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'इस चेहरे के साथ क्या मैं कभी दुल्हन नहीं बन पाऊंगी?'

एक लाइलाज बीमारी से जूझ रही लड़की की मार्मिक कहानी.

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रूबी को न्यूरोफ़ाइब्रोमेटोसिस नाम की बीमारी है, जिस कारण उसके मुंह पर ट्यूमर हो गए हैं.
रूबी दुलारी 18 साल की है. लखनऊ, उत्तर प्रदेश के पास एक छोटे से गांव में रहती है. सालों हो गए उसे अपने घर से बाहर निकले हुए. 2013 में रूबी की मां का देहांत हो गया था. पिता का दाहिना हाथ नहीं है. काम करते हुए मशीन में आ गया था. रूबी को 'न्यूरोफ़ाइब्रोमेटोसिस' नाम की बीमारी है, जिस कारण उसके मुंह पर ट्यूमर हो गए हैं.
रूबी को दोनों आंखों से दिखाई देता है. लेकिन दाहिनी आंख पर इतना बड़ा ट्यूमर है कि उससे देखना हो तो उस पर से अपनी खाल हटानी पड़ती है. रूबी महज़ तीन साल की थी जब उसके चेहरे पर ट्यूमर बनने शुरू हो गए थे.
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ये ट्यूमर ज़्यादातर मामलों में दर्द भी नहीं देते. लेकिन खाने-पीने और बोलने में दिक्कत होती है.
रूबी का सपना है कि वो भी एक दिन दुल्हन बने. बाकी लड़कियों की तरह, उसकी भी शादी हो. लेकिन रूबी को ये भी लगता है कि उसके चेहरे के कारण कभी कोई उससे शादी नहीं करेगा. जब लोग ही उसे घृणित नज़रों से देखेंगे तो वो और क्या सोचेगी? रूबी का मां उसकी बेस्ट फ्रेंड थी. मां के लिए हमेशा उसका बच्चा प्यारा होता है और रूबी का चेहरा उसकी मां के प्यार के आगे नहीं आता था. लेकिन लोग ऐसा नहीं सोचते. इसमें रूबी की क्या गलती जो ये बीमारी उसे हुई?
स्कूल में कोई उसके पास नहीं बैठना चाहता था. सब उससे या तो डरते थे या उसकी हंसी उड़ाते थे. ऐसे में लोगों की खराब मानसिकता दिखती है. रूबी बाज़ार जाए तो लोग उसे घूरने लगते हैं, उसे ताने मारते हैं. अब उसने बाज़ार जाना बंद कर दिया है. बहुत डॉक्टर्स को दिखाया. लेकिन किसी दवाई का असर नहीं हुआ, बल्कि चीज़ें बिगड़ती गईं. अलग-अलग शहरों के डॉक्टर्स को दिखाया लेकिन सारे डॉक्टर्स ने हार मान ली.
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इस बीमारी का एक मात्र इलाज सर्जरी है. लेकिन कुछ साल बाद फिर से ट्यूमर विकसित हो जाते हैं.
डॉक्टर जसवन शाक्य नेपाल की राजधानी काठमांडू के सुषमा कोइराला मेमोरियल हॉस्पिटल में मेडिकल डायरेक्टर और सर्जन हैं. उन्होंने न्यूरोफ़ाइब्रोमेटोसिस के कई मरीज़ों को हैंडल किया है. उनके मुताबिक रूबी को नर्वस सिस्टम से संबंधित एक मल्टी सिस्टम जेनेटिक डिसऑर्डर है, जिसकी वजह से ट्यूमर बनने लगते हैं. वो ये भी बताते हैं कि इस बीमारी को झेल रहे लोग आम ज़िंदगियां जी सकते हैं, और ये ट्यूमर ज़्यादातर मामलों में दर्द भी नहीं देते. लेकिन खाने-पीने और बोलने में दिक्कत होती है.
इस बीमारी का एक मात्र इलाज सर्जरी है. लेकिन कुछ साल बाद फिर से ट्यूमर विकसित हो जाते हैं. रूबी के पिता बताते हैं कि अपनी मां के जाने के बाद रूबी बिलकुल अकेली हो गई है. उसकी मां उसकी ताकत थी. रूबी के लिए अपनी बीमारी और मां को खोने का दुख बहुत बड़ा है. जब वो बोलती है तो ट्यूमर के कारण लोगों को उसकी बात समझने में दिक्कत होती है. घर से बाहर निकलो तो लोग या तो दया की नज़रों से देखते हैं या फिर घृणा की. ये बीमारी सिर्फ़ रुबी को ही नहीं किसी को भी हो सकती है. इस पर उसके गांव वालों जैसी प्रतिक्रिया देने वाले लोग बस अपनी घटिया मानसिकता दिखाते हैं.


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