पुलिस वाले बने दाई मां, PCR वैन में डिलिवरी कराई
और दिखा दिया कि उनका काम सिर्फ लाठी बजाना नहीं है.
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आरती अपने परिवार के साथ दादरी एक्सप्रेस में ग्वालियर से समल्खा जा रही थी. कि लगभग सुबह 5 बजे उसे लेबर पेन होने लगा. उसके-सास ससुर ने सोचा नहीं था कि ट्रेन में इस तरह की नौबत आ सकती है. आरती दर्द से बेहाल हो रही थी. सास-ससुर को कुछ समझ नहीं आया तो TTE (टिकट चेकर) के पास गए. TTE ने रेलवे कंट्रोल रूम को फ़ोन कर पूरा मामला समझाया. और इधर रेलवे कंट्रोल रूम ने पुलिस को फ़ोन कर दिया. लेकिन आरती की हालत बदतर होती जा रही थी. ट्रेन को दिल्ली के सब्जी मंडी स्टेशन पर रोकने के निर्देश दिए गए. ट्रेन रुकी, लेकिन इतना वक़्त नहीं था कि आरती को अस्पताल पहुंचाया जा सके. क्योंकि उसके गर्भ की थैली फट चुकी थी. इधर यात्री मिलकर आरती को ट्रेन से बाहर ला रहे थे. उधर पुलिस की गाड़ी प्लेटफॉर्म पर लग चुकी थी. न कोई नर्स, न डॉक्टर. बस दो पुलिसवाले. जो अपने साथ तौलिए और गरम पानी लेकर आए थे. फिर हेड कॉन्सटेबल संजीव और कॉन्सटेबल संजय की मदद से आरती ने बच्चे को जन्म दिया. पुलिस वाले उसे लेकर तुरंत अस्पताल की ओर भागे. आरती के घर वाले कहते हैं कि अगर ये पुलिस वाले न आते तो जाने क्या होता. ट्रेन में कोई मेडिकल सुविधा भी नहीं थी. और ये भी कहा कि बच्चे का नाम इस सफ़र से इंस्पायर होगा. 23 साल की मां आरती और उसका बच्चा स्वस्थ हैं. ये वाकया बहुत कुछ बयां करता है. अखबारों में हम अक्सर ऐसी खबरें पढ़ते हैं जब पुलिस के आलस या अनदेखी की वजह से गुनहगार बच निकलते हैं. हमने किस्से सुने हैं पुलिस की हिंसा के. हमने सुना है पुलिस बिकाऊ होती है. लेकिन अच्छे-बुरे इंसान हर जगह होते हैं. और लाठी बजाने की छवि वाले ये लोग औरत की डिलिवरी जैसे नाज़ुक काम भी कर सकते हैं. क्षेत्र के स्पेशल कमिश्नर संजय बेनीवाल ने दोनों पुलिस वालों के लिए सम्मान घोषित किया है. सिर्फ इतना ही नहीं, एक और अच्छी बात हुई है. दिल्ली पुलिस ने बताया है कि वे आने वाले समय में औरतों की PCR (पब्लिक कॉल रिस्पॉन्स) यूनिट तैनात रखेंगे. जिससे ऐसी इमरजेंसी में औरतों की मदद हो सके.
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