उसके बाद सचिन के छोटे और उद्दंडी वर्ज़न यानी सहवाग ने उन्हें ट्वीट किया. कहने लगे, ओ भगवान जी, टीम को तो खूब शाबाशी देते हो, कभी-कभी कमेंट्री करने वालों पर भी नज़र डाल लिया करो.
इस पर सचिन का जो जवाब आया, उसे समझाने के लिए क्यूट शब्द का इस्तेमाल करना पड़ेगा. वो क्यूट ही था. साथ ही था उसमें बाल्टियों भर का प्यार. सचिन ने सहवाग को लाला कहके पुकारा. वही सहवाग, जिन्हें मुल्तान में उन्होंने छक्का मारने को मना किया था और सहवाग ने उनके कहे पर कोई ध्यान नहीं दिया और अगले ही ओवर में मुश्ताक़ को छक्का मारा. उसी छक्के से उनके 300 रन पूरे हुए थे. उसी उद्दंडी, बात न मानने वाले, धाकड़ सहवाग को सचिन का लाला कहकर बुलाना ज़ेहन में सैकड़ों-हज़ारों क्रिकेट से जुड़ी यादों को ताज़ा कर गया. और एक बार, बस एक बार सचिन और सहवाग को इंडिया की नीली जर्सी पहन कर बॉलर्स को जहां-तहां मारते हुए देखने का मन करने लगा.
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