ईरान से जंग के बीच प्रेसिडेंट ट्रंप ने कई बार ये दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत खत्म हो चुकी है. अब अमेरिका के रक्षा विभाग 'पेंटागन' ही राष्ट्रपति के दावों से उलट बात कर रही है. पेंटागन का कहना है कि तमाम हमलों के बावजूद ईरान की मिलिट्री पावर बरकरार है.
पेंटागन की रिपोर्ट में खुलासा- 'ईरान की सैन्य ताकत बरकरार', ट्रंप के नुकसान के दावों पर उठे सवाल
Pentagon Report On Iran: पेंटागन की हालिया रिपोर्ट अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दावों पर सवाल उठा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार हमले के बावजूद ईरान अपने सैन्य साजो-सामान को सुरक्षित लोकेशन पर भेज देता है. तेहरान की सैन्य ताकत बरकरार है.


अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ के दावों के मुताबिक उन्होंने ईरान की क्षमता को खत्म कर दिया है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है. NBC News की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंटेलिजेंस अधिकारियों को ऐसे इनपुट मिले हैं कि ईरान, हमलों के दौरान अपने सैन्य साजो-सामान को सुरक्षित लोकेशन पर भेज देता था. वो अपने लॉन्चर्स की जगह बदलता रहा. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा मंत्री हेग्सेथ का दावा है कि ईरान को ऐसा नुकसान पहुंचा है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती.
Pentagon Report में ईरान को लेकर बड़ा दावाअमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए. अमेरिका का मुख्य टारगेट ईरान की लीडरशिप रही. इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर तक मारे गए. पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट से पता चलता है कि इन घातक हमलों के बावजूद, ईरान की मिलिट्री अभी भी मिडिल-ईस्ट की सबसे ताकतवर सेनाओं में से एक है.
ऐसा भी नहीं है कि ईरान को कोई नुकसान नहीं हुआ. लेकिन उतना भी नहीं हुआ जितना बढ़ा-चढ़ाकर ट्रंप ने बताया है. उन्होंने ईरान के कई अहम ठिकानों पर हमला किया. कई नेताओं को मारा. लेकिन ईरान की छुपी ताकत जमीन के नीचे बसी उसकी अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी है. अमेरिका या इजरायल अब तक वहां नहीं पहुंच पाए हैं.
Donald Trump ने किया सीजफायर बढ़ाने का ऐलानइधर बदलते घटनाक्रमों के बीच ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ सीजफायर आगे बढ़ाया जाएगा. इसके लिए उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ की रिक्वेस्ट का हवाला दिया है. लेकिन सीजफायर के साथ दूसरी तरफ उन्होंने ईरानी बंदरगाहों को ब्लॉक भी कर रखा है. ट्रंप ने कहा है कि ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक अमेरिका को कोई एक यूनिफाइड प्रस्ताव नहीं मिलता. ट्रुथ पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि सीजफायर को आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ के अनुरोध पर बढ़ाया जा रहा है.

दूसरी तरफ इस घोषणा के बाद ईरान से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है. ईरान की संसद में स्पीकर के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने इस कदम को खारिज कर दिया. उन्होंने एक्स पर लिखा,
ट्रंप के संघर्ष-विराम की अवधि बढ़ाए जाने का कोई मतलब नहीं है. हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता. घेराबंदी जारी रखना बमबारी करने से किसी भी तरह अलग नहीं है. इसका जवाब सैन्य कार्रवाई से ही दिया जाना चाहिए. इस बीच, ट्रंप के संघर्ष-विराम की अवधि बढ़ाए जाने का निश्चित रूप से यही अर्थ है कि वे किसी अचानक हमले के लिए समय जुटा रहे हैं. अब ईरान के लिए पहल करने का समय आ गया है.
मोहम्मदी ने कहा कि संघर्ष विराम का विस्तार बेमानी है और चेतावनी दी कि नाकेबंदी बनाए रखना लगातार आक्रामकता के बराबर है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह कदम किसी अचानक हमले के लिए समय निकालने की कोशिश हो सकती है.
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