एक लड़की तीन साल तक दिन-रात मेहनत करके PCS (प्रांतीय सिविल सर्विस) अधिकारी बन जाती है. मगर ये उसका सपना नहीं. उसे IAS ऑफिसर बनना है. फिर एक दिन वो लड़की पंखे से लटककर जान दे देती है. कमरे में एक चिट्ठी मिलती है, जिसपर लिखा है:
मैं खूबसूरत नहीं दिखती. इसीलिए जान दे रही हूं.बस. इसके आगे सब खत्म. तीन साल की मेहनत. सपना. इंसान. सब एक मिनट में खत्म. क्या जीना इतना मुश्किल काम है कि इंसान ऐसी वजहों से मर जाए? जिंदगी लोगों को कैसी-कैसी तकलीफें देती है. मगर वो संघर्ष करते रहते हैं. जीने के लिए लड़ते हैं. यहां भरपूर जिंदा एक लड़की बस इसलिए मर गई कि पति ने उसे 'बदसूरत' बोल दिया था. नाराजगी इन दोनों से हो रही है- लड़की से भी, उसके पति से भी. अफसोस भी दोनों के लिए हो रहा है.

ये पेड़ों को सुखाने के लिए उन्हें कोसने की कहानी आपने 'तारे जमीं पर' में आमिर खान के मुंह से भी सुनी होगी (सांकेतिक तस्वीर)
20 की उम्र में सबके खिलाफ जाकर शादी की, फिर UPSC का फैसला लिया ये 26 साल की जूही का जिक्र है. उत्तराखंड में एक जगह है, काशीपुर. यहीं की रहने वाली थी. 20 साल की थी, जब अपने परिवार से भिड़ गई. उसे अपनी पसंद के लड़के से शादी करनी थी और परिवार इसके लिए राजी नहीं था. मगर जूही को शादी करनी थी, सो कोर्ट मैरिज कर ली. पति किसानी करता है. शादी के एक साल बाद जूही ने UPSC की तैयारी शुरू करने का फैसला लिया. पति ने भी साथ दिया. वो दिल्ली शिफ्ट हो गई. पति वहीं उत्तराखंड में रह गया. पिछले तीन साल यहीं गांधी विहार में रहकर परीक्षा की तैयार कर रही थी. PCS में सिलेक्शन हो गया था, लेकिन वो इससे संतुष्ट नहीं थी. उसको UPSC की परीक्षा पास करनी थी.
'तुम खूबसूरत नहीं हो' ये इंटरवल से पहले की कहानी है. सब बढ़िया. ठीक-ठाक. बोल्ड. अपनी मर्जी से जीने वाली लड़की की कहानी. मायूसी इसके बाद आती है. जूही और उसके पति विकास का कई बार आपस में झगड़ा हो जाता था. दोनों साथ रहने की बात पर उलझ पड़ते थे. इन्हीं लड़ाइयों में कई बार विकास ने उससे कह दिया कि तुम खूबसूरत नहीं हो. एक बार, दो बार, तीन बार नहीं, कई बार. शायद विकास को भी मालूम नहीं रहा होगा कि उसका ये ताना जूही को कितना महंगा पड़ेगा. इतना महंगा कि करियर, कुछ बनने का सपना, सब बेकार लगने लगेगा. वो भी इतनी सारी पढ़ाई-लिखाई, इतने आत्मविश्वास, इतनी सारी बोल्डनेस के बावजूद.

31 दिसंबर की देर रात तक जूही अपनी फ्रेंड्स के साथ पार्टी करती रही. अगली सुबह, जूही की कहानी खत्म हो चुकी थी. जिस न्यू ईयर के लिए पार्टी की, वो नया साल उसने देखा ही नहीं (सांकेतिक फोटो)
कितनी 'खूबसूरती' आपको जीने लायक बनाती है? 31 दिसंबर की रात न्यू ईयर की पार्टी थी. देर रात सब अपने-अपने कमरे में सोने चले गए. वो आखिरी बार था जब किसी ने जूही को जिंदा देखा था. अगले दिन सुबह कमरे के पंखे से लटकती उसकी लाश मिली. शुरुआत कितनी बोल्ड और अंत कितना निरीह! परिवार से झगड़कर अपनी मर्जी से शादी करने वाली और शादी के बाद पति से दूर रहकर करियर बनाने का सपना देखने वाली लड़की इतनी कमजोर हो गई! वो भी किस बात पर? खुद के खूबसूरत न होने की हीनभावना पर? विकास ने उसका बहुत साथ दिया. करियर बनाने के उसके फैसले को मान दिया. आर्थिक मदद दी. फिर अपने किये अच्छे पर खुद ही पानी भी फेर दिया. बार-बार उसे 'बदसूरत' होने का ताना देकर उसका सारा आत्मविश्वास मार दिया. जूही के साथ शायद वो ही हुआ जो सोलोमन आइलैंड में रहने वाले उस कहानी के आदिवासी पेड़ों के साथ करते हैं. उसके 'है से थी' बन जाने की वजह इतनी बर्बाद है कि ये खबर लिखते-लिखते पोर में उदासी बैठ गई है. अगर मुमकिन होता, तो जूही से पूछती. कि जीने के लायक होने के लिए कितनी 'खूबसूरती' अनिवार्य है? सुंदरता के 1 से 10 के स्केल पर हम कितना स्कोर करें, कि जीना जारी रखें. वरना मर जाएं? मालूम नहीं, ये सवाल जूही से किया जाना चाहिए था या फिर विकास से. शायद जूही से ही. क्योंकि विकास का ताना एक बात है. मगर खुद को 'बदसूरत' मानकर आत्महत्या तो जूही ने ही की है.
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