सब्जी तो अर्शिया के मायके वाले भी बेचते थे, लेकिन उसकी सास जैसे परेशान नहीं करते थे. ससुराल वालों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर ही थी लेकिन तब भी उससे दहेज लिया गया. प्रेगनेंसी के टाइम भी उसे प्रताड़ित किया गया. अब उसका बच्चा है आठ महीने का. जब शादी हुई तब उसके ससुराल वालों ने वादा किया था कि आगे पढने देंगे. एसएससी की परीक्षा में उसे 78% मार्क्स मिले, लेकिन आगे पढने नहीं दिया गया.उसने भले ससुराल छोड़ दिया था, पति से कांटेक्ट रखना चाहती थी, बात करना चाहती तो उसके पति ने बात बंद कर दी. फोन नहीं उठाता था. सुलह की कोशिशें भी हुईं लेकिन फिर आठ नवंबर को उसको नोटिस मिल गया कि शौहर ने उसे ट्रिपल तलाक दे दिया है. नोटिस सौ रुपये के स्टांप पेपर पर वकील के जरिये भिजवाया गया था. शरिया कानून के मुताबिक़ तलाक-उल-बिद्द्त की बात कही गई थी. अर्शिया के पति ने ये भी कहा कि अर्शिया के घर वालों का व्यवहार ठीक नहीं था. तीन दफा लिखा था 'अर्शिया मैंने तुझे तलाक दिया'. 5 अक्टूबर की तारीख थी और दो गवाहों के दस्तखत थे. अर्शिया और उसके घर वालों के ये सब देखकर होश उड़ गए. मोहम्मद काजिम इस मामले में कुछ बोलने के लिए मीडिया वालों को नहीं मिले. मुस्लिम सत्यशोधक मंडल के प्रेसीडेंट शमशुद्दीन कहे कि अखबार में हमारी संस्था के बारे में पढ़कर अर्शिया यहां तक आई.
ट्रिपल तलाक के विक्टिम खोज रहे लोग यहां आएं
लेकिन उसने तलाक मानने से इनकार कर दिया और अब कोर्ट जाने का फैसला लिया है.
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पुणे में 18 साल की एक लड़की ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि कैसे 'ट्रिपल तलाक' ने उसकी ज़िंदगी बर्बाद कर दी. अर्शिया बागवान बारामती की रहने वाली है. उसका कहना है कि उसके शौहर ने उसे 'शरिया कानून के तीन तलाक सिस्टम' के हिसाब से तलाक दे दिया. उसने तलाक मानने से इनकार कर दिया और अब कोर्ट जाने का फैसला लिया है. ये सिर्फ 'तीन तलाक' के तहत उत्पीड़न का केस नहीं है, ये बाल विवाह का भी केस है. अर्शिया की शादी 16 साल की उम्र में हो गई थी. पुणे में ये प्रेस कॉन्फ्रेंस मुस्लिम सत्यशोधक मंडल ने करवाई थी. ये संस्था मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए काम करती है. यहां अर्शिया ने आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया कि 6 मई 2014 को उनकी शादी मोहम्मद काजिम सलीम बागवान से हुई थी. सलीम की उम्र 23 साल थी. वो बारामती का था सब्जी बेचता था.
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