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'मैं बॉस सिस्टम में काम नहीं करता, सिद्धारमैया मेरे कलीग हैं', शपथ से पहले शिवकुमार की दो टूक

सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री घोषित किए गए हैं.

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डीके शिवकुमार को प्रदेश का डिप्टी सीएम बनाया जा रहा है, सिद्धा होंगे सीएम. चुनाव के दौरान दोनों नेता. (फोटो: आजतक)

कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को प्रदेश का डिप्टी सीएम बनाया जा रहा है. जबकि सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री होंगे. शपथ ग्रहण समारोह 20 मई को बेंगलुरु में होगा. लेकिन उससे पहले डीके शिवकुमार का एक बयान चर्चा में है. इसमें उन्होंने कहा है, “सिद्धारमैया मेरे बॉस नहीं होंगे, मैं बॉस सिस्टम में काम नहीं करता हूं.” 

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दरअसल, मोजो स्टोरी से बात करते हुए डीके शिवकुमार कहा,

'मैंने 1985 में पहली बार चुनाव लड़ा, 8 बार लगातार MLA रहा. मेरा अपना अनुभव है. मैंने एचडी कुमारस्वामी के साथ काम किया. एसएम कृष्णा जी के अंडर में काम किया. एस बंगरप्पा जी के जी के अंडर में काम किया. एस बंगरप्पा मेरे पॉलिटिकल मेंटर भी रहे हैं. वो दोनों मेरे लीडर थे. बाकी सब मेरे कलीग हैं. सिद्धारमैया और एचडी कुमारस्वामी मेरे कलीग हैं.'

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ये देखना अब दिलचस्प होगा कि डीके शिवकुमार के इस बयान और सियासी रवैये का कर्नाटक की अगली सरकार, वहां की राजनीति और सिद्धारमैया से उनके संबंधों पर क्या असर पड़ेगा.

आपको बता दें कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री को लेकर लगातार चार दिन मंथन के बाद कांग्रेस हाईकमान ने गुरुवार, 18 मई को  को फैसला लिया. कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए ये जानकारी दी. इसमें उन्होंने बताया कि सिद्धारमैया ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री होंगे. जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार डिप्टी सीएम होंगे. वेणुगोपाल के मुताबिक राज्य में केवल एक ही डिप्टी सीएम होगा. 

इसके अलावा डीके शिवकुमार को एक और बड़ी ताकत दी गई है. वो 2024 तक कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहेंगे. यानी डीके शिवकुमार के पास अगले लोकसभा चुनाव तक पार्टी को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी.

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कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था. हालांकि, समय समय पर प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया सीएम पद के लिए अपनी अपनी दावेदारी ज़रूर पेश करते रहे थे. राज्य विधानसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने सीएम बनने के लिए कोशिशें तेज कर दी थीं. बताया जा रहा है कि डीके शिवकुमार सीएम के पद से कम कुछ भी लेने को तैयार नहीं थे, लेकिन सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद वो मान गए. जिसके बाद जाकर ही चार दिन से चल रहा कर्नाटक का पूरा सियासी संकट सुलझ पाया.

वीडियो: कर्नाटक में मुख्यमंत्री है लेकिन सरकार नहीं है

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