The Lallantop

UGC और AICTE 'खत्म' हो जाएंगे? 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान' बिल जान लें

UGC और AICTE की जगह अब लेगा VBSA! मोदी सरकार के 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान' बिल से क्या आपकी डिग्री और स्कॉलरशिप पर असर पड़ेगा? क्या विदेशी यूनिवर्सिटीज अब भारत आएंगी? पढ़िए इस बड़े बदलाव का पूरा तियां पांचा.

Advertisement
post-main-image
एक देश, एक रेगुलेटर: मोदी सरकार का 'VBSA' बिल

क्या अब UGC और AICTE जैसे नाम इतिहास की किताबों में सिमट जाएंगे? क्या भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा 'ऑपरेशन' होने जा रहा है? अगर आप एक छात्र हैं, प्रोफेसर हैं या शिक्षा जगत से जुड़े हैं, तो आपने UGC (University Grants Commission), AICTE (All India Council for Technical Education) और NCTE (National Council for Teacher Education) के नाम तो रट रखे होंगे. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

लेकिन मोदी सरकार ने इन सबको एक ही छत के नीचे लाने की तैयारी कर ली है. इसके लिए संसद में पेश किया गया है- 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान' (VBSA) विधेयक, 2025.

इस बिल के आने से क्या बदलेगा, आपकी डिग्री का क्या होगा और विपक्ष इस पर क्यों भड़का हुआ है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.

Advertisement
क्या है VBSA बिल और क्यों पड़ रही इसकी जरूरत?

अब तक हमारे देश में 'खिचड़ी' वाला सिस्टम चल रहा था. जनरल पढ़ाई (BA, BSc) के लिए UGC के पास जाओ, इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट के लिए AICTE के चक्कर काटो और अगर टीचर बनना है तो NCTE के नियम मानो. कई बार इनके नियमों में टकराव होता था, जिससे कॉलेज और छात्र दोनों परेशान रहते थे.

VBSA (Viksit Bharat Shiksha Adhishthan) का मतलब है एक ऐसी 'सुपर बॉडी' जो इन तीनों को रिप्लेस कर देगी. इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लाया गया है. सरकार का कहना है कि अब "एक देश, एक रेगुलेटर" का समय आ गया है ताकि सिस्टम पारदर्शी और तेज हो सके.

नए 'अधिष्ठान' का ढांचा: तीन खंभे और एक छत

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बिल के बारे में बताते हुए कहा था कि VBSA कोई छोटा-मोटा ऑफिस नहीं होगा, बल्कि इसके अंदर तीन अलग-अलग 'परिषद' (Councils) काम करेंगी. जिनमें शामिल हैं,

Advertisement
  • विकसित भारत शिक्षा विनियम परिषद (Regulatory Council): इसका काम होगा नियम बनाना और ये देखना कि कॉलेज ठीक से चल रहे हैं या नहीं.
  • विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद (Accreditation Council): यह देखेगी कि कॉलेज की क्वालिटी कैसी है. अब तक यह काम NAAC जैसी संस्थाएं करती थीं.
  • विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद (Standards Council): यह तय करेगी कि पढ़ाई का लेवल क्या होगा, सिलेबस में क्या होना चाहिए और एकेडमिक स्टैंडर्ड क्या होंगे.

मतलब काम बांट दिए गए हैं, लेकिन बॉस एक ही होगा- VBSA.

पैसे का हिसाब-किताब और छात्रवृत्ति (Scholarship) का नया रास्ता

पुरानी व्यवस्था में UGC के पास दो बड़ी ताकतें थीं- नियम बनाना और यूनिवर्सिटीज को 'ग्रांट' यानी पैसा बांटना. नए बिल में सरकार ने इन दोनों ताकतों को अलग कर दिया है.

VBSA नियम तो बनाएगा, लेकिन पैसा नहीं बांटेगा. फंडिंग का काम अब सीधे शिक्षा मंत्रालय या उसके द्वारा तय किए गए किसी नए मैकेनिज्म (Higher Education Grants Council) के हाथ में होगा. 

समाचार पत्र ‘द हिंदू’ के मुताबिक जहां तक Scholarship (छात्रवृत्ति) और Fellowship (जैसे JRF/SRF) का सवाल है, तो अब इनके लिए एक सिंगल विंडो सिस्टम बनाने की तैयारी है. यानी अब पैसे के लिए छात्रों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि सीधे पोर्टल के जरिए फंड सीधे छात्र के बैंक खाते (DBT) में पहुंचेगा.

विदेशी यूनिवर्सिटीज के लिए खुलेगा 'लाल कालीन'

VBSA बिल का एक बड़ा लक्ष्य भारत को 'ग्लोबल एजुकेशन हब' बनाना है. अब तक विदेशी यूनिवर्सिटीज के लिए भारत में कैंपस खोलना 'टेढ़ी खीर' था क्योंकि उन्हें दर्जनों रेगुलेटर्स से परमिशन लेनी पड़ती थी.

अब VBSA एक सिंगल विंडो क्लीयरेंस की तरह काम करेगा. शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक इसके तहत दुनिया की टॉप-500 यूनिवर्सिटीज को भारत में कैंपस खोलने के लिए आसान नियम दिए जाएंगे.

इससे भारतीय छात्रों को अपने ही देश में 'ऑक्सफोर्ड' या 'स्टैनफोर्ड' जैसी पढ़ाई का मौका मिल सकता है, वो भी कम खर्च में.

क्या IIT और IIM भी इसके नीचे आ जाएंगे?

अब तक IIT, IIM और NIT जैसे संस्थानों को बहुत ज्यादा स्वायत्तता (Autonomy) मिली हुई थी. वे न तो UGC की सुनते थे और न AICTE की. लेकिन खबर है कि पहली बार इन 'प्रीमियर' संस्थानों को भी एक कॉमन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत लाने की कोशिश हो रही है. 

हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि उनकी रिसर्च और पढ़ाई की आजादी बरकरार रहेगी, लेकिन कुछ बुनियादी मानकों के लिए उन्हें भी VBSA के साथ तालमेल बिठाना होगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मेडिकल और कानूनी (Law) शिक्षा को अभी भी इस बिल से बाहर रखा गया है. यानी डॉक्टर और वकील बनने की पढ़ाई पहले की तरह ही चलती रहेगी.

सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान

अगर कोई कॉलेज फर्जी पाया गया या नियमों की धज्जियां उड़ाईं, तो अब खैर नहीं. VBSA बिल में भारी जुर्माने की बात कही गई है. नियम तोड़ने पर 10 लाख रुपये से लेकर करोड़ों तक का जुर्माना लग सकता है.

कुछ रिपोर्टस के मुताबिक इस बिल के तहत बार-बार गलती करने पर कॉलेज को बंद करने या उसकी डिग्री देने की ताकत छीनने का भी प्रावधान है. बिना मान्यता (Accreditation) के चल रहे संस्थानों पर भी कड़ी नजर रहेगी.

विपक्ष और राज्यों को क्या 'टेंशन' है?

जहां सरकार इसे 'रिफॉर्म' बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'अत्यधिक केंद्रीकरण' (Excessive Centralisation) कह रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस बिल का विरोध करने वालों की अपनी अलग चिंताएं हैं. जिनमें से दो काफी अहम हैं,

  • राज्यों की चिंता: शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है. राज्यों को डर है कि दिल्ली में बैठा एक बोर्ड तय करेगा कि उनके राज्य की यूनिवर्सिटी कैसे चले, तो उनकी ताकत कम हो जाएगी.
  • स्वायत्तता का मुद्दा: आलोचकों का कहना है कि अगर सरकार सीधे फंडिंग कंट्रोल करेगी, तो यूनिवर्सिटीज की आजादी खत्म हो जाएगी और वे सरकार के इशारों पर नाचने को मजबूर होंगी.

फिलहाल, इन विवादों को देखते हुए बिल को JPC (Joint Parliamentary Committee) के पास भेज दिया गया है, जो इस पर विस्तार से चर्चा कर रही है.

ये भी पढ़ें: 'इलेक्टोरल बॉन्ड' तो गया, लेकिन चंदे का धंधा अब नए लिफाफे में लौट आया है!

छात्रों पर क्या असर पड़ेगा? (The Bottom Line)

सीधी बात ये है कि अगर आप स्टूडेंट हैं, तो आपकी पुरानी डिग्री की वैल्यू कम नहीं होगी. बल्कि उम्मीद ये है कि कुछ पॉजिटिव चेंज आएंगे. जैसे कि,

  • डिग्री और सिलेबस में एकरूपता (Uniformity) आएगी.
  • क्रेडिट ट्रांसफर आसान होगा (अगर आप एक कॉलेज से दूसरे में जाना चाहें).
  • फर्जी यूनिवर्सिटीज पर लगाम लगेगी, जिससे आपकी मेहनत की कमाई और समय बचेगा.
  • स्कॉलरशिप प्रक्रिया डिजिटल और तेज होगी.

VBSA बिल भारतीय शिक्षा जगत का 'जीएसटी' जैसा बदलाव है. कागज पर ये बहुत शानदार लगता है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे लागू कैसे किया जाता है. क्या ये सच में शिक्षा को 'विकसित' बनाएगा या सिर्फ एक नया सरकारी दफ्तर बनकर रह जाएगा? ये तो वक्त ही बताएगा.

वीडियो: UGC इक्विटी नियमों पर DU में टकराव, छात्र संगठनों और यूट्यूबर के बीच झड़प

Advertisement