एसपी मनीष अग्रवाल के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद उन्हें इस प्रक्रिया से हटा दिया गया था. इसके बावजूद दलाल नीरज मीणा हाइवे बनाने वाली कंपनी पर पैसे देने का दबाव बना रहा था. आरोप ये कि एसपी और कंपनी की डील हुई थी कि हर महीने कंपनी 7 लाख रुपए देगी. इसके एवज में अधिगृहण की प्रक्रिया आराम से चलेगी. पिछले 4 महीने से यह रकम एसपी के पास नहीं पहुंची थी. चार महीने के हिसाब से दलाल ने कंपनी से 28 लाख रुपए की रकम मांगी. एक दूसरा मामला निपटाने के लिए वह 10 लाख रुपए कंपनी से अलग से मांग रहा था. इस तरह कुल 38 लाख रुपए की मांग SP मनीष अग्रवाल के लिए दलाल नीरज कर रहा था.

रिश्वत लेने के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो ने बांदीकुई की एसडीएम पिंकी मीणा (दाएं), दौसा के एसडीएम पुष्कर मित्तल के साथ डीलर नीरज मीणा (बाएं) को भी गिरफ्तार किया. (फोटो-शरत कुमार)
बाहर आते ही पकड़ ली गईं SDM बांदीकुई की SDM पिंकी मीणा की यह पहली पोस्टिंग थी. वह मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में बैठी थीं, तभी जमीन हाइवे बनाने वाली कंपनी की तरफ से फोन आया. फोन पर 10 लाख रुपये ले लेने की बात कही गई. एंटी करप्शन ब्यूरो का आरोप है कि पिंकी मीणा ने फ़ोन पर कहा कि कंपनी के लायजनिंग अधिकारी को पैसे दे दो. वह जब मीटिंग से निकलकर बाहर आएंगी, तब पैसे ले लेंगी. उन्हें पता नहीं था कि इस मामले में ब्यूरो के अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं. जब यह डीलिंग चल रही थी, उस वक्त अधिकारी दो घंटे से बाहर बैठकर SDM का इंतजार कर रहे थे. जैसे ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मीटिंग से SDM बाहर निकलीं और पैसे लिए, उन्हें रंगे हाथों गिरफ़्तार कर लिया गया.
दूसरे अधिकारी पुष्कर मित्तल ने तो पैसे देने वालों को घर ही बुला लिया. पुष्कर मित्तल दौसा के SDM हैं. जैसे ही कंपनी से जुड़े लोग पैसे लेकर पुष्कर मित्तल के घर पहुंचे, एंटी करप्शन ब्यूरो ने पुष्कर को रंगे हाथों गिरफ़्तार कर लिया. दलाल नीरज मीणा को एंटी करप्शन ब्यूरो ने दौसा से पीछा करके जयपुर में पकड़ा. उसके पास मिले 2 फोन जब्त कर लिए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक, अब एंटी करप्शन ब्यूरो एसपी रहे मनीष अग्रवाल पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है. इतना भ्रष्टाचार, सुनकर दंग रह गई ACB राजस्थान पत्रिका अखबार के मुताबिक, हाइवे बनाने वाली कपनी का मालिक एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के पास शिकायत लेकर 35 दिन पहले पहुंचा था. एसीबी के डीजी बीएल सोनी ने पूरा मामला सुना तो पहली बार में उन्हें इस पर भरोसा ही नहीं हुआ. उन्होंने एडीजी दिनेश एमएन और दूसरे अधिकारियों को बुलाकर उनके सामने पूरी कहानी फिर सुनी. कंपनी के प्रतिनिधि का दावा था कि वो क्षेत्र में पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को रिश्वत की सामान्य राशि देते रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की डिमांड अचानक बढ़ गई, जो पूरी करना संभव नहीं था. इसके बाद उन्होंने एसीबी को शिकायत करने का निर्णय लिया.
























