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रेल यात्रा में सामान खोया, चोरी हुआ तो रेलवे जिम्मेदार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ बोल दिया

यात्रीगण कृपया ध्यान दें… सवारी अब से अपने सामान की खुद जिम्मेदार है.

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सामान चोरी होने पर रेलवे की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी. (फोटो- PTI)

“यात्रीगण कृपया ध्यान दें… सवारी अपने सामान की खुद जिम्मेदार है.”

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जिम्मेदारी की फीलिंग देती ये लाइन तो हम सबने बचपन से सुनी है. खासकर रेल यात्रा को लेकरऐसा कहीं न कहीं लिखा दिख जाता है. या सुनाई पड़ जाता है. इसी रेल यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. उसने कहा है कि ट्रेन में यात्रा करते समय अगर किसी यात्री का सामान चोरी हो जाता है तो इसके लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इसे रेलवे की सेवाओं में कमी के तौर पर नहीं माना जा सकता है.

मीडिया में छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने साल 2005 के एक मामले में फैसला सुनाते हुए ये बात कही है. कोर्ट ने इस मामले में जिला, राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम के फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें रेलवे को एक लाख रुपए का भुगतान करने को कहा गया था.

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क्या था मामला?

मामला एक कपड़ा व्यापारी से जुड़ा है. नाम सुरेंद्र बोला. 27 अप्रैल 2005 को सुरेंद्र काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस की रिजर्व सीट पर बैठकर नई दिल्ली जा रहे थे. वो अपने व्यापार के काम से रेल यात्रा कर रहे थे. एक लाख रुपए कैश लेकर. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेंद्र ने एक लाख रुपए कैश अपनी कमर में बांध रखे थे. 28 अप्रैल को तड़के साढ़े तीन बजे जब सुरेंद्र उठे तो उनके पैसे चोरी हो चुके थे.

दिल्ली पहुंचते ही उन्होंने जीआरपी थाने में FIR दर्ज कराई. इसके कुछ दिन बाद उन्होंने शाहजहांपुर के जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में सुरेंद्र ने मांग की कि रेलवे को निर्देश दिया जाए कि वो उन्हें हर्जाना प्रदान करे. जिला उपभोक्ता फोरम में बहस के दौरान सुरेंद्र ने रेलवे की सेवा में कमी की बात कहते हुए हर्जाना दिए जाने की बात कही.

जिला उपभोक्ता फोरम ने सुरेंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया. रेलवे को एक लाख रुपए हर्जाना देने का आदेश दिया गया. जिसके बाद जिला उपभोक्ता अदालत के इस फैसले को रेलवे ने चुनौती दी. राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम की तरफ से रेलवे को झटका लगा. दोनों ने जिला फोरम के फैसले को बरकरार रखा. जिसके बाद रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी.

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कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हमें समझ नहीं आता कि आखिर कोई यात्री अपने सामान की सुरक्षा नहीं कर पा रहा है तो उसके लिए रेलवे को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है? कोर्ट ने आगे कहा कि ट्रेन यात्रा के दौरान व्यक्तिगत सामान की चोरी को सेवा में कमी नहीं कहा जा सकता है. इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश देते हुए जिला, राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम के फैसले को रद्द कर दिया.

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