अब से इन्हें एक ऐसा गिफ्ट संभालना है, जो सीधे राजस्थान सरकार की तरफ से दूल्हा-दुल्हन को मिलने वाला है. एक बड़ा ज़रूरी गिफ्ट.
राजस्थान सरकार शादी पर वो गिफ्ट देगी, जो शरारती दोस्त देते हैं
इससे अच्छा तोहफा कुछ और नहीं हो सकता.
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पिक्चर: पॉलिटिकल मिरर से साभार
शादियों में स्टेज पर दूल्हा-दुल्हन के साथ एक-एक अटेंडेंट खड़ा होता है. मौसी की लड़की, बुआ का लड़का. इनका काम आने वाले तोहफों को दूल्हा-दुल्हन से लेकर बाजू में रखना होता है. बदले में ये हर फोटो में आते है. आज के हिन्दुस्तान टाइम्स के हवाले से खबर है कि राजस्थान में इन अटेंडेंट्स की ज़िम्मेदारी बहुत बढ़ने वाली है.
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राजस्थान सरकार राज्य के 14 जिलों में नए शादीशुदा जोड़ों को तोहफे में कॉन्डम और गर्भनिरोधक गोलियां (कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स) देने वाली है. ये एक फैमिली प्लानिंग किट का हिस्सा होंगे जिसमें कॉन्डम्स के दो पैकेट, गर्भनिरोधक गोलियों के दो पत्ते, इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स की तीन यूनिट और दो प्रेगनेंसी टेस्टिंग किट्स होंगी.इसी किट में एक वैनिटी पाउच भी होगा, जिसमें टॉवेल, कंघी, नेल कटर, बिंदियों का एक पत्ता, दो रुमाल और एक छोटा आईना होगा. किट के साथ IEC (इन्फार्मेशन, एजुकेशन और कम्युनिकेशन) मैटेरियल होगा, जिसमें ये जानकारी होगी कि कैसे पहले बच्चे के जन्म को 'डिले' करें और कैसे आगे आने वाले बच्चों में अंतर रखें. इसी के साथ प्रेगनेंसी किट के इस्तेमाल और प्रेगनेंसी का पता चलने पर किस से संपर्क किया जाए, ये जानकारी भी होगी.
ये किट ASHA (अक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्टस) कार्यकर्ताओं के ज़रिए बांटी जाएंगी और इसकी जानकारी नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में ANM (ऑग्ज़िलरी नर्सिंग मिडवाइफ) को देंगी.

पिक्चर: Reuters
कौन-कौन से जिलों में मिलेगी ये किट: ये जिले वो हैं जहां TFR (टोटल फर्टिलिटी रेट, एक महिला की रिप्रोडक्टिव लाइफ में पैदा होने वाले बच्चों की औसत संख्या) 3 से ऊपर है. सरकार इसे 2.1 पर लाना चाहती है, जिसे रिप्लेसमेंट रेट कहा जाता है. इन जिलों में बाड़मेर, धौलपुर, बांसवाड़ा, करौली, जालोर, सवाई माधोपुर, उदयपुर, डूंगरपुर, राजसमंद, जैसलमेर, पली सिरोही, बड़न और भरतपुर शामिल हैं.
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ऊंची TFR वाले 145 'हाई फोकस' जिलों की एक लिस्ट बनाई है. ये जिले उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, असम और मध्यप्रदेश में है.आपातकाल में लोगों को घरों से उठा-उठा कर जबरन नसबंदी करवाने की घटनाएं हुईं, जिसकी बाद में बहुत आलोचना हुई. इस वजह से किसी भी सरकार के लिए जनसंख्या पर लगाम लगाने के लिए कोई बोल्ड कदम उठाना मुश्किल हो गया. तो फिर हमारे यहां सरकारों ने परिवार नियोजन (फैमिली प्लानिंग) को लेकर लम्बे समय तक अपनी ज़िम्मेदारी कंडोम्स के ऐड बनाने तक सीमित रखी. सरकार की मंशा पर संदेह नहीं रहा, लेकिन सेक्स पर बात करने को लेकर हमारे समाज में जिस तरह की असहजता रही है, उस वजह से यही होता रहा कि जब ये ऐड टीवी पर आते थे, हमारे बड़े चैनल बदल देते थे. नतीजे में फैमिली प्लानिंग पर आम लोगों में सहज बातचीत शुरु नहीं हो पाई. गैर सरकारी संगठनों (NGO's) ने अपने स्तर पर कोशिश की, लेकिन उनके ये मसला उनके बस से बाहर का था.
रिप्रोडक्टिव राइट्स की ओर कदम: हिन्दुस्तान में आज तक औरतों के रिप्रोडक्टिव राइट को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई है. इसलिए राजस्थान सरकार की इस किट में एमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का होना ध्यान खींचता है. ये औरतों को उनके शरीर पर हक़ देने की दिशा में छोटा सा कदम कहा जा सकता है.
इस पहल की तरह के प्रयोग हिन्दुस्तान में किसी राज्य सरकार की तरफ से कम हुए हैं. ऐसे में राजस्थान सरकार की इस पहल का स्वागत होना चाहिए और हिन्दुस्तान के दूसरे राज्यों को भी इस से सबक लेना चाहिए.
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