ये एक सेशन था, 18 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित 'एजेंडा आजतक' का. यात्रीगण के तौर पर देश की जनता को संबोधित किया गया. सेशन में जनता से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए रेलमंत्री पीयूष गोयल. उनसे सवाल किए 'आजतक' की एंकर श्वेता सिंह ने.
श्वेता का सवाल था-रेलवे की उपलब्धियां नहीं नाकामियां बताइए? क्या ये बुलेट ट्रेन है?
इस सवाल पर पीयूष गोयल का जवाब था-
बिलकुल नहीं. बुलेट ट्रेन का निर्धारित समय है. बुलेट ट्रेन दुनिया में जब भी कहीं लगती है. तो इसमें टाइम लगता है. भारत में हमने अगस्त 2023 का लक्ष्य रखा है. जापानी भी इसको बहुत एग्रेसिव टारगेट मानते हैं. पर हम इसे जल्दी शुरू करना चाहते हैं. इसके लिए हमने उनको मनाया है. हम 15 अगस्त 2022 तक एक सेक्शन (अहमदाबाद-मुबई) में बुलेट ट्रेन चालू करेंगे.'जिससे 2024 के चुनाव में फायदा उठाया जा सके?', श्वेता ने अगला सवाल किया, इस पर रेलमंत्री ने कहा-
बुलेट ट्रेन हमारा चुनावी मुद्दा नहीं है. इसे हम 2019 के चुनाव के साथ जोड़कर नहीं देखते हैं. चुनाव बस हमारे लिए पड़ाव है. हम कोई भी काम चुनावी फायदे के हिसाब से नहीं करते हैं. हमारा लक्ष्य है देश को आगे बढ़ाना. देश के लोगों को अलग-अलग तरह के ट्रांसपोर्ट का लाभ मिले. लोग इसका आनंद ले सकें. बुलेट ट्रेन हमारे लिए चुनावी मुद्दा नहीं है.'उन्होंने आगे कहा कि हम लोगों तक ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं पहुंचाना चाहते हैं. हमने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि देश की सभी सुपरफास्ट ट्रेनों को एसी बनाने की संभावना तलाश करें. वे इस पर सर्वे कर रहे हैं. इसीलिए हम कह रहे हैं. हम भविष्य को देखकर योजनाएं बनाते हैं. पहले की सरकारें चुनाव को देखकर योजनाएं बनाती थीं. इस सवाल पर कि भारतीय रेलवे हादसों के लिए बदनाम है. रेलमंत्री ने कहा कि-
रेलमंत्री पीयूष गोयल. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
मेरी इच्छा है, देश में एक भी व्यक्ति रेल दुर्घटना में घायल न हो. हम तो हाथियों के कॉरीडोर (असम में, जहां हाथी रेलवे ट्रैक पर पहुंच जाते हैं) में बाउंड्रीवाल बनाना चाहते हैं. हमने इसके लिए 5,000 करोड़ रुपए अलाट कर दिए. मगर फिर भी लोगों का सहयोग चाहिए. क्योंकि वो बाउंड्रीवाल हाथी तोड़ भी सकते हैं. हम मुंबई में फुट ओवरब्रिज बना देते हैं. एस्कलेटर भी बना देते हैं. पर लोग इनका इस्तेमाल नहीं करते हैं. इसलिए सभी का सहयोग चाहिए.पीयूष गोयल ने बताया-
मेरे कार्यकाल से पहले देश में अनमैंड लेवल क्रांसिग यानी मानव रहित रेलवे क्रासिंग 4,500 थीं. ये दुर्घटना की बड़ी वजह थीं. फिर मैंने अधिकारियों का लक्ष्य दिया कि सितंबर 2018 तक मुझे शून्य चाहिए. रेलवे के पूरे इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ. शुरुआत में काम ढीला दिखा. इस पर अपैल में मैंने फिर सख्ती की. अफसरों से कहा-इसको हर हाल में करो. अप्रैल 2018 से सितंबर 2018 तक 3,000 अनमैंड रेलवे क्रासिंग बंद किए गए. हमारे देश में बहुत क्षमता है.कोहरे की वजह से रेलवे की लेटलतीफी के संबंध में जब श्वेता ने सवाल किया, तो रेलमंत्री ने कहा कि वे रेलवे की सिग्नलिंग सिस्टम को बेहतर करने की दिशा में काम कर रहे हैं.
हम भारत में इंटेलीजेंस सिग्नलिंग सिस्टम डेवलप कर रहे हैं. इससे ट्रेन एक दूसरे से बात (कनेक्ट) करेंगी. इसका प्लान बना रहे हैं. हमारी दुनिया की सारी सिग्नलिंग कंपनियों से बात कर चुकी है. करीब एक लाख करोड़ रुपए खर्च करके इसे विकसित किया जा रहा है. अभी 4-5 साल लग जाएंगे. तब तक हमने कोहरे से निपटने के लिए 'फॉग पास डिवाइस' डेवलप की हैं. इससे ड्राइवर को पता चल जाता है कि सिग्नल कितनी दूर है. ये डिवाइस उत्तर भारत और पूर्वी भारत की कई गाड़ियों में लग चुकी हैं. इस साल ट्रेनों के संचालन में काफी सुधार दिखेगा. अगले साल तक ये डिवाइस सारी ट्रेनों में लग जाएंगी. फिर ये समस्या खत्म हो जाएगी. रेलवे का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण कर रहे हैं.वीडियोः अयोध्या में राम मन्दिर बनने के सवाल पर रविशंकर प्रसाद ने बताया क्या है उनका संकल्प?





















