नीरव मोदी बीते कई दिन से ब्रिटेन में देखा जा रहा था. उसके भारत प्रत्यर्पण के लिए प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने लंदन की वेस्ट मिंस्टर कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. अदालत ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. नीरव मोदी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हो चुका है. ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता लिया और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया. इसी के बाद से माना जा रहा था कि उसे लंदन पुलिस कभी भी गिरफ्तार कर सकती है. नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण में अभी लंबा वक्त लग सकता है. असल में गिरफ्तारी के बाद उसके पास कोर्ट जाने का विकल्प है. कोर्ट से उसे कुछ शर्तो के साथ जमानत मिल सकती है.

नीरव मोदी जैसे कारोबारियों ने बैंकों को हजारों करोड़ रुपए का चूना लगाया है.
विजय माल्या जैसा केस भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के मामले में जो प्रक्रिया चल रही है, वही प्रक्रिया नीरव मोदी के मामले में भी चलेगी. कोई 9000 करोड़ रुपए लेकर फरार हुए माल्या के प्रत्यर्पण का मामला भी अभी लंबित है. लंदन की सड़कों पर नीरव मोदी के नजर आने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था कि नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर कार्यवाही की जा रही है. विदेश मंत्रालय ने अगस्त, 2018 में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था.
नए लुक में सामने आया था नीरव मोदी ब्रिटेन के एक अखबार टेलीग्राफ ने एक वीडियो जारी किया था. इसमें कहा गया कि 48 साल का नीरव मोदी लंदन की सड़कों पर लुक बदलकर घूम रहा है. भारत की पहल पर इंटरपोल ने नीरव के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया हुआ है. इस वीडियो में नीरव मोदी द्वारा लंदन में हीरा कारोबार चालू करने की भी बात कही गई है. अपने नए लुक में नीरव ने दाढ़ी- मूंछों को बढ़ा रखा है.
क्या आरोप हैं नीरव मोदी पर? नीरव मोदी पीएनबी से 'बायर्स क्रेडिट' लेता था. बायर्स क्रेडिट 90 से 180 दिन का उधार होता है, जो इंटरनेशनल बैंक, आयातक को देते हैं. इससे इंपोर्ट के लिए पेमेंट करने में आसानी होती है. बायर्स क्रेडिट का आधार होता है बैंक. बैंक अपने कस्टमर को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग देती है. लेटर ऑफ अंडरटेकिंग' से कस्टमर की क्रेडिट हिस्ट्री का पता चलता है. नीरव मोदी और उसके सहयोगियों की तीन कंपनियों- डायमंड आर यूएस, सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टीलर डायमंड कंपनी ने पीएनबी से कई बार लेटर ऑफ अंडरटेकिंग लिए. बाद में बैंक के रिकॉर्ड में पुराने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग' नहीं मिले तो शक हुआ. इस पर बैंक अधिकारियों ने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग देने से पहले 100% कैश मार्जिन मांगा. इस पर कंपनी की ओर से कहा गया कि उनको पहले से भी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग मिलते रहे हैं. इसके बाद बैंक ने इसकी छानबीन की तो उन्हें बैंक के रिकॉर्ड में पुराने लेटर ऑफ अंडरटेकिंग नहीं मिले. इससे कर्मचारियों को शक हुआ. जांच में पता चला कि बैंक के दो कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी हो रहे थे, जिसके आधार पर नीरव मोदी और उनके सहयोगियों की कंपनी इंटरनेशनल बैंक की शाखाओं से लेटर ऑफ क्रेडिट लेती रहीं.
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