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'रिस्क लो...', स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे भारतीय से बात हुई, सारा हाल पता चला

US Iran War: Strait of Hormuz के पास फंसे शिप में कई इंडियन्स भी हैं. लल्लटॉप ने ऐसे ही एक इंडियन से बात की. उन्होंने बताया कि "हमारे शिप को तो ये मैसेज है कि कोई रिस्क नहीं लेना है. लेकिन कई दूसरे शिप्स हैं, जिन पर प्रेशर बनाया जा रहा है कि होर्मुज़ क्रॉस करने का रिस्क लो."

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ऐसा नहीं है कि होर्मुज़ क्रॉस करने के इंतज़ार में खड़े शिप्स ही दिक्कत का सामना कर रहे हैं. पूरा सी-ट्रैफिक ठप हो रहा है. इसलिए होर्मुज़ क्रॉस कर चुके शिप्स भी फंसे पड़े हैं. (सांकेतिक फोटोज़- Reuters, Merchant Navy Decoded)

ईरान-अमेरिका इज़रायल जंग (Iran US Israel War) की वजह से होर्मुज़ की खाड़ी (Strait of Hormuz) बंद है. और इस वजह से कई शिप इसके पास फंसे हुए हैं. जलमार्ग मंत्रालय (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) ने 12 मार्च को कुछ ज़रूरी जानकारियां दीं. बताया-

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“भारत के झंडे वाले 28 शिप समंदर में हैं. 24 होर्मुज़ के पश्चिम और 4 पूर्व में. कुल 778 भारतीय नाविक इन पर मौजूद हैं. इन्हें मॉनिटर किया जा रहा है. विदेशी झंडे वाले जहाज़ों पर भी 78 भारतीय क्रू थे. इनमें 70 सुरक्षित हैं. 4 घायल, एक लापता और 3 की मौत हो गई है.”

होर्मुज़ के पास फंसे ऐसे ही एक शिप पर मौजूद इंडियन मर्चेंट नेवीपर्सन से लल्लनटॉप ने बात की. उनकी पहचान हम गुप्त रखेंगे. उन्होंने सबसे बड़ी बात ये बताई कि तमाम कंपनियां अपने शिप्स पर प्रेशर बना रही हैं कि सिग्नल ऑफ करके होर्मुज़ क्रॉस करने की कोशिश करो. ये भी बताया कि किस तरह जहाज़ पूरा अंधेरा करके, बहुत बड़ा जोखिम उठाकर होर्मुज़ क्रॉस करने का ट्राई कर रहे हैं.

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हमने सबसे पहले उनसे पूछा कि कब इंडिया से निकले थे, शिप का क्या रूट रहा और अभी कहां हैं. जवाब मिला,

“मैं मर्चेंट नेवी में काम करता हूं. 5 साल से जॉब कर रहा हूं और तब से इस एक ही कंपनी के साथ जुड़ा हूं. हम लोग सितंबर में इंडिया से निकले थे. अर्जेंटीना होते हुए फरवरी के आख़िरी हफ़्ते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ क्रॉस किया. ईरान के कोस्ट गार्ड्स की तरफ से हमसे कुछ बेसिक से ही सवाल किए गए, जो हर शिप से किए जाते हैं. जैसे कि- कहां से आ रहे हो, आपका फ्लैग क्या है. फ्लैग क्या है माने आपका शिप कौन से देश में रजिस्टर्ड है. फिर हमें अलाऊ कर दिया गया और 28 फरवरी को हम सऊदी अरब पहुंच गए. अब 29 को छिड़ गई वॉर. कुछ दिन में होर्मुज़ बंद हो गया.”

आगे हमने पूछा कि होर्मुज़ बंद होने से शिप्स कैसे प्रभावित हुए हैं. पता चला कि कुछ शिप्स हैं, जो होर्मुज़ क्रॉस करने के इंतज़ार में रुके हैं. कि जब परमिशन मिले या स्थिति सुधरे तो वो क्रॉस करें, आगे बढ़ें.

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कुछ शिप्स हैं, जो होर्मुज़ क्रॉस कर चुके हैं. लेकिन उनमें ड्यूटी कर रहे लोग इस इंतज़ार में हैं कि पीछे आने वाले शिप से उनका रिलीवर आए तो वो शिप से रिलीव हों और देश वापस जाएं. हमने जिनसे बात की, उनकी दिक्कत यही दूसरी कैटेगरी वाली है. उनका रिलीवर होर्मुज़ क्रॉस करने के इंतज़ार में फंसा हुआ है.

अब यहां से दूसरी दिक्कत की बात शुरू होती है. होर्मुज़ के उस पार फंसे शिप्स में भी 2 तरह के शिप्स हैं. इस बारे में उन्होंने बताया,

“कुछ शिप्स वो, जिनकी कंपनी बड़ी है. कंपनी के 700-800 जहाज़ हैं. जैसे कि मेरी कंपनी. अब अगर 2-4-10 जहाज़ फंस भी गए तो कंपनी पैनिक नहीं हो रही. कह रही है कि कोई रिस्क नहीं लेना है. कुछ शिप्स वो, जिनकी कंपनी छोटी है. कंपनी के जहाज़ ही 2-4 जहाज़ ही हैं. अब अगर इनमें से एक भी फंस गया तो कंपनी पैनिक में है. अब इन कंपनियों की तरफ से मैसेज आ रहे हैं- होर्मुज़ क्रॉस करने की कोशिश करिए.”

जो हमारी बात हुई, उसके मुताबिक- कुछ शिप्स ऐसा कर भी रहे हैं. ये शिप्स AIS यानी Automatic identification system को ऑफ करते हैं, शिप पर पूरी तरह घुप अंधेरा करते हैं और रात में होर्मुज़ क्रॉस करने की कोशिश करते हैं. AIS से ही शिप को आगे का नेविगेशन मिलता है और दूसरे देशों को भी किसी शिप की लोकेशन मिलती है. 

marinetraffic नाम की एक वेबसाइट है, जिससे किसी भी शिप की लाइव लोकेशन देख सकते हैं. इस पर जाकर आप देखेंगे तो कई शिप्स की लोकेशन 5 दिन से अपडेट नहीं है. तो एक संभावना हो सकती है कि वो क्रॉस करने की कोशिश कर रहे हों.

हमने ये भी पूछा कि अगर कुछ शिप AIS ऑफ कर रहे हैं तो वो आगे नेविगेट कैसे कर रहे हैं? इस पर जवाब मिला कि ऐसी कंडीशन में चार्ट्स और कंपस का यूज़ करके शिप नेविगेट करते हैं.

इसके अलावा जो बातें पता चलीं, पॉइंट्स में जानते हैं:

  • लोग जिस कंपनी के ज़रिये अपॉइंट हुए हैं, उसके ज़रिये अपने-अपने देश की सरकार से जुड़े रहते हैं. हमने जिनसे बात की, उनकी शिप पर अभी तक ये मैसेज है कि रिस्क नहीं लेना है.
     
  • DG शिपिंग और International Trade Worker Federation का भी मैसेज है कि “अगर आपकी कंपनी कोई रिस्क लेने का प्रेशर दे तो आप साफ इनकार कर दें.”
     
  • आरोप है कि कुछ छोटी कंपनियों के शिप रिस्क लेने का प्रेशर बना रहे हैं. ये भी धमकी दी जा रही है कि अगर बात नहीं मानी तो दोबारा किसी टूर पर नहीं ले जाएंगे यानी नौकरी पर नहीं रखेंगे.
     
  • पूरे पर्शियन गल्फ में तमाम शिप फंसे हैं. जो लोग अपने-अपने देश में हैं और उनको किसी शिप पर जाना है, वो अब आने को तैयार ही नहीं हैं.

(ये भी पढ़ें: ईरान में जंग से रूस की मौज हो गई, ट्रंप ने दी बड़ी छूट, अब पूरी दुनिया से पैसा कमाएगा)

ये भी हाल है कि कुछ शिप्स तो किनारे पर यानी पोर्ट पर आकर रुके हुए हैं. लेकिन कुछ हैं जो अभी पोर्ट पर पहुंचे भी नहीं हैं और एंकरेज से रुके हुए हैं यानी एंकर डालकर रुके हुए हैं. सोचिए ये मेंटली और फिज़िकली कितना ड्रेनिंग होगा!

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