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ये कौन सी व्हेल है जिसके 'रूसी जासूस' होने का शक जताया जाता है?

4 साल पहले नॉर्वे में दिखी थी. अब स्वीडन में नजर आई है.

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रूसी नेवी की 'स्पाई व्हेल' अब नॉर्वे से स्वीडन पहुंची है? (फोटो सोर्स- AFP और ट्विटर)

बेलुगा. ये सफेद रंग की एक व्हेल होती है. ब्लू व्हेल से काफी छोटी, लेकिन बहुत सक्रिय और होशियार. साल 2019 में इंसानों का बनाया हुआ हार्नेस यानी पट्टा पहने हुए एक बेलुगा व्हेल को नॉर्वे में देखा गया था. खबरें हैं कि इस व्हेल को फिर से स्वीडन के तट पर देखा गया है. अंदेशा जताया जा रहा है कि इस व्हेल को रूसी नौसेना ने जासूसी करने के लिए प्रशिक्षण देकर छोड़ा है.

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अंग्रेजी अखबार द गार्जियन की एक खबर के मुताबिक, इस बेलुगा को सबसे पहले नॉर्वे के सुदूर उत्तरी इलाके फिनमार्क में देखा गया था. करीब तीन साल के वक़्त में इसने नॉर्वे की कोस्टलाइन का आधा रास्ता तय किया था. लेकिन इसके बाद इसने अपनी गति बढ़ाई और बीते कुछ महीनों में नॉर्वे की तटीय सीमा का बाकी बचा आधा हिस्सा भी पार कर गई. और अब ये स्वीडन पहुंच गई है. बीती 28 मई को इसे स्वीडन के दक्षिण-पश्चिमी तट से दूर हनबोस्ट्रैंड (Hunnebostrand) नाम के समुद्री इलाके में देखा गया.

वनव्हेल ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े एक समुद्री जीव विज्ञानी सबैस्टियन स्ट्रैंड अखबार से बात करते हुए कहते हैं,

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"हम नहीं जानते कि वो व्हेल इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है. ये इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि व्हेल अपने कुदरती माहौल से दूर जा रही है."

स्ट्रैंड इस व्हेल के इतने तेजी से आगे बढ़ने की संभावित वजह बताते हुए कहते हैं,

"ये उसके हार्मोन की वजह से हो सकता है. हो सकता है वह अपना कोई पार्टनर तलाशने की कोशिश में हो. और चूंकि बेलुगा बहुत सामाजिक प्रजाति है, इसलिए ये भी हो सकता है कि वो अकेली है और अपनी साथी बेलुगा व्हेलों से मिलना चाहती हो."

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करीब 20 फीट लंबी इस व्हेल की औसत उम्र 50 साल के आस-पास होती है. आमतौर पर ये व्हेलें ग्रीनलैंड, उत्तरी नॉर्वे और रूस के आसपास के बर्फीले पानी में रहती हैं.

स्ट्रैंड के मुताबिक इस व्हेल की उम्र अभी 13 से 14 साल की मानी जा रही है. इस उम्र में बेलुगा व्हेलों में हार्मोन बहुत ज्यादा होते हैं. आम तौर पर नॉर्वे के सबसे उत्तर में आर्कटिक महासागर के स्वालबार्ड द्वीपसमूह के आस-पास बेलुगा व्हेलों की सबसे ज्यादा तादात पाई जाती है. स्वालबार्ड द्वीपसमूह नॉर्वे के उत्तरी तट और पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के बीच का इलाका है. 

इस बेलुगा व्हेल के बारे में ये भी माना जा रहा है कि इसने अप्रैल 2019 में नॉर्वे पहुंचने के बाद किसी दूसरी बेलुगा व्हेल को नहीं देखा है. नॉर्वे के लोगों ने इस व्हेल को ह्वालदिमिर (Hvaldimir) नाम दिया है. नॉर्वे में अंग्रेजी के Whale को Hval कहते हैं. वहीं इसके साथ दिमिर इसके रूस से जुड़े होने के संकेत के तौर पर जोड़ा गया है.

जासूसी का शक क्यों है?

जब इसे पहली बार नॉर्वे के पास आर्कटिक महासागर में देखा गया था तो वहां के मत्स्यपालन विभाग के बायोलॉजिस्ट्स ने व्हेल को पहनाया गया पट्टा हटा दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पट्टे में कैमरा लगाने के लिए एक उभरी हुई सी जगह थी और प्लास्टिक पर 'इक्विपमेंट सेंट पीटर्सबर्ग' लिखा हुआ था. सेंट पीटर्सबर्ग, रूस के सबसे बड़े शहरों में से एक है.

विभाग के अधिकारियों का ये भी कहना था कि हो सकता है ये व्हेल, बाड़े में कैद की गई हो और किसी तरह बच निकली हो. और चूंकि ये व्हेल इंसानों की आदी लग रही है, इसलिए हो सकता है कि इसे रूसी नेवी द्वारा ट्रेनिंग दी गई हो. हालांकि रूस की तरफ से नॉर्वे के इस बयान पर कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. 

नॉर्वे और रूस के उत्तर में आर्कटिक महासागर का एक हिस्सा बेरेंट्स सी के नाम से जाना जाता है. इस इलाके में रूसी पनडुब्बियां सक्रिय रहती हैं. इसके अलावा इसी इलाके को उत्तरी समुद्री रास्तों का गेटवे भी कहा जाता है. यहां से अटलांटिक और प्रशांत महासागर के लिए छोटे समुद्री रास्ते हैं. इसीलिए आशंका जताई गई है कि रूस इन इलाकों में जासूसी गतिविधियां बढ़ाने के लिए इस व्हेल का इस्तेमाल करता रहा है.

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