हिंडनबर्ग ने अडानी और SEBI चीफ मधाबी पुरी बुच पर जो आरोप लगाए हैं, उन पर पिछले दो दिनों से चर्चा चल रही है. SEBI की चेयरपर्सन और उनके पति पर लगे आरोपों की वजह से बाज़ार खुलते ही अडानी की शेयर टूटने लगे. इस बीच SEBI की साख पर भी सवाल उठे. संस्था भी अपनी चीफ के बचाव में उतरी. एक नज़र डालते हैं SEBI पर. क्या काम करती है, कितने अधिकार हैं SEBI के पास.
जब ED और CBI हैं तो SEBI काम क्या करता है?
SEBI की चेयरमैन Madhabi Puri Buch और उनके पति पर लगे आरोपों की वजह से बाज़ार खुलते ही Adani की कंपनियों के शेयर टूटने लगे. इस बीच SEBI की साख पर भी सवाल उठे.


भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की स्थापना 12 अप्रैल 1992 को SEBI अधिनियम, 1992 के तहत हुई. इसकी स्थापना सिक्योरिटी मार्केट में रेगुलेटरी अथॉरिटी के रूप में की गई. यानी इसे भारतीय निवेश बाजार में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था.
सेबी की स्थापना से पहले, बाजार को कई सरकारी संस्थाओं द्वारा विनियमित किया जाता था लेकिन तब असंगतियों और अनियमितताओं पर अंकुश लगाना मुश्किल था. साल 2014 में सरकार ने सेबी की क्षमताएं बढ़ाई. सेबी को हेरा-फेरी और इनसाइडर ट्रेडिंग व अन्य मामलों में जांच करने और दंड देने का अधिकार दिया गया.
इस संस्था में टॉप लेवल पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स होते हैं. हायरारकी में सबसे ऊपर आते हैं चेयरमैन. जिसे भारत सरकार नियुक्त करती है. मधाबी पुरी बुच को सरकार ने 2022 में चेयरमैन के पद पर नियुक्त किया था. चेयरमैन के बाद वित्त मंत्रालय से जुड़े अधिकारी बोर्ड का हिस्सा होते हैं. एक मेंबर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से आता है. इसके अलावा अन्य पांच मेंबर केंद्र सरकार नियुक्त करती है. बुच चेयरमैन बनने से पहले पांच साल तक SEBI की पूर्ण कालिक सदस्य रह चुकी थीं.
SEBI काम क्या करता है?मोटामाटी समझें तो SEBI को बनाया ही इसलिए गया है ताकि बाज़ार में पैसा लगाने वाले निवेशक ठगे ना जाएं. सेबी एक तरह से पोर्टफोलियो प्रबंधकों, बैंकर, स्टॉकब्रोकर, निवेश सलाहकारों, मर्चेंट बैंकर, रजिस्ट्रार, शेयर ट्रांस्फर करने वाले एजेंट्स और लोगों के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है.
सेबी के कामों को अगर चार बिंदुओं में समझें तो-
- सेबी से निवेशकों के हितों का ध्यान रखने, बाजार को बढ़ावा देने और सेबी अधिनियम, 1992 के तहत काम करने की अपेक्षा की जाती है.
- सेबी के पास नियम बनाने, उन्हें लागू करने और सेबी अधिनियम, प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956, डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996, कंपनी अधिनियम, 2013 और अन्य के तहत विवादों का निपटारा करने का अधिकार है.
- सेबी भारत में प्रतिभूति बाजार के विकास और उसे रेगुलेट करने के लिए काम करता है. निवेशकों की वित्तीय समझ बढ़ाने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है. और निवेशकों की शिकायतों को दूर कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है.
- सेबी इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटी कमीशन के हिस्से के रूप में ग्लोबल सिक्योरिटी स्टैंडर्ड पर भी काम करता है.
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