'TRP घोटाला' मामले में रिपब्लिक टीवी के CEO विकास खानचंदानी गिरफ्तार
रिपब्लिक टीवी की ओर से इस मामले में क्या कहा गया है?
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विकास खानचंदानी की फाइल फोटो. साभार- ट्विटर
TRP स्कैम. पिछले दिनों काफी चर्चा में रहा. पुलिस इसकी जांच कर रही है. इसी सिलसिले में रविवार 13 दिसंबर को मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के CEO विकास खानचंदानी को गिरफ्तार कर लिया. इस गिरफ्तारी के साथ मुंबई क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 13 हो चुकी है. https://twitter.com/ANI/status/1337986809872044035 रिपब्लिक टीवी का क्या कहना है? रिपब्लिक टीवी की ओर से कहा गया कि विकास खानचंदानी ने मुंबई पुलिस के साथ सहयोग किया है और 100 घंटे से अधिक की पूछताछ का सामना किया है. ग्रुप की ओर से कहा गया कि विकास की अग्रिम जमानत की सुनवाई से एक दिन पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तारी के दौरान पुलिस के पास कोई कागजात नहीं थे. https://twitter.com/Republic_Bharat/status/1338029332984254466 कथित टीवी रेटिंग घोटाला, अक्टूबर में सामने आया था. रेटिंग एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल यानी BARC ने हंसा रिसर्च ग्रुप के माध्यम से एक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ टेलीविज़न चैनल TRP नंबरों की हेराफेरी कर रहे हैं. हंसा रिसर्च के अधिकारी नितिन देवकर की शिकायत पर 6 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की थी. हंसा BARC के वैंडर्स में से एक है. पिछले महीने रिपब्लिक टीवी के डिस्ट्रीब्यूशन हेड घनश्याम सिंह को इस कथित TRP घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था. हाल ही में उन्हें मुंबई की एक अदालत ने जमानत दे दी थी. रिपब्लिक टीवी नेटवर्क ने आरोप लगाए कि उनके असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट घनश्याम सिंह को पुलिस ने पूछताछ के दौरान पीटा भी था. मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने इस 'TRP घोटाला' मामले में 1400 पन्नों की एक चार्जशीट फाइल की है जिसमें करीब 140 गवाहों के बयान भी दर्ज हैं. गौरतलब है कि 8 अक्टूबर को मुंबई पुलिस के कमिश्नर परमबीर सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस 'TRPघोटाला' की बात कही थी. क्या है TRP का मतलब? TRP. फुलफॉर्म है Television Rating Point. इन पॉइंट्स के जरिए ही यह पता चलता है कि कोई शो टीवी पर कितना अधिक देखा गया. ये पॉइंट्स ही बताते हैं कि कोई शो कितना हिट जा रहा है, या उसे कोई पूछ ही नहीं रहा. इसी वजह से अक्सर आपने टीवी चैनलों को अपने प्रोग्राम की TRP की नुमाइश करते भी देखा होगा. इस TRP के जरिए ही इंडस्ट्री की सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसी BARC यानी Broadcast Audience Research Council एक लिस्ट जारी करती है. यह लिस्ट हर हफ्ते आती है. इसमें लिखा होता है कि किस चैनल को किस टाइम स्लॉट में कितने इंप्रेशन मिले. मतलब कितने लोगों ने उसे देखा. हालांकि ये मामला सामने आने के बाद TRP को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था. टीवी चैनलों की कमाई का पूरा सिस्टम इसी TRP से चलता है. टीवी चैनलों को अपनी आमदनी का 90 फीसदी हिस्सा विज्ञापनों से मिलता है. इन विज्ञापनों को दिखाने का हर टीवी चैनल का अपना-अपना रेट होता है. यह रेट इस बात से ही तय होता है कि किसी चैनल को कितने ज्यादा लोग देख रहे हैं.
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