जम्मू-कश्मीर के हैदरपुरा में हुए एनकाउंटर में एक डॉक्टर की मौत का मामला सियासी रंग लेने लगा है. बीते 15 नवंबर को हुए इस एनकाउंटर में दो आतंकी, एक व्यापारी और एक डॉक्टर की मौत हुई थी. इस एनकाउंटर को लेकर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती सेना पर लगातार हमला बोल रही थीं, जिसके बाद बुधवार देर रात उन्हें नजरबंद कर दिया गया.
महबूबा मुफ़्ती का तीखा विरोध
बीते 16 नवंबर को महबूबा मुफ़्ती ने एनकाउंटर पर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि सेना के जवान आम नागरिकों को मानव ढाल बनाकर मार रहे हैं. उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा,
''निर्दोष नागरिकों को मानव ढाल के रूप में उपयोग करना, उन्हें क्रॉस फायरिंग में मारना और फिर आसानी से उन्हें ओजीडब्ल्यू के रूप में लेबल करना अब भारत सरकार की नियम पुस्तिका का हिस्सा है. सच्चाई को सामने लाने और इस प्रचलित संस्कृति को खत्म करने के लिए एक विश्वसनीय न्यायिक जांच होनी चाहिए."
आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद पीडीपी प्रमुख ने एक कार्यक्रम में कहा कि ये कोई नहीं जानता कि घाटी में आतंकियों को मारा भी जा रहा है या नहीं, उग्रवाद के नाम पर आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है. इस दौरान उन्होंने हैदरपुरा एनकाउंटर में तीन बेकसूर नागरिकों के मारे जाने का दावा भी किया. बीते बुधवार को जम्मू में उनकी एक रैली में सेना के खिलाफ नारेबाजी भी हुई थी.
पुलिस ने एनकाउंटर पर क्या कहा था?
कश्मीर जोन के आईजी विजय कुमार ने एनकाउंटर के बाद बताया था कि बीते 15 नवंबर की शाम को श्रीनगर के हैदरपुरा इलाके में पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों की एक संयुक्त टीम ने आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की घेराबंदी की. मुठभेड़ में दो आतंकियों और दो नागरिकों की मौत हुई. मारे गए नागरिकों में से एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मालिक मोहम्मद अल्ताफ भट और दूसरे दंत चिकित्सक डॉ. मुदसिर गुल हैं. गुल जमीन दिलाने वाले ब्रोकर के रूप में भी काम करते थे और उनका ऑफिस भट के कॉम्प्लेक्स में ही था. ये दोनों ही आतंकवादियों के सहयोगी थे. डॉक्टर गुल के परिवार ने पुलिस के इस दावे को खारिज कर दिया. परिवार ने कहा कि सुरक्षा बलों के आरोप फर्जी हैं और गुल का आतंकियों से कोई संबंध नहीं था. डॉ गुल की पत्नी ने सरकार से इंसाफ दिलाने की मांग की. हैदरपुरा में इस एनकाउंटर को जबरदस्त विरोध शुरू हो गया. इन आरोपों को देखते हुए एनकाउंटर की जांच SIT से कराने के आदेश दिए गए.
उप राज्यपाल के बयान के बाद महबूबा को किया गया नजरबंद
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सेना के एनकाउंटर पर महबूबा मुफ़्ती के तीखे बयानों के चलते ही उन्हें नजर बंद किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के उस बयान के बाद की गई है जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ लोग घाटी में माहौल खराब करने का काम करते हैं. उन्होंने यह आश्वासन भी दिया था कि आने वाले दो सालों में घाटी को आतंक मुक्त कर दिया जाएगा. आजतक के रिपोर्टर अशरफ बानी के मुताबिक महबूबा पर एक्शन के बाद भी उनकी पार्टी एनकाउंटर्स को लेकर शांत नहीं बैठने वाली है. गुरुवार को श्रीनगर स्थित पीडीपी कार्यालय पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.