RBI की ये पहल सराहनीय कही जा सकती है, मगर इस देरी का खामियाजा तो लोग भुगत ही चुके हैं.
मोदी के 50 दिन खत्म, अब RBI ने एक नया आदेश जारी किया है
ऐसा लग रहा है जैसे लोगों की मदद करने का ठेका सिर्फ RBI और सुप्रीम कोर्ट ने ले रखा है.
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फोटो - thelallantop
नोटबंदी से परेशान ग्रामीण इलाके की जनता के लिए राहत भरी खबर है. RBI. हिंदुस्तान में बैंकों का मुखिया. उसने मंगलवार को अपने मातहत बैंकों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं. निर्देश के अनुसार, करेंसी मेन्टेन करने वाले बैंकों को अपनी ग्रामीण शाखाओं, जिला सहकारी बैंकों, व्यावसायिक बैंकों, पोस्ट ऑफिसों और वाइट लेवल ATM में प्राथमिकता के आधार पर नोट सप्लाई करने को कहा गया है. कभी स्कूली लेखों में हम लिखा करते थे कि हमारा देश गांवों में बसता है. अगर देश को आगे बढ़ाना है, तो शुरुआत गांवों से करनी होगी. विकास दर बढ़ रही है, मगर गांव पीछे छूट गए हैं. 8 नवंबर, 2016 की सांझ. पीएम मोदी अपने कार्यकाल में पहली बार राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे. जो जहां था, वहीं चकित-सा खड़ा रह गया. तमाम मुद्दों की भीड़ में से निकले नए शब्द ‘नोटबंदी’ ने अपनी जगह बना ली. कुछ दिनों तक तो सब ठीक रहा, फिर परेशानियों की बरसात आ गई. किसानी. यकीनन गांवों में ही होती है. लगातार खर्च मांगती है. तन-मन-धन का. डिजिटल समझ से कोसों दूर देश के सुदूर इलाकों में ये परेशानी ज्यादा मुखर थी, मगर जाहिर नहीं हो पा रही थी. ऑनलाइन भुगतान को वरीयता देने की बात चल रही है. उससे पहले डिजिटल समझ को विकसित किया जाए, तो ज्यादा बेहतर और प्रभावी होगा. नया साल शुरू हो चुका है. अब ग्रामीण इलाकों की ओर ध्यान दिया गया है. RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे 500 और उससे कम मूल्य के नोटों का 40 प्रतिशत ग्रामीण इलाके में सप्लाई करें. पोस्ट ऑफिसों में भी इन नोटों की आपूर्ति करने का निर्देश दिया गया है.
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ये स्टोरी अभिषेक ने लिखी है.
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