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'दुकानदार' राहुल गांधी से क्यों चिढ़ रहे हैं कांग्रेस के विरोधी?

दिल्ली में राहुल गांधी की दो दुकानें हैं. इसी बात पर हंगामा है बरपा.

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फोटो - thelallantop
यहां दिल्ली में आम पब्लिक को जमीन वाला घर नहीं मिल पा रहा है. और 'कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ' वाले राहुल गांधी दिल्ली में दो दुकानों के मालिक हैं. साकेत में राहुल की दो दुकानें हैं. राहुल गांधी ने भी ये बात मान ली है. सही भी है, महंगाई के दौर में इस बात में कुछ गलत भी नहीं है. करियर में कई ऑप्शन साथ लेकर चलने चाहिए. लेकिन न जाने फिर क्यों विरोधी इस पर हल्ला काटे हुए हैं. बीजेपी सांसद किरीट सोमैया ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एमजीएफ मॉल में डेढ़ करोड़ रुपये में 2 दुकानें लीं. इसके लिए राहुल ने 70 लाख रुपये कर्ज लिया और फिर 70 लाख में ही उन दुकानों को एमजीएफ को ही किराए पर दे दिया. बाद में दुकानों को एमजीएफ को ही बेच भी दिया.
राहुल बोले, 'मैंने दुकानें खरीदी थीं और इसका जिक्र उनके एफिडेविट में भी है. और इसमें कोई गलत बात नहीं है.' इस मामले में एमजीएफ साकेत की तरफ से बयान जारी किया गया है. जिसमें इस सौदेबाजी का जिक्र किया गया है. एमजीएफ की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, 'राहुल गांधी को दो दुकानें बेची गईं, लेकिन उनसे वापस नहीं खरीदी गईं और न ही लीज पर ली गईं.
किरीट सोमैया ने आरोप लगाते हुए कहा, 'राहुल गांधी ने 2005 में साउथ दिल्ली के मॉल में दुकान खरीदी. इस मॉल के मालिक एम्मार-MGF कंपनी से थे. ये कंपनी राहुल गांधी के करीबी कनिष्क सिंह के परिवार की है. 2009 में इस कंपनी का डायरेक्टर गाइडो हश्चकै वही बंदा था, जो अगस्टा वेस्टलैंड डील में बिचौलिया था. और यही वो कंपनी है, जिसको दिल्ली में 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान हुए घोटाले के लिए जिम्मेदार थी. राहुल गांधी आज भले ही ये बात कह रहे हैं कि दुकानें उनकी हैं. लेकिन मैं चाहता हूं कि वो बताएं कि ये दुकानें उन्होंने कितने रुपये में खरीदी.' हालांकि राहुल गांधी का कहना है कि उन्होंने अपने नामांकन में भी इन दुकानों का जिक्र किया था.

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