e-NAM मतलब e नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट. किसानों को उनकी फसल का उचित रेट दिलाने के लिए सरकार का उपक्रम है. साथ में कैशलेस इंडिया का सपना भी संलग्न है. उसके लिए ये ऐड जमकर दिखाया जा रहा है. लेकिन इस ऐड में शायद कुछ 'भूल चूक लेनी देनी' हुई है. नहीं नहीं, गणित की मिस्टेक नहीं है. फैक्चुअल एरर लग रही है. मतलब इस आंकड़े से ये फसल 54 हजार 247 रुपए प्रति किलो बिक रही है.
पहले इसकी गणित समझ लो. जो हमने देश के टॉप मैथमैटीशियन्स से निकलवाई है. मजाक कर रहे हैं यार इतनी गणित तो कोई भी कर सकता है जो बिना ग्रेस मार्क्स के पास हुआ हो. तो लो समझो. 1.13 लाख टन फसल
एक टन = एक हजार किलो
1.13 लाख = 113000
1.13 लाख टन = 113000*1000
=11,30,00000 6.13 लाख करोड़ रुपए
6130000000000
इस आंकड़े को ऊपर वाले, मतलब 113000000 से भाग कर देंगे, तो निकलकर आएगा 54247.78/Kg. अब सवाल ये है कि कौन से किसान हैं ये और क्या पैदा कर रहे हैं इस शस्यश्यामला भूमि से जो इतना महंगा जा रहा है? और वो डिजिटल पेमेंट करा रहे हैं. केसर का दाम लगभग एक लाख रुपए प्रति किलो है. इतने में आधा किलो आएगा. लेकिन कितने किसान केसर पैदा कर रहे हैं? इसके अलावा देश में सबसे महंगा पैदा होने वाला प्रॉडक्ट है अफीम. 8 लाख रुपए किलो. 54 हजार के आस पास तो गांजा आ रहा है.(एक्सपर्ट्स के मुताबिक. ये न समझो कि हमऊ 'चढ़ाकर' बता रहे हैं.) इस ट्वीट के बाद ये सवाल बार बार पूछा भी जा रहा है रिप्लाई में. देखो रविशंकर प्रसाद कब तक जवाब देते हैं. वैसे ये उनका पीएम को गंगा जैसा पवित्र बताने वाले ट्वीट के बाद दूसरा वायरल ट्वीट है. ये भी पढ़ें: रविशंकर प्रसाद 'गंगा जैसा पवित्र' इमोशन में बहके तो नहीं कह गए












