कोई भी आंख मूंदकर बता सकता है कि उसके सामने खड़ा मुंह में पान मसाला दरबरा रहा शख्स देशद्रोही है या देशभक्त. आपको कुछ करना नहीं है. उसकी दाढ़ी या चोटी नहीं देखनी है. राष्ट्रगान पर खड़ा नहीं कराना है. भारत माता की जय नहीं बुलवाना है. जस्ट सिंपल क्वेस्चन पूछना है कि इन फिल्मों में से कौन सी देखने जा रहे हो? उसे 'शिवाय' और 'ऐ दिल है मुश्किल' में से एक ऑप्शन चुनना है. उसने बजर दबाया और हो गया फैसला. सच है न, देशभक्त और देशद्रोही की कपड़छान कर अलग करना इससे आसान कभी नहीं था. एकदम नीर क्षीर वाला खेला है, आपको हंस हो जाना है. लॉटरी सिस्टम जितना आसान है.अगर वो इनमें से कोई भी फिल्म देखने नहीं जा रहा. टोरेंट सेवी है या KRK का भतीजा है कि देखनी कोई फिल्म नहीं लेकिन रिव्यू सबका करना है, तब भी निराश होने की जरूरत नहीं. उससे तारीफ करानी है एक फिल्म की. ऑप्शन उपरोक्त रहेंगे. इसी बेस पर फैसला हो जाएगा. वो फवाद खान वाले खाने पर टिक करे या विमल.. सॉरी अजय देवगन वाले पर, फैसला तो हो ही जाना है. इन फिल्मों का वर्गीकरण बड़े सीधे तरीके से हुआ है. कोई रॉकेट साइंस नहीं है. करण जौहर वाली देशद्रोही फिल्म है. क्योंकि उसमें एक पाक का जना लड़का है कोई. उसके इतने बयान फेसबुक और व्हाट्सऐप पर फैले हैं जितने उसने किसी फिल्म या सीरियल में डायलॉग न बोले होंगे. एक कारण और है. करण जौहर बहुत अल्ल बल्ल बोल गए थे. लेकिन रिलीज के पहले राउंड फिगर में आ गए. जब ठाकरे भैया ने इनके घेघा पर लात रखा तो इनके दिमाग का नवनिर्माण हो गया. वो वीडियो तो देखा होगा जिसमें इनकी घिग्घी बंधी थी और माफी मांग रहे थे. सीएम साहब बिचौलिया बने और पांच करोड़ पर मामला तय हुआ. अगर यही पैसा बिना कान पूंछ हिलाए दे देते ये लोग तो ये फिल्म देशभक्त फिल्म होती.
शिवाय देशभक्त फिल्म है क्योंकि उसकी पहले दिन की कमाई अजय देवगन फौजी परिवारों को देने जा रहे हैं. व्हाट्सऐप सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार. और उन्होंने कभी पाकिस्तानी कलाकारों को न लेने का वादा भी किया है. हमारी दुश्मनी तो पाकिस्तान से है. और चीन से. चीन से निपटना तो दो दिन की बात है. हम दिवाली पर उनकी झालर नहीं जलाएंगे और वहां से आए तमाम सामान को नहीं खरीदेंगे. वो घुटनों पर आ जाएगा. लेकिन पाकिस्तान असली और तगड़ा दुश्मन है. उसको सबक सिखाना बहुत जरूरी है. तो पहले इनके कलाकारों के पेट पर लात मारनी पड़ेगी.एक और बात. सरकार अभी अध्यादेश नहीं लाई है लेकिन मुंहजबानी ये बात मानकर चलो. कि किसी फिल्म का रिव्यू अब एक्टिंग, डायरेक्शन, म्यूजिक, एक्शन, सिनेमेटोग्राफी, स्टोरी जैसी बेकार बातों को ध्यान में रखकर नहीं किया जाएगा. रिव्यू के लिए पहली और आखिरी चीज देशभक्ति मीटर पर फिल्म की रैंकिंग होगी. और सिर्फ देशभक्त फिल्में ही परदों तक पहुंच पाएंगी. इसके बहुत आसान चरण होंगे. एंटी स्मोकिंग कैंपेन वगैरह भूल जाओ. वो सब पुराने जमाने की बाते हैं. आजकल पान मसाला वगैरह से कैंसर कहां होता है यार. अगर ऐसा होता तो अजय भाई विमल का ऐड करते. तो इन सबसे फिल्मों का कोई लेना देना नहीं होगा आगे से. ये पांच जरूरी स्टेप्स फॉलो करने होंगे फिल्म बनाने वालों को. जो कि निम्न लिखित हैं. 1. फिल्म की शुरुआत में, बीच में और आखिरी में मतलब तीन बार राष्ट्रगान बजना चाहिए. बल्कि पूरी फिल्म के दौरान ही बैकग्राउंड में राष्ट्रगान का म्यूजिक बजता रहे तो ज्यादा बेटर रहेगा. सारे लोग खड़े होकर फिल्म देखेंगे. इससे देशभक्ति की भावना मजबूत होगी. 2. कोई भी फिल्म भारत पाकिस्तान के सौहार्द पर नहीं बननी चाहिए. अजरंगी बजरंगी भाईजान जैसी फिल्में बनें तो वहीं सेट पर इनका गला घोंटकर जान ले ली जाए. भारत पाकिस्तान का कान्टेक्स्ट अगर किसी फिल्म में आए तो सिर्फ लड़ाई में. जिसमें यहां का एक हीरों वहां के 20-25 फौजियों को मार रहा हो. सिर्फ हैंडपंप उखाड़ने से काम नहीं चलने वाला अब. 3. फिल्म चाहे धार्मिक हो, मार्मिक हो, लव स्टोरी हो, वॉर हो, पीरियड फिल्म हो, साई फाई हो या कॉमेडी. सबके शुरू में, आखिरी में भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद बोलना अनिवार्य होगा. 4. हर फिल्म बनाने से पहले 5 करोड़ नकद धनराशि सेना के नाम पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के लिए, कुछ परसेंट इनकम टैक्स के लिए, फिर थोड़ा शनि मंदिर सिंगनापुर, शिरड़ी वाले साईं बाबा, एक हिस्सा वैष्णो देवी, एक हिस्सा मस्जिद का चंदा, एक हिस्सा राम मंदिर सॉरी म्यूजियम की ईंटों हेतु, बाकी पैसे फिल्म में काम करने वाले एक्टर्स और क्रू के लिए. इतने सबके बाद अगर कुछ बच जाता है तो उसे भगवान का प्रसाद मानकर फिल्म बनाने वाला रख ले. कुछ न बचे तो लंगोटा मारकर जंगल निकल जाए. क्योंकि फिल्म लाइन में जो कोई आता है वो संघर्ष करने का मन बनाके आता है और संघर्ष ही तो जीवन है दोस्त. 5. देखो मुंबई में अपनी फिल्म इंडस्ट्री है. तो वहां ठाकरे बंधुओं की वसूली में कोई अड़चन पड़ नहीं सकती. वहां की सरकार भी उनकी तरफ से फिल्मकारों से ही पैसे वसूलेगी. लेकिन ऐसा नहीं है कि बॉलीवुड देश के किसी और हिस्से में शिफ्ट करने से 'इन कर्तव्यों' से बच जाओगे. यूपी में आओगे तो बांभनो को खिलाए बिना प्रीमियर नहीं होगा. बिहार में जाओगे तो पूरी टीम किडनैप न हो ये सुनिश्चित करने के लिए शहाबुद्दीन वगैरह को देना पड़ेगा. दिल्ली में सर्दी बहुत पड़ती है. इन सबसे बच गए तो बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद वगैरह की दुकाने तो पूरे देश में चंदा वसूलती हैं. कहां जाओगे बचके भाया. तो ऐसा करो थोड़ा बजट बढ़ा लो. चार सौ करोड़ में अपना मार्स मिशन कंप्लीट हुआ है. तो इसरो से करार करो और पूरी टीम को लेकर मंगल ग्रह निकल जाओ. अब टेंशन छोड़ो सब मंगल होगा. मुझे थैंक्यू कहने की कोई जरूरत नहीं है. बस इत्ता ध्यान रखना कि सेट पर चाइनीज लाइट वगैरह मत इस्तेमाल करना. नहीं तो हजारों करोड़ की लागत से बनी फिल्म सेंसर बोर्ड ने देशभक्तों की धमकी पर रोक ली तब तो तुम्हारे पास सल्फास खाने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा.
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