राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ दी है. इसके बाद से उनके सोशल मीडिया फॉलोवर्स घटते जा रहे हैं. AAP छोड़ने के ऐलान के 24 घंटे के अंदर ही 10 लाख लोग सोशल दुनिया में उनका साथ छोड़ चुके हैं. ऐसे हालात में राघव चड्ढा ने एक और वीडियो जारी किया है और इसमें लोगों को अपने डिसीजन को लेकर फिर से समझाने की कोशिश की है.
'AAP का वर्क प्लेस टॉक्सिक है इसलिए... ', घटते फॉलोवर्स देख राघव चड्ढा फिर देने आए सफाई
Raghav Chadha on Trolls: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के AAP छोड़कर बीजेपी ज्वाइन करने के बाद से ही उनके इंटाग्राम पर फॉलोवर्स घटने लगे. अब वो फिर सामने आए हैं और वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है.


बताया कि उन्हें बीते 3 दिनों से बहुत मैसेज आ रहे हैं. कुछ लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं तो कुछ सवाल पूछ रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट थे. और बेहतरीन करियर छोड़कर पॉलिटिक्स में आ गए. AAP पर आरोप लगाते हुए बोले,
‘जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए. अपने खून-पसीने से बहुत मेहनत से इस पार्टी को सींचा. लेकिन आज ये पार्टी वो पुरानी वाली पार्टी नहीं रही. इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट है. पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है. यह पॉलिटिकल पार्टी आज चंद करप्ट और कॉम्प्रोमाइज लोगों के हाथ में फंस कर रह गई है.’
उन्होंने आम आदमी पार्टी को टॉक्सिक बताया. खुद को 'राइट पर्सन इन द रॉन्ग पार्टी' बताया. उन्होंने वीडियो में आगे तीन ऑप्शंस के बारे में बात की. पहला ऑप्शन था कि वे पॉलिटिक्स ही छोड़ दें. दूसरा ऑप्शन कि इसी पार्टी में रहें और चीज़ें ठीक करने की कोशिश करें. तीसरा और आखिरी ऑप्शन अपनी एनर्जी और एक्सपीरियंस लेकर पॉजिटिव पॉलिटिक्स करें. उन्होंने तीसरा ऑप्शन चुना. अपने एक्शन को जस्टिफाई करते हुए कहा कि एक लोग, दो लोग गलत हो सकते हैं. लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते.
राघव चड्ढा ने कॉर्पोरेट के टॉक्सिक कल्चर से पॉलिटिक्स को रिलेट किया. समझाते हुए बोले,
‘मान लीजिए आप ऑफिस गोइंग लोग हैं. आपका वर्क प्लेस एक टॉक्सिक प्लेस बन जाए. उसका एनवायरमेंट टॉक्सिक हो जाए. तो ऐसे में सही फैसला यही है कि आप उस वर्कप्लेस को छोड़ दें. शायद हमने भी वही किया.’
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उन्होंने बताया कि भले ही पार्टी बदल ली है. लेकिन लोगों की प्रॉब्लम्स को उसी एनर्जी के साथ उठाएंगे, जैसे पहले उठाते थे. उन्होंने लगातार ऐसे मुद्दे उठाए जो सीधे तौर पर लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी पर असर डालते थे. इन मुद्दों में पैटरनिटी लीव, ट्रैफिक की समस्या, हवाई अड्डों पर महंगे समोसे और 10-मिनट की डिलीवरी मॉडल के जरिए गिग वर्कर्स के शोषण जैसे मुद्दे शामिल थे. इसी वजह से वो युवाओं के बीच पॉपुलर हो गए थे. लेकिन बीजेपी ज्वाइन करने के बाद से ही जेन-जी वर्ग उनसे खासतौर पर नाराज़ दिखा. ऑनलाइन अनफॉलो करने की मुहिम चलाई गई. इंस्टाग्राम पर #unfollowraghavchadh ट्रेंड करने लगा.
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