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क्या दलित होने की वजह से राष्ट्रपति कोविंद के साथ जगन्नाथ मंदिर में धक्कामुक्की हुई?

राष्ट्रपति भवन की ओर से पुरी प्रशासन के पास एक चिट्ठी भेजी गई है.

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फोटो - thelallantop
सोशल मीडिया पर लोग ये लिख रहे हैं - जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करने गए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद के साथ धक्कामुक्की हुई.
कुछ इस तरह की खबरें भी आई हैं. लोग लिख रहे हैं कि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के साथ मंदिर के अंदर बुरा सलूक हुआ. उनके साथ धक्कामुक्की की गई. इसलिए कि वो दलित हैं. ऐसे में ये सवाल भी उठ रहा है कि जब राष्ट्रपति के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम दलितों की क्या ही कहें. ये पूरा मामला क्या है, इसका ब्योरा बताते हैं आपको.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स भी ऐसी आईं. लेकिन असल में ये कोई धक्कामुक्की थी ही नहीं. जैसे आप कहीं जा रहे हों और बगल में खड़े या चल रहे इंसान के साथ आपका शरीर छू जाए, बिल्कुल ऐसा ही मामला था ये.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स भी ऐसी आईं.

ये एक और फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट देखिए...
ये एक और फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट देखिए...

 
लोग लिख रहे हैं कि दलित होने की वजह से मंदिर के अंदर राष्ट्रपति के साथ धक्कामुक्की की गई.
लोग लिख रहे हैं कि दलित होने की वजह से मंदिर के अंदर राष्ट्रपति के साथ धक्कामुक्की की गई.

क्या हुआ था? 18 मार्च, 2018. राष्ट्रपति कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद ओडिशा के पुरी पहुंचे. यहां मशहूर जगन्नाथ मंदिर है. राष्ट्रपति सपत्नी मंदिर में दर्शन करने गए. राष्ट्रपति के लिए कुछ प्रोटोकॉल तय होते हैं. उनकी सुरक्षा के मद्देनजर. ऐसे ही ये प्रोटोकॉल भी है कि राष्ट्रपति कहीं जाएं, तो कोई उन्हें छू नहीं सकता. मतलब उनके और लोगों के बीच दूरी होनी चाहिए. एक खास दायरे के अंदर किसी को मौजूद नहीं होना चाहिए. ये सारे सुरक्षा से जुड़े नियम हैं. मगर मंदिर के अंदर राष्ट्रपति के साथ 'बॉडी टू बॉडी' टच हो गया. मतलब मंदिर के अंदर के ही दो लोग राष्ट्रपति के शरीर से छू गए. ये दोनों मंदिर के ही पंडे थे.
पुरी के राजा को गजपति महाराज कहते हैं. वो खुद भी जगन्नाथ मंदिर के पंडा माने जाते हैं. परंपरा कहती है कि वो भगवान जगन्नाथ के पहले नंबर के सेवक हैं. ये तस्वीर पुरी में होने वाली सालाना रथयात्रा की है. इसमें गजपति महाराज रथ के पास झाडू लगाते हैं (फोटो: रॉयटर्स)
पुरी के राजा को गजपति महाराज कहते हैं. वो खुद भी जगन्नाथ मंदिर के पंडा माने जाते हैं. परंपरा कहती है कि वो भगवान जगन्नाथ के पहले नंबर के सेवक हैं. ये तस्वीर पुरी में होने वाली सालाना रथयात्रा की है. इसमें गजपति महाराज रथ के पास झाडू लगाते हैं (फोटो: रॉयटर्स)

राष्ट्रपति भवन की तरफ से चिट्ठी आई राष्ट्रपति के लौटने के कुछ दिनों बाद राष्ट्रपति भवन की ओर से एक चिट्ठी आई. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास. इसमें राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान मंदिर की ओर से किए गए इंतजामों पर सवाल उठाया गया था. वो शरीर छूने वाली घटना का जिक्र था इस खत में. DM ने ये मुद्दा मंदिर प्रशासन के साथ हुई मीटिंग में उठाया. मंदिर प्रशासन ने मामले की जांच का आदेश दिया. मंदिर प्रशासन की कमिटी में DM और SP, दोनों शामिल हैं. जांच हुई. पाया गया कि राष्ट्रपति के साथ हुआ 'बॉडी टू बॉडी टच' अनजाने में हुआ था. दोनों पंडों का न तो राष्ट्रपति को नुकसान पहुंचाने का इरादा था और न ही उन्होंने किसी तरह की धक्कामुक्की ही की. चूंकि राष्ट्रपति भवन की ओर से चिट्ठी भेजी गई थी, इसीलिए मंदिर प्रशासन को इस चिट्ठी का जवाब भी देना होगा. इसके लिए मंदिर प्रशासन ने फैसला किया है. कि दोनों पंडों को 'कारण बताओ नोटिस' भेजा जाएगा. उनकी सफाई मिलने के बाद राष्ट्रपति भवन को जवाबी चिट्ठी भेजकर चीजें साफ की जाएंगी.
ये उड़िया में लिखी चिट्ठी है. वहां यही बोलचाल की भाषा है.
ये मंदिर की मैनेजिंग कमिटी की प्रॉसिडिंग का ब्योरा है. उड़िया में तैयार किया गया है. वहां यही बोलचाल की भाषा है.

 
पुरी में आजतक के पत्रकार हैं सौरभ हरिचंदन. हमने उनसे उड़िया में लिखी गई इस चिट्ठी का हिंदी में अनुवाद करने को कहा. जो हिस्सा लाल रंग घेरे के अंदर है, उसको पढ़कर पता लगता है कि ये मामला क्या है.
पुरी में आजतक के पत्रकार हैं सौरभ हरिचंदन. हमने उनसे उड़िया में लिखी गई इस चिट्ठी का हिंदी में अनुवाद करने को कहा. जो हिस्सा लाल रंग घेरे के अंदर है, उसको पढ़कर पता लगता है कि ये मामला क्या है.

मंदिर की मैनेजिंग कमिटी ने क्या कहा? मंदिर प्रशासन की जो मीटिंग हुई, उसकी कार्यवाही के लेटर की कॉपी हमारे पास है. ये उड़िया भाषा में है. हमने इसके कुछ हिस्सों को मार्क किया है. पुरी में आज तक से जुड़े पत्रकार सौरभ हरिचंदन ने हमारे लिए इन हिस्सों का अनुवाद किया है. आप इसे पढ़ेंगे, तो आपको पूरा मामला समझ आ जाएगा-
मंदिर में बहुत सारे वीआईपी आते हैं. उनके दर्शन के समय में बहुत सारी असुविधाएं होती हैं. रत्न सिंहासन (जहां भगवान की मूर्ति रखी हुई है) पर माथा टेकने के लिए महामहिम राष्ट्रपति जब जा रहे थे, तो उस समय खुंटिया सेवक (पंडा) आगे खड़े रह गए. वो एक किनारे नहीं हटे. उसके अलावा कुछ और सेवक (पंडा) राष्ट्रपति जी के शरीर के साथ छू गए. उनके साथ उनकी पत्नी जो फर्स्ट लेडी हैं, उनके शरीर के साथ भी उन सेवकों का शरीर छू गया. जिसकी वजह से राष्ट्रपति कार्यालय से असंतोष व्यक्त किया गया है. 
याद रखा जाना चाहिए कि मंदिर प्रशासन की समिति में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं. वो इस मीटिंग का भी हिस्सा थे. इस चिट्ठी से पता लगता है कि ये मामला प्रोटोकॉल का पालन न होने से जुड़ा था. किसी तरह की बदसलूकी नहीं हुई. इसीलिए राष्ट्रपति भवन की जो आपत्ति है, वो सुरक्षा इंतजामों से जुड़ी है. जो हुआ, वो इतना ही हुआ कि आप कहीं से जा रहे हों और बगल में खड़े या चल रहे इंसान का शरीर आपसे छू जाए.
जगन्नाथ मंदिर में दलितों के घुसने पर कोई पाबंदी नहीं है जगन्नाथ मंदिर में दलितों के घुसने, उनके दर्शन करने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है. ऐसी परंपरा पहले थी. मतलब आजादी के पहले. तब मंदिर के ऊपर पुरी के महाराज का नियंत्रण होता था. पुरी के महाराजा को 'गजपति महाराज' कहते हैं. आजादी के कुछ सालों बाद, साल 1952 में जगन्नाथ मंदिर राज्य सरकार के कंट्रोल में आ गया. मंदिर के रखरखाव के लिए एक मैनेजिंग कमिटी बनी. इस कमिटी के प्रमुख अब भी गजपति महाराज ही होते हैं. मगर कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस समिति का हिस्सा होते हैं. मंदिर के अंदर दलितों के साथ, या किसी भी जाति के लोगों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता है. हां, मंदिर किसी गैर-हिंदू को अंदर आने और दर्शन करने की इजाजत नहीं देता.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी पत्नी सविता कोविंद के साथ पुष्कर मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर हंगामा हो गया.
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी पत्नी सविता कोविंद के साथ पुष्कर मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर हंगामा हो गया.

राष्ट्रपति की मंदिर वाली एक और खबर वायरल हुई थी इसके पहले भी एक खबर आई थी. कि राष्ट्रपति कोविंद को दलित होने की वजह से पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में नहीं घुसने दिया गया था. उनकी एक तस्वीर वायरल हुई थी. जिसमें वो मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा करते दिख रहे थे. बाद में पता लगा कि राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद के पांव में दर्द था. वो सीढ़ी नहीं चढ़ पा रही थीं. इसीलिए पूरे कोविंद परिवार ने सीढ़ियों पर ही पूजा की.


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