सिद्धू मूसेवाला मर्डर (Sidhu Moose Wala Murder) मामले में एक नया अपडेट सामने आ रहा है. आजतक के रिपोर्टर तनसीम हैदर के मुताबिक सिद्धू मूसेवाला को मारने की साजिश दिल्ली के तिहाड़ जेल से रची गई है. खबर के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) ने वर्चुअल नंबरो से विदेश में मौजूद गोल्डी बराड़ से कई बार बातचीत की.
तिहाड़ जेल में रची गई सिद्धू मूसेवाला के मर्डर की साजिश! वर्चुअल सिम से गैंग करते थे बात
लॉरेंस बिश्नोई ने वर्चुअल नंबरों के जरिए विदेश में गोल्डी बराड़ से की बातचीत!


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस हत्या की जिम्मेदारी गोल्डी बराड़ गैंग ने ली है. गोल्डी बराड़ कनाडा में बैठकर अपना एक गैंग चलाता है और लॉरेंस बिश्नोई की गैंग के साथ मिलकर काम करता है.
क्या है वर्चुअल नंबर ?वर्चुअल नंबर डायरेक्ट इनवर्ड डायलिंग (DID) या VOIP या एक्सेस नंबर के नाम से भी जाना जाता है. ये एक टेलीफोन नंबर होता है जो किसी भी पूर्व-निर्धारित टेलीफोन नंबर पर आने वाली कॉल को आगे बढ़ाता है. कुछ चुनिंदा सर्विस प्रोवाइडर ही वर्चुअल नंबर मुहैया करवाते हैं.
वर्चुअल नंबर वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल ( वीओआईपी ) के माध्यम से कॉल स्वीकार करते हैं. मूल रूप से, यह वही तकनीक है जिसका उपयोग iMessage, WhatsApp, या Google Voice जैसी तमाम सर्विस के माध्यम से कॉल और टेक्स्ट संदेश करने के लिए किया जाता है.
कैसे होता है इस्तेमाल?वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल करने के लिए अलग से कोई हार्डवेयर नहीं खरीदना पड़ता है. इसे फोन में मौजूद सॉफ्टवेयर के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है. वर्चुअल नंबर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए किसी भी जानकारी को डाटा पैकेज के रूप मे ट्रान्स्फर करता है. खास बात है कि इसका इस्तेमाल पूरी दुनिया में कहीं भी बातचीत के लिए किया जा सकता हैं. कोई भी यूजर किसी भी देश से किसी भी देश में कॉल कर सकता है.
कैसे रची गई साजिश?ऐसा माना जा रहा है कि लॉरेंस बिश्नोई जेल के अंदर बैठकर इसी वर्चुअल नंबर से इंटरनेट कॉलिंग कर रहा था. वर्चुअल सिम कार्ड मोबाइल में नहीं लगाया जाता है. इसमें सिस्टम के जरिए एक डाटा फिट कर दिया जाता है जिससे किसी को भी कॉल किया और रिसीव किया जा सकता है. गौरतलब है कि इन माफियाओं तक जेल में मोबाइल फोन आसानी से पहुंच जाते हैं और वर्चुअल नंबर के जरिए अब ये विदेशों में बात करने लगे हैं.
खबरें आ रही हैं कि पंजाब पुलिस इस मामले में तिहाड़ जेल में आकर लॉरेंस बिश्नोई से पूछताछ करेगी.
पहला मामला नहीं!रिपोर्ट के मुताबिक ये पहला मामला नहीं है जब तिहाड़ जेल में वर्चुअल कॉलिंग और मोबाइल फोन इस्तेमाल किए जा रहे हों. सुकेश चंद्रशेखर के मामले में ऐसा देखने को मिला है.
जेल में सुकेश चंद्रशेखर दो मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था. इनमें से एक मोबाइल हाई एंड आई फोन 11 और दूसरा आईफोन 12 था. सुकेश वर्चुअल नंबरों और कॉल स्पूफिंग के जरिए बाकी लोगों के संपर्क में था. यही वजह थी कि करोड़ों का ठगी का कारोबार जेल की चारदीवारी से आसानी से चलता रहा.
चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया था कि सुकेश टेलीग्राम और हशेड नाम की मोबाइल एप्प का इस्तेमाल भी किया करता था. गौरतलब है कि जेल में ऐशो आराम और काला कारोबार चलाने के लिए जेल अधिकारियों को 20 करोड़ से ज्यादा की रिश्वत दी गई.
देखें वीडियो- सिद्धू मूसेवाला की हत्या के पीछे कौन, ये है लॉरेंस बिश्नोई की कहानी





















