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'शिवसेना के लिए 2000 करोड़ की डील हुई'- सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले संजय राउत का बयान

चुनाव आयोग के फैसले को कल सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे उद्धव ठाकरे.

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शिवसेना (उद्धव गुट) सांसद संजय राउत (फोटो- पीटीआई)

शिवसेना पर दावे की लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. एक तरफ उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले हैं. वहीं दूसरी ओर राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने रविवार, 19 फरवरी की सुबह एक बड़ा दावा कर दिया है. संजय राउत का आरोप है कि शिवसेना का चुनाव चिन्ह और नाम पाने के लिए 2000 करोड़ रुपये की 'डील' हुई है. हालांकि उन्होंने ये साफ नहीं किया कि ये डील किनके बीच हुई है. 17 फरवरी को चुनाव आयोग ने फैसला सुनाया था कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट ही असली शिवसेना है. इससे 'धनुष और बाण' चुनाव चिन्ह भी शिंदे गुट के पाले में चला गया.

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अब संजय राउत ने एक ट्वीट कर सबको चौंका दिया है. राउत ने ट्विटर पर लिखा, 

"मुझे यकीन है...चुनाव चिन्ह और नाम हासिल करने के लिए अब तक 2000 करोड़ के सौदे और लेन-देन हो चुके हैं...यह शुरुआती आंकड़ा है और 100 फीसदी सच है. जल्द ही कई बातों का खुलासा होगा... देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था."

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इससे पहले 18 फरवरी को भी राउत ने एक दावा किया था. उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि उनका जो धनुष-बाण (चुनाव चिन्ह) है, उसकी चोरी हो गई है. राउत के मुताबिक, इस चोरी में बड़े लोग शामिल हैं, हम उसकी जांच करेंगे और उन चोरों के बारे में जनता को जागरूक भी करेंगे. उन्होंने कहा कि हम नया चुनाव चिन्ह लेकर जाएंगे और फिर एक बार यही शिवसेना खड़ी करके दिखाएंगे.

चुनाव आयोग को मिलेगी चुनौती

इधर, उद्धव ठाकरे ने पार्टी पर दोबारा कब्जे के लिए एक और तैयारी कर ली है. ठाकरे 20 फरवरी को चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने वाले हैं. उद्धव गुट आयोग के आदेश पर रोक लगाने की मांग करेगा. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्धव ठाकरे चुनाव आयोग के फैसले में "कानूनी खामियों" को चुनौती देने वाले हैं. उद्धव गुट के अनुसार, आयोग ने आदेश में कहा है कि शिवसेना के संविधान में किया गया संशोधन असंवैधानिक है, जो कि गलत है. उद्धव गुट का दावा है कि इसी संविधान को आयोग ने जुलाई 2022 में एकनाथ शिंदे की मीटिंग को लेकर स्वीकार किया गया था.

उद्धव कैंप का कहना है कि चुनाव आयोग का आदेश विरोधाभासी है. गुट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने चुने गए उम्मीदवारों के वोट प्रतिशत पर फैसला दिया. लेकिन उनका क्या जो चुनाव हार गए, उन्हें भी शिवसेना के नाम पर वोट मिला था. दरअसल, 2019 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना के 55 विधायक बने थे. चुनाव आयोग ने फैसले में कहा है कि इन वोटों में से 76 फीसदी वोट एकनाथ शिंदे गुट को मिले, जबकि उद्धव ठाकरे गुट को 23.5 फीसदी वोट मिले. इनके अलावा भी कई ऐसे तकनीकी पहलू हैं, जिन्हें याचिका का आधार बनाया गया है.

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उधर, एकनाथ शिंदे ग्रुप ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा (Caveat) दाखिल कर दिया है. ताकि कोर्ट कोई फैसला देने से पहले उनके पक्ष को भी सुने.

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