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रस्किन बॉन्ड को जब विदेशी समझ लिया, मंदिर में जाने के लिए देने पड़े एक्सट्रा रुपए, खुद सब बताया

Ruskin Bond को विदेशी समझकर लोगों ने टोक दिया. लेकिन उनके पीछे खड़े एक ब्रिटिश पासपोर्ट वाले एक व्यक्ति को कुछ नहीं कहा गया क्योंकि वो देखने में विदेशी नहीं लग रहे थे. खुद सुनाया पूरा किस्सा.

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रस्किन बॉन्ड का जन्म हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था. (फाइल फोटो: PTI)

रस्किन बॉन्ड (Ruskin Bond). फेमस लेखक हैं. ‘द रूम ऑन द रूफ’, ‘द ब्लू अम्ब्रेला’ और एंग्री रिवर जैसी किताबें लिख चुके हैं. ये तो उनकी फेमस किताबें हैं. इसके अलावा भी उन्होंने कई चर्चित किताबें भी लिखी हैं. पद्म श्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित हैं. उन्होंने न्यूज एजेंसी PTI को एक ऐसी घटना के बारे में बताया है जिसकी खूब चर्चा हो रही है. ओडिशा के प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर में अधिकारियों ने उन्हें विदेशी समझ लिया था. 

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दरअसल, अधिकतर पर्यटन स्थलों पर दो तरह के शुल्क लगते हैं. एक जो भारतीय नागरिकों के लिए होता है और दूसरा विदेशी नागरिकों के लिए. विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकों की तुलना में अधिक पैसे देने होते हैं. रस्किन बॉन्ड कोणार्क सूर्य मंदिर पहुंचे थे. यहां उन्हें लोगों ने विदेशी समझ लिया. मंदिर के अधिकारियों ने उनसे विदेशी नागरिकों वाला टिकट लेने को कहा.

रस्किन बॉन्ड ने उन्हें समझाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि वो भारत के रहने वाले हैं. लेकिन इसके बावजूद भी अधिकारियों ने उनकी बात नहीं मानी. इसके बाद उन्होंने बहस से बचने के लिए एक्सट्रा पैसे देकर विदेशी नागरिकों के लिए लगने वाला टिकट ले लिया. 

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इतना ही नहीं, रस्किन ने आगे कहा कि उनके पीछे एक सरदार खड़े थे. जिनके पास ब्रिटिश पासपोर्ट था. लेकिन इसके बावजूद भी उनसे विदेशी नागरिकों वाला टिकट लेने को नहीं कहा गया. क्योंकि वो देखने में विदेशी नहीं लग रहे थे.

90 साल के रस्किन बॉन्ड का जन्म 1934 में हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था. उनके माता-पिता ब्रिटिश थे. बॉन्ड हमेशा से खुद को भारतीय बताते हैं और कई सालों से भारत में रह रहे हैं. इससे पहले बॉन्ड ने कहा था कि वो ना केवल जन्म से बल्कि अपनी पसंद से भी भारतीय हैं. बॉन्ड ने बताया कि उन्होंने आजादी से पहले और बाद में भारत में हुए बदलावों को देखा और स्वीकार किया है.

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उन्होंने 500 से अधिक लघु कथाएं, निबंध और उपन्यास लिखे हैं. इनमें बच्चों के लिए 69 पुस्तकें शामिल हैं. पद्म श्री और पद्म भूषण के अलावा उन्हें जॉन लेवेलिन राइज पुरस्कार और साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है.

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