''मैं समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं.''
सपा का नया ड्रामा रिलीज़, 'मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं'
साइकिल आखिर किसकी? 17 जनवरी तक पता चल जाए वरना...
Advertisement

फोटो - thelallantop
Advertisement
एक प्रेस कांफ्रेंस में ये कहा है पार्टी और परिवार में अलग-थलग दिख रहे मुलायम सिंह यादव ने. उन्होंने ये भी कहा कि रामगोपाल का 2 जनवरी को बुलाया गया अधिवेशन फर्जी था. साथ ही ये भी बताया कि शिवपाल यादव प्रदेश अध्यक्ष हैं. उनके साथ अमर सिंह भी नज़र आए.
यानी ये आज का ड्रामा था. बाकी इस ड्रामे में और क्या ट्विस्ट आए, वो भी पढ़ लो. एकता कपूर को अपने सीरियल के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही होगी, क्योंकि आधी टीआरपी तो समाजवादियों की बयानबाज़ी ही खा ले रही है. याद दिला दिया जाए कि इससे पहले रामगोपाल ने एक अधिवेशन बुलाया था. खूब भीड़ थी. कहा गया कि अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. और मुलायम सिंह पार्टी के महज़ मार्गदर्शक. यानी उन्हें मेन टेबल से उठा कर साइड पर रख दिया गया. सपा का फैमिली ड्रामा अब भी किसी नतीजे की तरफ बढ़ता नहीं दिख रहा है. और तीखा हो चला है. लगता नहीं कि मुलायम की आज की बात का कोई ख़ास फर्क पड़ने वाला है. बाप पर बेटा भारी पड़ गया है. पॉलिटिक्स संख्या और समर्थन का खेल है और दोनों ही इस समय अखिलेश के पास हैं. अखिलेश के चच्चा शिवपाल बोले, ''हम नेता जी के साथ हैं. नेता जी मुलायम सिंह यादव का जो आदेश होगा उसे हम मानेंगे.'' उन्होंने ये नहीं बताया कि मुलायम सिंह यादव अभी आदेश देने की स्थिति में हैं भी या नहीं. बेटा तक तो कोई आदेश मान नहीं रहा.
पार्टी के 'शाश्वत बाहरी 'अमर सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि परिवार की एकता के लिए मैं किसी भी बलिदान के लिए तैयार हूं. मैंने इस्तीफ़ा देने की भी पेशकश की. शिवपाल भी चुनाव से हटने को तैयार हैं. पूरे झगड़े का ठीकरा बेवजह हम पर फोड़ा गया है. अमर सिंह फ़ालतू में शेरो-शायरी के मूड में आजकल रहते हैं. बोले, ''क्या ज़िद है? किस बात की अकड़ है? इस घर को आग लग गई घर के चिराग से.'' मतलब सीधे-सीधे अखिलेश के बारे में बात कर रहे थे. आगे कहा, ''हम मिलकर रहना चाहते हैं.''
हालिया घटनाओं की वजह से केंद्र सरकार की तरफ से Z सिक्योरिटी से लैस होने वाले अमर सिंह ने एक और शेर दागा. कहा-
यानी ये आज का ड्रामा था. बाकी इस ड्रामे में और क्या ट्विस्ट आए, वो भी पढ़ लो. एकता कपूर को अपने सीरियल के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ रही होगी, क्योंकि आधी टीआरपी तो समाजवादियों की बयानबाज़ी ही खा ले रही है. याद दिला दिया जाए कि इससे पहले रामगोपाल ने एक अधिवेशन बुलाया था. खूब भीड़ थी. कहा गया कि अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. और मुलायम सिंह पार्टी के महज़ मार्गदर्शक. यानी उन्हें मेन टेबल से उठा कर साइड पर रख दिया गया. सपा का फैमिली ड्रामा अब भी किसी नतीजे की तरफ बढ़ता नहीं दिख रहा है. और तीखा हो चला है. लगता नहीं कि मुलायम की आज की बात का कोई ख़ास फर्क पड़ने वाला है. बाप पर बेटा भारी पड़ गया है. पॉलिटिक्स संख्या और समर्थन का खेल है और दोनों ही इस समय अखिलेश के पास हैं. अखिलेश के चच्चा शिवपाल बोले, ''हम नेता जी के साथ हैं. नेता जी मुलायम सिंह यादव का जो आदेश होगा उसे हम मानेंगे.'' उन्होंने ये नहीं बताया कि मुलायम सिंह यादव अभी आदेश देने की स्थिति में हैं भी या नहीं. बेटा तक तो कोई आदेश मान नहीं रहा.
पार्टी के 'शाश्वत बाहरी 'अमर सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि परिवार की एकता के लिए मैं किसी भी बलिदान के लिए तैयार हूं. मैंने इस्तीफ़ा देने की भी पेशकश की. शिवपाल भी चुनाव से हटने को तैयार हैं. पूरे झगड़े का ठीकरा बेवजह हम पर फोड़ा गया है. अमर सिंह फ़ालतू में शेरो-शायरी के मूड में आजकल रहते हैं. बोले, ''क्या ज़िद है? किस बात की अकड़ है? इस घर को आग लग गई घर के चिराग से.'' मतलब सीधे-सीधे अखिलेश के बारे में बात कर रहे थे. आगे कहा, ''हम मिलकर रहना चाहते हैं.''
हालिया घटनाओं की वजह से केंद्र सरकार की तरफ से Z सिक्योरिटी से लैस होने वाले अमर सिंह ने एक और शेर दागा. कहा-
तेरा मेरा शीशे का घर, मैं भी सोचूं तू भी सोच.
फिर क्यों तेरे हाथ में पत्थर, मैं भी सोचूं तू भी सोच.
Advertisement
साइकिल है किसकी?
पार्टी पर किस गुट का हक़ है और साइकिल किसकी है? इस पर भी कुछ क्लियर नहीं हैं. अखिलेश यादव के इस समय ख़ासम ख़ास चल रहे रामगोपाल यादव ने शनिवार को चुनाव आयोग में एक हलफनामा दायर किया. दावा किया कि ये पार्टी अखिलेश की है. डेढ़ लाख पेजों के इस हलफनामे में अखिलेश के समर्थन में 200 विधायकों के सिग्नेचर हैं. हलफनामे में 68 में 56 एमएलसी और 24 में 15 सांसदों के सिग्नेचर, पार्टी के 4,600 लोगों के भी सिग्नेचर हैं. रामगोपाल यादव ने कहा नब्बे फीसदी समर्थन अखिलेश के साथ है. अखिलेश उत्तर प्रदेश में अपने आप चेहरा हैं. हम चुनाव में जाएंगे फिर चाहे हमें साइकिल चुनाव निशान मिले या नहीं. रामगोपाल ने ये भी बताया कि ये कागज नेता जी को भी भेजे जाएंगे. रामगोपाल ने फसाद की जड़ में अमर सिंह का नाम लिया. उनका कहना है कि अमर सिंह और एक दो परिवार के लोगों ने नेता जी को बहकाया है. ये भी जोड़ा कि मुलायम सिंह के पास महज़ इतने ही लोग ही बचे हैं कि वो सारे लोग एक बोलेरो में जा सकते हैं.अगर साइकिल पर कोई फैसला न हुआ तो?
अभी तक असमंजस बना हुआ है कि आखिर साइकिल चुनाव निशान अखिलेश के गुट में जाएगा या मुलायम के. खबर ये भी आ रही है कि अगर 17 जनवरी तक चुनाव आयोग इस पर फैसला नहीं ले पाया तो ये चुनाव निशान 'फ्रीज' कर दिया जाएगा. फिर ये चुनाव निशान किसी को नहीं मिलेगा. इससे पहले अगर ये दोनों पक्ष अपने मतभेद सुलटा लें तो चुनाव आयोग किसी नतीजे पर पहुंच सकता है. इससे पहले 2011 में उत्तराखंड क्रांति दल के केस में भी ऐसा हुआ था. दो धड़े हो गए थे, जो चुनाव निशान कुर्सी पर अपना दावा कर रहे थे. तब चुनाव आयोग ने एक धड़े को 'कप-प्लेट' और एक धड़े को 'पतंग' चुनाव निशान दे दिया था.ये स्टोरी निशांत ने की है.
Advertisement











