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मोदी के जिस पोस्टर पर व्यापारियों पर FIR हो गई, वो दिक्कत बहुत बड़ी है

कानपुर के व्यापारियों ने ये भी बताया है, मन की बात में इस बार क्या बोलें PM.

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कानपुर के व्यापारियों ने पीएम मोदी से रेजगारी की समस्या का हल पूछा है.
छुट्टे, चिल्लर, टूटे पैसे माने 1, 2, 5, 10 के सिक्के. कानपुर और पूरे यूपी में इसे रेजगारी बोलते हैं. मगर ये रेजगारी ही अब बवाल खड़ा कर दीस है. व्यापारियों का काम-धंधा करना मुश्किल हो गया है. वो इसलिए कि मार्केट में बड़े नोटों की कमी है. नोटबंदी से पहले की तरह ही तमाम लोग नोट दबाके बैठ गए हैं. ऐसे में खरीदार सिक्के देकर चले जाते हैं. सो रेजगारी थोक के भाव इकट्ठा हो गई है. सबसे ज्यादा मुश्किल में छोटे व्यापारी हैं. क्योंकि उनके पास सीमित पैसा रहता है. बैंकों ने अलग टेंशन बढ़ा रखी है. वो इन सिक्कों को ले ही नहीं रहे हैं. लाख RBI कहती रहे, मगर बैंक टस से मस नहीं हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि कानपुर में छोटे व्यापारियों के पास करीब 200 करोड़ की रेजगारी इकट्ठा हो गई है.
कानपुर में रेजगारी बैंकों में ना बदलने से परेशान हैं व्यापारी.
कानपुर में रेजगारी बैंकों में न बदलने से परेशान हैं व्यापारी.

अब छोटा व्यापारी जाए तो जाए कहां. नहीं, ये समस्या और जगह होती होगी. कानपुर के व्यापारी जानते हैं, कहां जाना है. सीधा प्रधानमंत्री को घेरे में ले लिए. पीएम नरेंद्र मोदी के पोस्टर लगवा दिए. उसमें पीएम से अगले मन की बात की फरमाइश भी कर दी. अपील कि कि ''मोदी जी अपने मन की बात से व्यापारी को समझाएं कि ये रेजगारी हम कहां चलाएं.'' व्यापारी यहीं नहीं माने. अपनी नाराज़गी दिखाने के लिए मोदी की तुलना नॉर्थ कोरिया के डिक्टेटर किम जोंग से कर डाली. पोस्टर में किम जोंग की तस्वीर लगी है और उसमें लिखा है "मैं दुनिया को मिटा कर दम लूंगा " दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर है और उस पर लिखा है "मैं व्यापार को मिटा कर दम लूंगा." इस स्थिति को व्यापारियों ने रोज़गार का आपातकाल बताया है.
व्यापारियों के शहर भर में लगे पोस्टर पर हो गया हंगामा.
व्यापारियों के शहर भर में लगे पोस्टर पर हो गया हंगामा.

पुलिस ने 22 व्यापारियों के खिलाफ दर्ज की FIR
पोस्टर की खबर का सबसे ज्यादा असर पुलिस-प्रशासन पर हुआ. पुलिस ने तुरंत इस मामले में 22 व्यापारियों पर FIR दर्ज करवाई. साथ ही एक व्यापारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. पुलिस ने मामले में यूपी स्पेशल पावर्स एक्ट की धारा 32 (3), आईपीसी की धारा 153 ए और 505 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है.
व्यापार के मरने पर हम क्या करेंगे?
व्यापारी पुलिस की कार्रवाई पर और भड़क गए हैं. उनका कहना है, ''पोस्टर और होर्डिंग लगाने से पहले हमने जिलाधिकारी और बैंक अधिकारियों को लिखित में दिया. समाचार पत्रों के जरिए अपने मुद्दे को उठाया लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ. हमारे व्यापार के मरने पर हम क्या करेंगे? हम एक लोकतंत्र में रहते हैं, इसलिए हमने अपने विरोध-प्रदर्शन के लिए पोस्टर और बैनर लगाए हैं. जिस तरह से हमारे खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, ऐसा लगता है कि इस देश में तानाशाही चल रही है. सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ कोई भी आवाज नहीं उठा सकता है क्या.''
नोटबंदी के बाद नोटों की कमी के चलते बैंकों ने बांटे थे सिक्के.
नोटबंदी के बाद नोटों की कमी के चलते बैंकों ने बांटे थे सिक्के.

नोटबंदी के बाद तो धड़ल्ले से सिक्के बांटे थे, अब वापस नहीं ले रहे
सबसे ज्यादा दिक्कत तो बैंकों ने सिक्के जमा न करने की बात कहके खड़ी कर दी है. व्यापारियों का कहना है कि नोटबंदी के समय जब मार्केट से 1000-500 के नोट गायब हो गए थे तो बैंकों ने धड़ल्ले से सिक्के बांटे थे. अब जब उनके पास थोक के भाव सिक्के इकट्ठे हो गए हैं तो बैंक इन्हें लेने से इनकार कर रहे हैं. ऐसा तब है जब आरबीआई की तरफ से सिक्के लेने के निर्देश हैं. बाकायदा इसका सर्कुलर जारी किया जा चुका है. मगर बैंक इस आदेश को नहीं मान रहे हैं.
दिवाली के कारण और बढ़ी दिक्कत
कानपुर की बाजार यूपी की बड़ी थोक बाजारों में से एक है. यहां आसपास के कई जिलों से छोटे व्यापारी सामान लेने आते हैं. दिवाली पास होने के कारण ये आमद और बढ़ गई है. ये सारा काम कैश में ही होता है. यहां भी कई छोटे व्यापारी बड़े नोटों की कमी के कारण सिक्के लेकर आते हैं. बड़े व्यापारी रेजगारी ले नहीं रहे. इससे बाजार का सिस्टम भी पूरी बिगड़ा हुआ है.


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