैं. उसके घर, ऑफिस और वापसी के रास्ते का पूरा पता लगा लिया. लेकिन इसकी जरा सी भनक दीप्ति को नहीं लगने दी. दीप्ति और लिल्लू के रहन-सहन, क्लास, तौर-तरीकों में फर्क था. तो दीप्ति को सीधे अप्रोच करने के बजाय उसने उसका दिल जीतने का खतरनाक प्लान बनाया. दिसंबर में उसने 2 ऑटो खरीदे और उन्हें वैशाली मेट्रो स्टेशन से गाजियाबाद के रूट पर लगा दिया. एक ऑटो उसने अपने दोस्त प्रदीप को दे दिया और एक खुद चलाने लगा. दीप्ति रोज इसी रास्ते से घर जाती थी. उसका दावा है कि घटना से पहले भी दीप्ति दो बार उसके ऑटो में बैठ चुकी थी. लेकिन फिर 10 फरवरी आई. शाम 7.42 पर दीप्ति वैशाली मेट्रो स्टेशन से निकली. दीप्ति ने जो ऑटो लिया, उसमें पहले से दो महिलाएं बैठी थीं. लिल्लू ने अपना ऑटो इसके पीछे लगा दिया. इस ऑटो को प्रदीप चला रहा था और फहीम और माजिद भी साथ थे.
साहिबाबाद ट्रैफिक सिग्नल पर दीप्ति के ऑटो के टायर में कील चुभोने की कोशिश की गई. लेकिन टायर की हवा नहीं निकली.हालांकि मोहन नगर फ्लाईओवर पर दीप्ति का ऑटो जवाब दे गया. सारी सवारियां उतर गईं. प्रदीप तो पीछे लगा ही था. उसने इन सवारियों को अपने ऑटो में बैठा लिया.
दीप्ति और एक लड़की पीछे की सीट पर बैठ गई. ऑटो राजनगर एक्सटेंशन की ओर बढ़ चला. लेकिन थोड़ी ही देर में दूसरी लड़की को उतार दिया गया और दीप्ति को कब्जे में लेकर उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी गई. ऑटो मोरती गांव की ओर बढ़ गया.
रात 8.30 बजे वे मोरती गांव पहुंचे. दीप्ति को एक बिल्डिंग में ले जाया गया, जहां लिल्लू था. लिल्लू ने अपना नाम राजीव बताया और भरोसा दिया कि तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा. उसने कहा, 'तुम्हें किसी से मिलाना है.' मोबाइल रिकॉर्ड के मुताबिक वह रात 9.26 तक यहां रही. लेकिन फिर वे ऑटो से बागपत चले गए.
बाद में उसे सोनीपत लाया गया. लिल्लू ने उसे एक कहानी सुनाई. उससे कहा कि तुम्हारे एक दोस्त ने तुम्हें किडनैप करवाया है और मैंने तुम्हें बचाया है. उसने दीप्ति को बहुत अच्छे से ट्रीट किया. उसे खाने को दिया और फिर कुछ पैसे देकर घर भेज दिया. पुलिस का कहना है कि यह सब प्लान का हिस्सा था. जिसका मकसद था, दीप्ति का दिल जीतना. वह दीप्ति की नजरों में हीरो बनना चाहता था. वह इतना प्रोफेशनल था कि इस बारे में उसने किडनैपिंग को अंजाम देने वाले अपने साथियों को भी नहीं बताया था. उसने उन चारों से कहा था कि दीप्ति हवाला के कारोबार से जुड़ी है और उसे किडनैप करके हम सबको एक-एक करोड़ रुपये मिल सकते हैं.
वह दीप्ति का दिल जीतकर उससे शादी करके नेपाल शिफ्ट होना चाहता था. लेकिन प्रेम का यह सनकी खलनायक पुलिस की गिरफ्त में है. मुंह पर काला कपड़ा बंधा है. कहता है, 'मुझ पर इतने सारे केस हैं. तो एक केस प्यार का क्यों नहीं?'