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पड़ताल : क्या दलित होने की वजह से मंदिर में घुसने से रोक दिए गए थे राष्ट्रपति कोविंद?

14 मई 2018. देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने दो दिन की यात्रा पर राजस्थान पहुंचे थे. उनके साथ उनका परिवार भी था. जयपुर पहुंचने के बाद उन्हें राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पुष्कर मंदिर में दर्शन-पूजन करने जाना था. ये ब्रह्मा का इकलौता मंदिर है, जो हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्थानों में से एक है. माना जाता है कि अगर किसी ने चार धाम की यात्रा की है और उसने पुष्कर में पूजा-अर्चना नहीं की है, तो उसकी चार धाम की यात्रा अधूरी ही रहेगी.

राष्ट्रपति कोविंद, उनकी पत्नी सविता कोविंद और बेटी स्वाति कोविंद 14 मई की सुबह अजमेर पहुंचे. वहां से वो पुष्कर मंदिर पहुंचे और मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर पूजा-अर्चना शुरू की. इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर ऐक्टिव लोग राष्ट्रपति कोविंद और उनकी मंदिर यात्रा को ट्रोल करने लगे. सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल किया जाने लगा कि दलित होने की वजह से राष्ट्रपति कोविंद को मंदिर के अंदर नहीं जाने दिया गया और इसी वजह से उन्होंने सीढ़ियों पर बैठकर पूजा की.

लेकिन सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही ये खबर पूरी तरह से गलत है. एसडीएम विष्णु गोयल के मुताबिक राष्ट्रपति कोविंद परिवार के साथ मंदिर में पूजा के लिए जाने वाले थे. लेकिन उनकी पत्नी सविता कोविंद के पैरों में दर्द था. मंदिर में जाने के लिए 50 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं. दर्द की वजह से वो चढ़ नहीं सकती थीं, इसलिए प्रशासन की ओर से वैकल्पिक इंतजाम किए गए. इसके बाद राष्ट्रपति कोविंद, उनकी पत्नी सविता कोविंद और बेटी स्वाति कोविंद ने मंदिर की पहली सीढ़ी पर ही बैठकर पूजा की. इसके अलावा राष्ट्रपति को पुष्कर सरोवर भी गए थे. वहां भी सीढ़ियां चढ़कर ही जाना था, लिहाजा राष्ट्रपति ने ब्रह्म घाट के मुख्य द्वार पर शंकराचार्य मंदिर के पास ही पुष्कर सरोवर की भी पूजा की.

राष्ट्रपति को पुष्कर मंदिर की पूजा करवाने वाले पुरोहित सुरेंद्र राजगुरु ने भी कहा कि राष्ट्रपति की पत्नी के पैरों में दिक्कत थी. इसकी वजह से वो मंदिर में अंदर नहीं जा सके. पुरोहित सुरेंद्र राजगुरु ने कहा कि राष्ट्रपति खुद मंदर नहीं गए, तो उनकी बेटी स्वाति कोविंद ने विजिटर बुक में सिग्नेचर किए. वहीं राष्ट्रपति की ओर से मंदिर के लिए दान भी दिया गया. इसके बाद राष्ट्रपति अजमेर भी गए और वहां उन्होंने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादरपोशी की.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 14 मई को ख्वाजा मोइनुद्दिन चिश्ती की दरगार पर चादर भी चढ़ाई.

खुद एसडीएम विष्णु गोयल के बयान और पुरोहित सुरेंद्र राजगुरु की बातों से ये पूरी तरह से साफ है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मंदिर के अंदर नहीं गए, लेकिन इसकी वजह उनका दलित होना नहीं, उनकी पत्नी सविता कोविंद के पैरों का दर्द था. अब अगर कोई आपको जाति और धर्म के नाम पर इस तरह से बरगलाने की कोशिश करे, तो उसे ये खबर पढ़ाइए.


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