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सिख समुदाय नाराज़ हुआ तो राष्ट्रपति कोविंद के हैंडल से ट्वीट डिलीट किया गया

सिख मान्यताओं के मुताबिक इसे एक तरह से ईश निंदा माना जाता है.

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घटना 1 अप्रैल की है. राष्ट्रपति दक्षिण अमरीके देशों के दौर पर थे. ये घटना चिली में घटी.
राष्ट्रपति कोविंद 31 मार्च को चिली देश की राजधानी सेंटिआगो में थे. ये आधिकारिक दौरा था. इस मौके पर वहां रह रहे हिंदुस्तानी समाज ने राष्ट्रपति का अभिनंदन किया. कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे गए थे. लेकिन इन कार्यक्रमों ने सिख समुदाय को नाराज़ कर दिया. ये घटना ऐसी थी जिसे सिख संगत कुफ़्र (ईशनिंदा जैसा ) मानती है, बेअदबी मानती है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अकाल तख़्त और शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी विरोध दर्ज कराया.
<em>राष्ट्रपति कोविंद चिली देश की आधिकारिक यात्रा पर थे. भारतीय समुदाय ने उनके स्वागत में एक कार्यक्रम रखा था. इसी कार्यक्रम में विवादित घटना हुई थी. (फोटो- राष्ट्रपति ट्विटर हैंडल).</em>
राष्ट्रपति कोविंद चिली देश की आधिकारिक यात्रा पर थे. भारतीय समुदाय ने उनके स्वागत में एक कार्यक्रम रखा था. इसी कार्यक्रम में विवादित घटना हुई थी. (फोटो- राष्ट्रपति का ट्विटर हैंडल).

क्या है मामला दरअसल, राष्ट्रपति कोविंद के ट्विटर और फेसबुक हैंडल से 1 मिनट 22 सेकेंड का एक वीडियो अपलोड हुआ था. 1 अप्रैल को ट्वीट किए गए वीडियो में पवित्र ग्रंथ, श्री गुरु ग्रंथ साहिब के मूल मंत्र की धुन पर कुछ लोग नाचते नज़र आ रहे थे. राष्ट्रपति के हैंडल से ट्वीट होने के बाद सिखों ने इस पर ऐतराज जताया. सिख मान्यता के मुताबिक, गाने या नाचने के लिए मूल मंत्र/बीज मंत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकते. इसे कुफ़्र माना जाता है. वीडियो ट्वीट होने के बाद दिल्ली के अकाली नेता और राजौरी गार्डन से भाजपा के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा.
मनजिंदर सिरसा दिल्ली शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हैं.
मनजिंदर सिंह सिरसा दिल्ली शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष भी हैं.

सिरसा ने वीडियो हटाने की गुज़ारिश की और आयोजकों के खिलाफ ज़रूरी एक्शन लेने की अपील की. गुरुद्वारों का प्रबंधन करने वाली सबसे बड़ी संस्था SGPC के सचिव रूप सिंह ने कहा
SGPC ने नाराज़गी दर्ज़ कराई है. राष्ट्रपति खुद ट्विटर पर पोस्ट अपलोड नहीं करते. उनके दफ्तर को चाहिए कि पता करें, किसने अपलोड किया. उस आदमी को पता नहीं होगा कि ये सिख संगत की भावनाओं को चोट पहुंचा सकती है.
राष्ट्रपति ऑफिस ने क्या कहा राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से प्रेस सचिवव अशोक मलिक ने ट्वीट किया. मलिक ने लिखा-
अशोक मलिक ने पूरे मामले में राष्ट्रपति सचिवालय का पक्ष रखा है.
अशोक मलिक ने पूरे मामले में राष्ट्रपति सचिवालय का पक्ष रखा है.
राष्ट्रपति कोविंद को सेंटिआगो में भारतीय समुदाय ने न्यौता दिया था. आयोजकों ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया था. इसमें राष्ट्रपति सचिवालय का कोई रोल नहीं है. भारत के सभी धर्मों और परम्पराओं के प्रति जवाबदेही तय करते हुए इस वीडियो को हटा दिया गया है.
इस मामले में राष्ट्रपति सचिवालय ने अपनी गलती मानकर, ट्वीट डिलीट कर दिया है. जाहिर सी बात है कि जानबूझकर किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का मकसद नहीं था. ये अनजाने में गलती हुई थी जिसे शिकायत मिलने के बाद तुंरत ही ट्वीट डिलीट कर सुधार लिया गया.


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