विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया-
पीएम नरेंद्र मोदी ने 2015 से अब तक कुल 58 देशों की यात्रा की हैं. इन पर खर्च हुए हैं करीब 517.82 करोड़ रुपए.
राज्यसभा में एनसीपी सांसद फ़ौज़िया ख़ान का सवाल और विदेश मंत्रालय का जवाब. (सोर्स- राज्यसभा वेबसाइट)PMIndia की वेबसाइट
पर पीएम मोदी के विदेश दौरे और उन पर हुए खर्च की ये लिस्ट अपलोड भी है. वहां जाकर हमने देखा तो पता चला कि ये आंकड़ा सिर्फ उनकी चार्टर्ड फ्लाइट पर हुए खर्च का है. प्रधानमंत्री सबसे ज़्यादा छह बार अमेरिका के दौरे पर गए हैं. रूस और चीन के दौरे पर पांच-पांच बार. पिछला दौरा 13 से 15 नवंबर, 2019 को किया था. ब्राज़ील का. ब्रिक्स देशों (ब्राज़ील, रशिया, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका) के समिट में शामिल होने के लिए. नवंबर, 2019 के बाद से उनका कोई विदेश दौरा नहीं हुआ है. जनवरी से कोविड-19 का दुनिया पर असर दिखने लगा था, जिसकी वजह से विदेश दौरे यूं भी नहीं हो सकते थे.
लेकिन विदेश दौरों की इस गुणा-गणित में एक पेच है.
तीन जवाब, तीनों बार अलग
सवाल एक ही है- पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर कितना खर्चा हुआ? सरकार ने इसके तीन बार जवाब दिए. तीनों बार अलग-अलग.पहला जवाब : 517.82 करोड़ रुपए. जो इस बार के संसद सत्र में बताया गया है. जिसके बारे में अभी ऊपर हमने आपको बताया.
दूसरा जवाब : मार्च में हुए संसद सत्र के दौरान विदेश राज्यमंत्री वी. मुरलीधरन ने प्रधानमंत्री के पिछले पांच साल के विदेशी दौरों पर हुए खर्च का विस्तृत ब्रेक-अप दिया था.
# 121.85 करोड़ रुपए 2015-16 में खर्च.मार्च में दिया ये आंकड़ा कुल मिलाकर बैठा था- 446.52 करोड़ रुपए. अब सवाल ये है कि मार्च से सितंबर तक तो पीएम ने किसी भी देश का दौरा किया ही नहीं, तो खर्च का आंकड़ा बढ़कर 517.82 करोड़ रुपए कैसे हो गया? यानी 71.30 करोड़ रुपए का इजाफा, बिना कोई दौरा किए.
# 78.52 करोड़ रुपए 2016-17 में खर्च.
# 99 करोड़ रुपए 2017-18 में खर्च.
# 100.02 करोड़ रुपए 2018-19 में खर्च.
# 46.23 करोड़ रुपए 2019-20 में खर्च.
तीसरा जवाब : 2018 के शीतसत्र में तत्कालीन विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने बताया था कि पीएम के विदेश दौरों पर 15 जून, 2014 से लेकर 3 दिसंबर, 2018 तक कुल 1583.18 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.
अब पीएम तो अपने एक ही हैं- मोदी जी. उनके विदेश आवन-जावन का खर्चा हर बार बदला कैसे जा रहा है? इस साल मार्च और सितंबर में गिनाए गए खर्चे में तो फिर भी करीब 71 करोड़ रुपए का अंतर है. लेकिन वीके सिंह के गिनाए खर्चे में तो जमीन-आसमान का अंतर है. क्या कोई ऐसा मद है, जो एक बार के खर्चे में जोड़ा गया, दूसरे में नहीं. क्या टाइमफ्रेम का अंतर है. जो भी हो..अलग-अलग संसद सत्र में दिए इन जवाबों पर भी एक सवाल किसी संसद सत्र में पूछ ही लिया जाना चाहिए.
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